भारत भू-राजनीतिक बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार-
इंडिया एनर्जी वीक 2026- 27 जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक गोवा में आयोजित
ग्लोबल एनर्जी डायलॉग में केंद्र में बना हुआ है- केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी
घरेलू खोज, स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार और स्थिर कीमतें भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं

27 जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 के समापन पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता से निपटने के लिए मजबूत तैयारी दिखाई है और इंटरनेशनल एनर्जी डायलॉग में केंद्र में बना रहेगा। पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की एनर्जी रणनीति विविधीकरण, सशक्तता और भविष्य के अनुकूल बदलावों पर आधारित है। “हमने लगातार भू-राजनीतिक झटकों का बहुत अच्छे से सामना किया है। सप्लाई के सोर्स के विविधीकरण और क्लीनर फ्यूल की ओर तेजी से बदलाव के जरिए हर चुनौती को एक अवसर में बदला गया है।”
भारत के वैश्विक रुख से अवगत कराते हुए, पुरी ने कहा कि आज देश तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष निर्यातकों में से एक है। “ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भी, भारत एनर्जी की उपलब्धता, किफायती दाम और सततता सुनिश्चित करता रहेगा।” और, “पारंपरिक एनर्जी जरूरी रहेगी, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग से लेकर सीबीजी, हाइड्रोजन और बायोफ्यूल तक हम जो कदम उठा रहे हैं, वे हमें विश्वास दिलाते हैं कि ग्रीनर फ्यूल एक बड़ी भूमिका निभाएंगे।”
वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को अस्थिरता से सफलतापूर्वक बचाया है। “वैश्विक उथल-पुथल का असर कभी भी उपभोक्ता पर नहीं पड़ा। आज भारत में एनर्जी की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं और संकट के समय भी बिना किसी रुकावट के आपूर्ति बनाए रखी गई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा समय पर कार्रवाई के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि एलपीजी सहित फ्यूल की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनी रहें।”
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने भारत की विकास यात्रा को समर्थन करने के लिए सरकार का ब्लूप्रिंट पेश करते हुये कहा, कि “7 प्रतिशत से अधिक की अनुमानित आर्थिक वृद्धि के साथ, ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ेगी। हमारा ध्यान घरेलू खोज और उत्पादन को मजबूत करने और भारत को दुनिया के लिए रिफाइंड उत्पादों के एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।
ऊर्जा परिवर्तन पर, डॉ. मित्तल ने प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के बारे में बताया कि लॉजिस्टिक ऑप्टिमाइजेशन से लेकर एआई-संचालित दक्षता तक, प्रौद्योगिकी की लागत कम करने और संचालनात्मक मजबूती को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारत सीबीजी पर अपने लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 प्रतिशत ब्लेंडिंग हासिल करना है, जिसे राज्यों की सक्रिय भागीदारी और किसानों के नेतृत्व वाली बायोमास आपूर्ति श्रृंखला का समर्थन प्राप्त है।
समापन सत्र ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 की भूमिका को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूत किया जो ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और स्थिरता को जोड़ता है, साथ ही भारत को तेजी से बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक स्थिर, विश्वसनीय और व्यावहारिक तौर पर एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है।
इंडिया एनर्जी वीक के बारे में
इंडिया एनर्जी वीक देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी क्षेत्र की हस्तियों, उद्योग जगत के अधिकारियों और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है ताकि एक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती ऊर्जा भविष्य की दिशा में प्रगति को तेज किया जा सके। एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में, आईईडब्ल्यू निवेश, नीतिगत तालमेल और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देता है।










3 thoughts on “इंडिया एनर्जी वीक 2026- भारत की ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में कैसी रही भूमिका”
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