फायर NOC नहीं, 25 कमरों वाला होटल बना मौत का जाल; सरकार ने जांच के आदेश दिए, विपक्ष ने उठाए जवाबदेही के सवाल
बीरेन्द्र दाश
नई दिल्ली:दिल्ली होटल अग्निकांड: मालवीय नगर के फ्लरिश स्टे होटल में 21 की मौत, विदेशी नागरिकों समेत कई लोग बने हादसे का शिकार, दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे (Flourish Stay) होटल में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। मृतकों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें होटल में आग लगने से मरने वालों में ज़्यादातर लाइबेरिया, नाइजीरिया, मोज़ाम्बिक और बांग्लादेश के नागरिक हैं। अधिकारियों ने ये जानकारी दी। यह हाल के वर्षों में दिल्ली के सबसे भयावह अग्निकांडों में से एक माना जा रहा है।

दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार सुबह लगभग 8:50 बजे होटल परिसर के रेस्टोरेंट क्षेत्र में आग लगने की सूचना मिली। आग तेजी से ऊपरी मंजिलों और बेसमेंट तक फैल गई, जिससे होटल में ठहरे लोग अंदर फंस गए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिलाष मलिक के अनुसार दमकल और बचाव टीमों ने 37 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि कुल 40 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया गया। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग और धुएं से बचने के लिए कई लोग तीसरी और चौथी मंजिल से कूदने को मजबूर हुए। स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दे बिछाकर लोगों की जान बचाने की कोशिश की। कुछ महिलाओं और बच्चों को इसी तरह सुरक्षित निकाला गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल के पास वैध फायर NOC नहीं थी। रिपोर्टों के अनुसार जिस भवन को सीमित कमरों के लिए अनुमति मिली थी, वहां कथित रूप से अधिक संख्या में कमरे संचालित किए जा रहे थे। इस पहलू की जांच एजेंसियां कर रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए सहायता की घोषणा की गई है।
वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेका गुप्ता ने कहा है कि मालवीय नगर में भीषण आग की घटना में हुई जान-माल की भारी क्षति से मैं अत्यंत दुखी हूँ।

दिल्ली प्रशासन और संबंधित विभागों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। होटल की लाइसेंसिंग, फायर सुरक्षा मानकों और भवन नियमों के अनुपालन की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।

विपक्षी दलों ने हादसे को प्रशासनिक विफलता बताते हुए सवाल उठाए हैं कि यदि होटल के पास फायर NOC नहीं थी तो वह संचालन कैसे कर रहा था। विपक्ष ने राजधानी में फायर सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सभी होटल एवं गेस्ट हाउसों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है। भीषण आग पर AAP दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा ने कहा- फरवरी में पालम में आग लगने की एक घटना हुई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी। तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन किसी भी जांच की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। यहां 20-21 लोग जलकर मर गए। यहां दूसरे देशों से आए लोग भी थे, जो इलाज के लिए आए थे और इन छोटे होटलों में रुके हुए थे। सरकार उन पर ही दोष मढ़ रही है

राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता तो इतनी बड़ी जनहानि रोकी जा सकती थी।
आंकड़ों के अनुसार पिछले छह महीनों में दिल्ली में आग की विभिन्न घटनाओं में 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक भवनों, होटलों और गेस्ट हाउसों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, फायर ड्रिल और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। फिलहाल पुलिस, फायर विभाग और प्रशासन आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं। कई विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके दूतावासों से संपर्क की प्रक्रिया भी जारी है।
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