नई दिल्ली:राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी में क्रांति: 3D लेजर तकनीक से लैस Network Survey Vehicles करेंगे सड़कों की हर खामी की पहचान, भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग अब अत्याधुनिक तकनीक की निगरानी में होंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देशभर के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर उन्नत 3डी लेजर आधारित Network Survey Vehicles (NSV) तैनात करने का फैसला किया है। यह पहल सड़क सुरक्षा, रखरखाव और यात्रियों के बेहतर अनुभव की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
छत पर लगे हाई-रिजोल्यूशन कैमरे, 3डी लेजर स्कैनर, जीपीएस और आधुनिक इमेजिंग तकनीकों से लैस ये वाहन सड़क की सतह का डिजिटल मैप तैयार करेंगे और गड्ढों, दरारों, असमानता तथा अन्य तकनीकी खामियों की सटीक पहचान करेंगे।
Network Survey Vehicle (NSV) एक अत्याधुनिक मोबाइल सर्वे सिस्टम है जो चलते-चलते राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति का रियल टाइम डेटा एकत्र करता है। वाहन में लगे 3डी लेजर प्रोफाइलर और सेंसर सड़क की पूरी सतह का डिजिटल विश्लेषण करते हैं।इस तकनीक की मदद से सड़कों की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव होगा, जिससे समय रहते मरम्मत और रखरखाव किया जा सकेगा। पहले सड़क सर्वेक्षण की पारंपरिक प्रक्रिया के तहत एक दिन में केवल 20 से 80 किलोमीटर सड़क का निरीक्षण किया जा सकता था। लेकिन नई तकनीक से लैस NSV अब प्रतिदिन लगभग 300 किलोमीटर तक राष्ट्रीय राजमार्गों का सर्वेक्षण कर सकेगा। इससे सड़कों की खामियों की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया कई गुना तेज हो जाएगी।
नई प्रणाली तीन चरणों में कार्य करेगी: पहला चरण: डेटा संग्रह- सर्वेक्षण के दौरान एकत्र किया गया डेटा एन्क्रिप्ट कर 48 घंटे के भीतर केंद्रीय डेटा केंद्र को भेजा जाएगा।
दूसरा चरण: विश्लेषण- देश के पांच क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ टीमें डेटा का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार करेंगी।
तीसरा चरण: कार्रवाई-10 दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार होकर संबंधित एजेंसियों तक पहुंच जाएगी। पहले इसी प्रक्रिया में 4 से 6 महीने का समय लगता था।
NSV द्वारा एकत्र की गई सभी जानकारियां सीधे राष्ट्रीय राजमार्गों के AI आधारित Data Lake Portal पर अपलोड की जाएंगी।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सड़कों की स्थिति का विश्लेषण कर त्वरित मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी निर्णय लिए जाएंगे। इससे सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
यह सर्वेक्षण दो लेन से लेकर आठ लेन तक के राष्ट्रीय राजमार्गों पर किया जाएगा। व्यस्त माल ढुलाई मार्गों, अधिक यातायात वाले क्षेत्रों और मौसम प्रभावित इलाकों को भी इसमें शामिल किया गया है। हर छह महीने में नियमित सर्वेक्षण सुनिश्चित करेगा कि कोई भी सड़क दोष लंबे समय तक अनदेखा न रहे।
मंत्रालय द्वारा विकसित मोबाइल ऐप के माध्यम से निरीक्षक NSV रिपोर्ट को रियल टाइम में देख सकेंगे, जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सकेंगे और मौके पर सुधार कार्यों की निगरानी कर सकेंगे तथा कार्य प्रगति पर टिप्पणियां दर्ज कर सकेंगे इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। नई प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रक्रिया केवल सड़क दोषों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित एजेंसियों को तब तक जवाबदेह बनाया जाएगा जब तक सभी खामियों का शत-प्रतिशत समाधान नहीं हो जाता। यह व्यवस्था सड़क रखरखाव को प्रतिक्रियात्मक मॉडल से निकालकर सक्रिय और डेटा-आधारित मॉडल में बदल देगी। जिससे कि बेहतर सड़क गुणवत्ता, कम दुर्घटनाएं , गड्ढों और सड़क क्षति का त्वरित समाधान, सुरक्षित और सुगम यात्रा और पारदर्शी निगरानी प्रणाली जिससे कि डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का यह कदम भारत के राजमार्ग नेटवर्क को स्मार्ट, सुरक्षित और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
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Good development for road safety and accident prone highways.