नई दिल्ली: 200 साल की हिंदी पत्रकारिता पर बोले उपसभापति हरिवंश – “अब साक्षरता की नई परिभाषा, सीखते रहना ही असली ताकत”, राज्यसभा के माननीय उपसभापति हरिवंश ने भारतीय जनसंचार संस्थान (Indian Institute of Mass Communication) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर आधारित शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के स्मारक अंक का विमोचन किया।

“अब साक्षरता का मतलब बदल चुका है” अपने संबोधन में हरिवंश ने कहा कि आज के दौर में साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि निरंतर सीखने और बदलती तकनीकों के साथ खुद को ढालने की क्षमता ही असली साक्षरता है।उन्होंने कहा कि “जो तकनीक पहले सदियों में विकसित होती थी, अब वह महीनों में बदल रही है।” युवा संचारकों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते दौर में सार्थक सपने देखना जरूरी है, उन्हें दृढ़ संकल्प के साथ पूरा करना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने 1826 में प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ का उदाहरण देते हुए कहा कि एक प्रयास भी इतिहास बदल सकता है।
हरिवंश ने “विकसित भारत 2047” के विज़न को रेखांकित करते हुए कहा कि यह युग कौशल-प्रधान युग है,संचार, अनुसंधान और नवाचार भविष्य तय करेंगे और आर्थिक परिवर्तन ही सामाजिक बदलाव की दिशा तय करता है। उन्होंने हाई-स्पीड रेल, आधुनिक बंदरगाह और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को भारत की प्रगति का संकेत बताया। और कहा कि पत्रकारिता को हर जानकारी को जन-जन तक पहुँचाना होगा ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर जागरूक बहस और सहमति बन सके।
आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने बताया कि ‘संचार माध्यम’ का यह विशेषांक शिक्षाविदों और मीडिया विशेषज्ञों के लेखों का संग्रह है,यह हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के विकास को दर्शाता है साथ ही आधुनिक मीडिया ट्रेंड्स पर भी नजर रखता है। इस अवसर पर डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ और डॉ. के.के. निराला भी उपस्थित रहे।
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