शाहजहांपुर के किशोर को कासना जेल में रखा गया, जमानत मिलने के बाद भी नहीं हो सकी रिहाई; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जारी किया नोटिस
मोहित कुमार
नई दिल्ली: NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान: 16 वर्षीय नाबालिग को 2 महीने तक वयस्क कैदी की तरह जेल में रखने के मामले में यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक 16 वर्षीय किशोर को गौतम बुद्ध नगर की कासना जेल में कथित रूप से दो महीने तक वयस्क कैदी के रूप में रखने के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों के संभावित गंभीर उल्लंघन का मामला मानते हुए उत्तर प्रदेश के कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं के महानिदेशक तथा पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने अपने महानिदेशक (जांच) को भी निर्देश दिए हैं कि वे अधिकारियों की एक विशेष टीम को घटनास्थल पर भेजकर मामले की स्वतंत्र जांच कराएं और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहजहांपुर निवासी 16 वर्षीय किशोर को 14 अप्रैल 2026 को एक पार्सल से संबंधित फोन कॉल प्राप्त हुआ था। जब वह बताए गए स्थान पर पहुंचा तो वहां मौजूद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने किशोर के साथ मारपीट की तथा कुछ दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए।
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि किशोर को गौतम बुद्ध नगर जिले की कासना जेल में वयस्क कैदी के रूप में रखा गया, जबकि बाद में हुए अस्थि परीक्षण (Bone Test) में उसकी उम्र 18 वर्ष से कम यानी नाबालिग साबित हुई। रिपोर्ट के अनुसार अस्थि परीक्षण में नाबालिग होने की पुष्टि के बाद भी उसे किशोर न्याय प्रणाली के अंतर्गत बाल सुधार गृह में स्थानांतरित करने में छह दिन का अतिरिक्त समय लग गया।
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बावजूद किशोर अभी तक किशोर गृह में ही रह रहा है। बताया गया है कि उसका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और जमानत के लिए आवश्यक मुचलका (जमानती) उपलब्ध नहीं करा पाया, जिसके कारण उसकी रिहाई नहीं हो सकी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह मामला मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया। इसी संदर्भ में पुलिस कार्रवाई के दौरान किशोर को गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह एक नाबालिग के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। आयोग ने मामले की विस्तृत जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और किशोर के साथ हुए व्यवहार की पूरी रिपोर्ट मांगी है।
यह मामला किशोर न्याय अधिनियम, पुलिस कार्रवाई, जेल प्रशासन और न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई नाबालिग वयस्क कैदियों के साथ जेल में रखा जाता है तो यह उसके मानसिक, सामाजिक और कानूनी अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अब पूरे मामले पर NHRC की जांच रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
NHRC News राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग शाहजहांपुर किशोर मामला कासना जेल Juvenile Justice Act Uttar Pradesh News Human Rights Violation NHRC Notice Juvenile Home Child Rights India









1 thought on “नई दिल्ली: NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान: 16 वर्षीय नाबालिग को 2 महीने तक वयस्क कैदी की तरह जेल में रखने के मामले में यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट!”
Ye sensitive issue hai. Isni badi galti ka sahi janch honi chahiye.