यह परियोजना पंजाब के विकास को नई रफ्तार देगी।
डॉ दीपक शर्मा
नई दिल्ली/चंडीगढ़:पंजाब को बड़ी सौगात: 98 साल पुरानी कादियां–ब्यास रेल परियोजना फिर शुरू, ₹1400 करोड़ से बदलेगी माझा क्षेत्र की तस्वीर,पंजाब के माझा क्षेत्र के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत सरकार ने लंबे समय से लंबित कादियां–ब्यास नई रेल लाइन परियोजना को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। रेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में रेलवे अवसंरचना को मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।प्रस्तावित कादियां–ब्यास रेल लाइन-कुल लंबाई: 39.68 किलोमीटर, अनुमानित लागत: ₹1,400 करोड़, क्रियान्वयन एजेंसी: उत्तरी रेलवे।यह रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। रेल मार्ग निम्न क्षेत्रों से होकर गुजरेगा-कादियां-धपाई-घुमान-बुटाला-सठियाला-ब्यास, इससे माझा क्षेत्र के कई गांव और कस्बे पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे।

परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक रेलवे अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिसमें 2 क्रॉसिंग स्टेशन (घुमान और बुटाला), 11 प्रमुख पुल, 121 लघु पुल और 54 रोड अंडर ब्रिज (RUB) तथा आधुनिक सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणाली व स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली “कवच” रेल मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना सुरक्षा, गति और यात्री सुविधा के आधुनिक मानकों पर आधारित होगी। कादियां–ब्यास रेल लाइन का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है। वर्ष 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने इसे स्वीकृति दी थी।1930 के दशक में निर्माण का बड़ा हिस्सा पूरा भी कर लिया गया था।बाद में बदलती प्राथमिकताओं के कारण परियोजना बंद कर दी गई।बाद में इसे सामाजिक रूप से वांछनीय रेल संपर्क परियोजना (SDRCP) के रूप में पुनर्जीवित किया गया और 2010-11 के पूरक रेल बजट में शामिल किया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। अब लगभग ₹1400 करोड़ की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर इसे नई गति दी गई है।
रेल मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि यह रेल लाइन अमृतसर–पठानकोट रेलखंड का वैकल्पिक मार्ग बनेगी और आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे संचालन को मजबूती देगी जिससे कि उत्तर भारत में रेल नेटवर्क की लचीलापन क्षमता बढ़ाएगी। नई रेल लाइन से कृषि उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे, परिवहन लागत कम होगी, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं मजबूत होंगी और लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा जिससे स्थानीय व्यापार और निवेश बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना पंजाब के ग्रामीण आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकती है।
परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार, अप्रत्यक्ष रोजगार और स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह रेल परियोजना कई महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाएगी जैसे कि अहमदिया मुस्लिम समुदाय का जन्मस्थल कादियां, डेरा बाबा जैमल सिंह, ब्यास, श्री दरबार साहिब डेरा बाबा नानक, गुरुद्वारा अचल साहिब, गुरुद्वारा भक्त नामदेव जी, घुमान, गुरुद्वारा साहिब पातशाही पंजवीं, गुरुद्वारा बाबा राजा राम जी, पंडोरी धाम और राम शरणम मंदिर व शिरडी साईं मंदिर, गुरदासपुर जिससे बेहतर रेल संपर्क से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने कादियां, ब्यास, घुमान, बुटाला, सठियाला और पूरे माझा क्षेत्र के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि केंद्र सरकार सभी आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त कर परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल रेलवे लाइन नहीं बल्कि पंजाब के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की नई आधारशिला साबित होगी।
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