26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन में अमित शाह बोले- अपराधी कानून और विज्ञान की संयुक्त शक्ति से नहीं बच सकता
NCRB के नए ऐप्स लॉन्च, AI और फोरेंसिक तकनीक से मजबूत होगी भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली
अमित शाह का लक्ष्य: FIR से सजा तक 3 साल में न्याय, नए कानूनों और AI तकनीक पर जोर
अरुण कुमार
नई दिल्ली: नई दिल्ली: अपराध नियंत्रण में AI, फोरेंसिक और डेटा एनालिटिक्स की बड़ी भूमिका, अमित शाह ने लॉन्च किए NCRB के चार नए प्लेटफॉर्म, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 का उद्घाटन करते हुए देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को और अधिक आधुनिक, वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस अवसर पर उन्होंने NCRB-अभिज्ञान, CrPI, ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 और ई-फॉरेंसिक्स 2.0 जैसे अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा किए गए आपराधिक न्याय सुधारों का प्रमुख उद्देश्य FIR दर्ज होने से लेकर अंतिम सजा तक की प्रक्रिया को तीन वर्ष के भीतर पूरा करना है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद देश तेजी से आधुनिक और तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसी मजबूत व्यवस्था विकसित कर रही है जिसमें अपराधी को समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सजा दिलाई जा सके।
अमित शाह ने कहा कि अपराध स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करना अपराध सिद्ध करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। फिंगरप्रिंट, डीएनए, फेसियल रिकग्निशन, मोबाइल टावर लोकेशन और डिजिटल फोरेंसिक जैसे आधुनिक उपकरण अपराध जांच में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि National Automated Fingerprint Identification System (NAFIS) के माध्यम से कई जटिल मामलों को सुलझाने में सफलता मिली है।

गृह मंत्री ने राज्यों से अपील की कि केवल अपराधियों की पहचान के लिए ही नहीं बल्कि प्रत्येक अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट को NAFIS डेटाबेस में अपलोड किया जाए। इससे राष्ट्रीय स्तर पर अपराध जांच क्षमता और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि NAFIS तभी सफल होगा जब लगातार गुणवत्तापूर्ण डेटा जोड़ा जाएगा। अमित शाह ने राज्यों को सलाह दी कि वे विशेष AI और डेटा एनालिटिक्स टीमें गठित करें जो अपराध पैटर्न का विश्लेषण कर सकें, रिपीट अपराधियों की पहचान कर सकें तथा अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क को ट्रैक कर सकें। उन्होंने कहा कि केवल डेटा संग्रहण पर्याप्त नहीं है, डेटा को इंटेलिजेंस में बदलना ही वास्तविक सफलता है।
गृह मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 17,840 पुलिस स्टेशन CCTNS से जुड़े हैं, 37.68 करोड़ FIR का डेटा उपलब्ध है, 22,000 से अधिक अदालतें ई-कोर्ट नेटवर्क से जुड़ी हैं, 2.29 करोड़ कैदियों का डेटा ई-प्रिजन में उपलब्ध है, 34.48 लाख फोरेंसिक मामलों का रिकॉर्ड मौजूद है और 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड NAFIS में उपलब्ध हैं तथा 9.91 लाख नारकोटिक्स अपराधियों का रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि इस विशाल डेटा को AI और मशीन लर्निंग के माध्यम से उपयोगी इंटेलिजेंस में परिवर्तित करना अगला बड़ा लक्ष्य है।
अमित शाह ने कहा कि भविष्य की पुलिसिंग केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अपराध होने से पहले ही उसकी संभावना का आकलन कर रोकथाम की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने राज्यों को डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और AI आधारित विश्लेषण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। गृह मंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद कई मामलों में 90 दिनों के भीतर अपराधियों को आजीवन कारावास तक की सजा दिलाई गई है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव वैज्ञानिक जांच और समयबद्ध अभियोजन के कारण संभव हुआ है।
अमित शाह ने कहा कि तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित नई आपराधिक न्याय व्यवस्था विकसित भारत 2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने NCRB और BPR&D की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इन संस्थाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
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1 thought on “नई दिल्ली: अपराध नियंत्रण में AI, फोरेंसिक और डेटा एनालिटिक्स की बड़ी भूमिका, अमित शाह ने लॉन्च किए NCRB के चार नए प्लेटफॉर्म”
AI aur ML se kisi bhi prakar ke crime agar sahi bisleshan se roka ja sakti hai tow achhi baat hai.