नई दिल्ली: चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस का हमला, अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए नागरिकता प्रमाण पर सवालचुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस का हमला, अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए नागरिकता प्रमाण पर सवाल, अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और नागरिकता सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। AICC-Law, Human Rights and RTI Department के चेयरमैन डॉ. सिंघवी ने प्रेसवार्ता में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया में विरोधाभास दिखाई देता है, जिससे चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
डॉ. सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पैरा 156 में स्पष्ट लिखा गया है कि “आधार नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि फैसले के पैरा 198 में यह भी कहा गया है कि “राशन कार्ड भी नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है।” सिंघवी के अनुसार, यदि आधार और राशन कार्ड को नागरिकता प्रमाण नहीं माना जा सकता, तो अन्य दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के जन्म प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र और 10वीं की मार्कशीट भी स्वतः नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मतदाताओं की जांच और निष्कासन की कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि “यानी निष्कासन पहले और निर्णय बाद में हो रहा है।” उनका आरोप है कि कई लोगों को मतदाता सूची से हटाने के बाद बाद में अपील का अवसर दिया गया, जबकि चुनाव प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी।

तो वोटर लिस्ट से लोगों को कैसे हटाया गया?
अभिषेक मनु सिंघवी के बयान से सियासत गरम!”
वैस्ट बंगाल का उदाहरण देते हुए सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक आदेशों के तहत वहां एक व्यवस्था बनाई गई, जिसमें निष्कासित मतदाताओं को अपील का मौका दिया गया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 6000 अपीलें दाखिल हुईं इनमें से करीब 4000 अपीलें स्वीकार कर ली गईं यानी कि लगभग 80% मामलों में निष्कासन गलत पाया गया। सिंघवी ने कहा कि यदि चुनाव के बाद लोगों को दोबारा वैध माना जा रहा है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
डॉ. सिंघवी ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं को गलत तरीके से हटाया गया और बाद में बहाल किया गया, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे विषय पर विस्तृत टिप्पणी करनी चाहिए और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की समीक्षा होनी चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक पारदर्शिता का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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2 thoughts on “नई दिल्ली: चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस का हमला, अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए नागरिकता प्रमाण पर सवाल”
Ye tow Sarkar-Sarkar ke bich hone bala “decision making power” aur “Intentions” ke differences hai. (During Cong Govt n during BJP) ruling period
आप की जो कर रहे है अच्छा है