Search
Close this search box.

नई दिल्ली: सावधान! एक फोन कॉल आपकी जिंदगी की जमा पूंजी खत्म कर सकती है! NHRC ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड को मानवाधिकारों के लिए बड़ा खतरा बताया!

NHRC Digital Arrest Fraud Discussion: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर NHRC का बड़ा एक्शन, मानवाधिकार सुरक्षा के लिए बनेगा नया फ्रेमवर्क

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

6 साल में देश को ₹52,976 करोड़ का नुकसान- अब बन सकता है नया कानून!

NHRC Digital Arrest Fraud Discussion: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर NHRC का बड़ा एक्शन, मानवाधिकार सुरक्षा के लिए बनेगा नया फ्रेमवर्क

अरुण कुमार

नई दिल्ली: सावधान! एक फोन कॉल आपकी जिंदगी की जमा पूंजी खत्म कर सकती है! NHRC ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड को मानवाधिकारों के लिए बड़ा खतरा बताया! 6 साल में देश को ₹52,976 करोड़ का नुकसान- अब बन सकता है नया कानून! राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” फ्रॉड को मानवाधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए इस विषय पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चर्चा आयोजित की। नई दिल्ली स्थित मानव अधिकार भवन में आयोजित इस हाइब्रिड कार्यक्रम में न्यायपालिका, केंद्र सरकार, आरबीआई, सीबीआई, एनपीसीआई, ट्राई, दूरसंचार विभाग, बैंकिंग और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएचआरसी अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने की। एनएचआरसी अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में भारतीय नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के कारण लगभग 52,976 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इनमें लगभग 8 प्रतिशत नुकसान डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के कारण हुआ। उन्होंने कहा कि अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का डर दिखाकर लोगों को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखते हैं और फिर उन्हें पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।

एनएचआरसी महासचिव भरत लाल ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड का सबसे अधिक प्रभाव वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त अधिकारी, उद्योगपति और बैंक अधिकारी तथा पेशेवर वर्ग सबसे ज्यादा निशाना बनाए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव, आत्मसम्मान और गरिमा को भी गहरी चोट पहुंचती है।

खुली चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि डिजिटल अरेस्ट को अलग कानूनी अपराध घोषित किया जाए। IT Act और भारतीय न्याय संहिता में विशेष प्रावधान जोड़े जाएं और म्यूल अकाउंट (फर्जी बैंक खाते) संचालित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा सरकारी लोगो और एजेंसियों की फर्जी पहचान का दुरुपयोग करने वालों को सख्त सजा मिले।

चर्चा में यह भी सुझाव दिया गया कि लंबे समय तक चलने वाली संदिग्ध वीडियो कॉल पर अलर्ट जारी किया जाए। संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर “सर्किट ब्रेकर” लागू हो और ट्रस्टेड पर्सन ऑथेंटिकेशन सिस्टम विकसित किया जाए तथा बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले अतिरिक्त सत्यापन अनिवार्य हो।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजीत कुमार ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से निपटने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति काम कर रही है और IT Act की धारा 47 के तहत विवाद निपटान और मुआवजे की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है तथा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) फ्रेमवर्क डेटा सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के मुख्य महाप्रबंधक आर. वनराजा  और एनपीसीआई के चीफ रिस्क मैनेजमेंट श्री रमेश कृष्णमूर्ति ने बताया कि AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, संदिग्ध लेन-देन की रियल टाइम निगरानी की जा रही है और ग्राहकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है एवम बैंकिंग सेक्टर में म्यूल अकाउंट्स की पहचान के लिए AI का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।
सीबीआई की पुलिस अधीक्षक आस्था मोदी ने बताया कि कई बड़े डिजिटल अरेस्ट गिरोह दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित साइबर स्कैम सेंटरों से संचालित होते हैं और म्यूल अकाउंट्स, टेलीकॉम नेटवर्क, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा मानव तस्करी नेटवर्क का इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम देते हैं।
NHRC के सामने आए प्रमुख सुझाव व प्रमुख सिफारिशें मिली जिसमे डिजिटल अरेस्ट को अलग अपराध घोषित किया जाए, म्यूल अकाउंट्स पर सख्त कानून बने, ट्रांजेक्शन सर्किट ब्रेकर लागू हो, पीड़ितों के लिए मुआवजा फंड बनाया जाए, साइबर फ्रॉड पीड़ितों को मानसिक सहायता मिले, एक राष्ट्रीय सत्यापन पोर्टल बनाया जाए और OTT कॉलिंग प्लेटफॉर्म पर नियमन बढ़ाया जाए तथा बुजुर्गों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था हो व अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ वैश्विक सहयोग बढ़े।
एनएचआरसी ने माना कि डिजिटल अरेस्ट केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि गरिमा का हनन, निजता का उल्लंघन, मानसिक उत्पीड़न व स्वतंत्रता पर हमला जैसे गंभीर मानवाधिकार मुद्दों से जुड़ा मामला है। आयोग इन सुझावों पर विचार कर केंद्र और राज्य सरकारों को विस्तृत सिफारिशें भेजेगा।

इस चर्चा में एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्तिमू (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और श्रीमती विजया भारती सयानी; महासचिव भरत लाल, महानिदेशक (जांच) अनुपनुमा नीलेकर चंद्रा; संयुक्त सचिव समीर कुमार; कोर ग्रुप के सदस्यों, विशेष प्रतिवेदकों, विशेष मॉनिटर; भारत सरकार के विभिन्न प्रमुख विभागों -जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय,भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की पुलिस महानिरीक्षक रूपा एम. दूरसंचार मंत्रालय, ट्राई के संयुक्त सलाहकार अशोक कुमार, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई), दूरसंचार विभाग के उप महानिदेशक (एआई और डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट) संजीव कुमार शर्मा, भारतीय रिजर्व बैंक, सीबीआई,महाराष्ट्र के एडीजी श्री बृजेश सिंह, नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया- के वरिष्ठ अधिकारी; जाने-माने कानूनी और विषय-विशेषज्ञ तथा दूरदूसंचार ऑपरेटरों एयरटेल के चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर राहुल वत्स और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता एन. एस. नप्पिनाई व अधिवक्ता डॉ. पवन दुग्गल, साइबर पीस फाउंडेशन के फाउंडर और ग्लोबल प्रेसिडेंट मेजर विनीत कुमार, बैंकिंग व फिनटेक संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

Digital Arrest Fraud NHRC Digital Arrest Cyber Fraud India Digital Arrest Scam Human Rights and Cyber Crime Cyber Crime NHRC Digital Fraud Prevention Online Scam India Cyber Security India Digital Arrest Human Rights

Ib News
Author: Ib News

1 thought on “नई दिल्ली: सावधान! एक फोन कॉल आपकी जिंदगी की जमा पूंजी खत्म कर सकती है! NHRC ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड को मानवाधिकारों के लिए बड़ा खतरा बताया!”

Leave a Comment

और पढ़ें