भारतीय सशस्त्र बल (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) युद्ध के मैदान से परे मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR – Humanitarian Assistance and Disaster Relief) में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। ये बल न केवल देश की सुरक्षा करते हैं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, चक्रवात और भूस्खलन के समय सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाले बल के रूप में जानी जाती हैं। हाल की घटनाओं और रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 2025 और 2026 में इनकी सक्रियता काफी बढ़ी है।

- भारतीय सशस्त्र बल, देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के अपने मूल दायित्व का निर्वहन करते हुए, मानवीय सहायता, चिकित्सा सहयोग तथा आपदा राहत कार्यों के माध्यम से राष्ट्रीय लचीलापन सुदृढ़ करने में अग्रणी प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वर्ष 2004 की हिंद महासागर सुनामी भारत के आपदा जोखिम निवारण (एचएडीआर) ढांचे के लिए एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुई। आपदा के अभूतपूर्व पैमाने और व्यापक प्रभाव ने समन्वित त्रि-सैन्य प्रतिक्रिया की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से सामने रखा। इस दौरान भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना तथा भारतीय तटरक्षक बल ने भूमि, समुद्र और वायु तीनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जनशक्ति, उपकरण तथा रसद संसाधनों की त्वरित तैनाती कर राहत एवं बचाव अभियानों को प्रभावी रूप से संचालित किया।
- कोविड-19 महामारी के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु के अंतर्गत 55 दिनों की अवधि में समुद्री मार्ग से 3,992 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया।
- वर्ष 2025 में भारतीय थल सेना ने दस राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर 141 टुकड़ियां तैनात कीं। इन अभियानों के दौरान 28,293 नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया, 7,318 लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई तथा 2,617 व्यक्तियों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई।
- मार्च 2025 में ऑपरेशन ब्रह्मा के अंतर्गत म्यांमार में तैनात भारतीय थल सेना के 60 बिस्तरों वाले फील्ड अस्पताल ने मात्र दो सप्ताह के भीतर 2,500 से अधिक भूकंप प्रभावित लोगों को चिकित्सा उपचार प्रदान किया। इसके साथ ही, छह विमानों तथा भारतीय नौसेना के पाँच जहाजों के माध्यम से लगभग 750 मीट्रिक टन आपदा राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई गई।
- वर्ष 2025 में चक्रवात दितवाह के बाद श्रीलंका में संपर्क व्यवस्था बहाल करने, 2,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालने और 1,058 टन राहत सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से ऑपरेशन सागर बंधु संचालित किया गया। इस अभियान के दौरान भारतीय वायु सेना ने विदेशी नागरिकों सहित 264 जीवित बचे लोगों का सफलतापूर्वक निकाला गया।

वर्ष 2025 में भारतीय थल सेना ने 10 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर 141 टुकड़ियां तैनात कीं। इन अभियानों में:
- 28,293 नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया।
- 7,318 लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई।
- 2,617 व्यक्तियों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई।
कुछ प्रमुख ऑपरेशन की बोत करें तो सबसे पहले है-
- ऑपरेशन ब्रह्मा (मार्च 2025): म्यांमार में आए भूकंप के बाद 60 बिस्तरों वाला फील्ड अस्पताल तैनात किया गया, जिसमें दो सप्ताह में 2,500 से अधिक प्रभावितों को इलाज दिया गया। छह विमान और पांच नौसैनिक जहाजों से 750 मीट्रिक टन राहत सामग्री पहुंचाई गई।
- ऑपरेशन जल राहत 2: पूर्वोत्तर (नागालैंड, असम, मणिपुर) में बाढ़ के दौरान बड़े पैमाने पर बचाव कार्य, जिसमें हजारों लोगों को निकाला गया और चिकित्सा सहायता दी गई।
- पंजाब में बाढ़ राहत: 2025 मानसून में 21,500 से अधिक लोगों को बचाया और सहायता दी गई।
- ऑपरेशन राहत: उत्तर भारत में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 82 मानवीय मिशन पूरे किए, 6,000+ नागरिकों और 300 अर्धसैनिक कर्मियों को सुरक्षित निकाला गया।
- ऑपरेशन सागर बंधु (नवंबर 2025 से जारी): श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बाद राहत कार्य, जिसमें भारतीय वायु सेना ने 21 टन सामग्री और NDRF टीम भेजी, तथा नौसेना ने कई जहाजों से 1,000+ टन राहत सामग्री पहुंचाई।
2026 से ही मानवीय सहायता की शुरुआत हो चुकी है
- उत्तर-पूर्व में पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF): असम के मोरन बाइपास पर 4.2 किमी लंबी हाईवे एयरस्ट्रिप (14 फरवरी 2026 को PM मोदी द्वारा उद्घाटित)। यह आपदा के समय भारी विमानों के लिए उपयोगी है, जिससे राहत सामग्री और बचाव टीमों को तेजी से पहुंचाया जा सकता है। उद्घाटन के दौरान वायु सेना ने फाइटर जेट्स (राफेल, सुखोई), ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर्स का प्रदर्शन किया, जिसमें HADR सिमुलेशन शामिल था।
- वायुशक्ति-2026 अभ्यास (27 फरवरी 2026, पोखरण): भारतीय वायु सेना आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेगी, जिसमें त्वरित हवाई सहायता, बचाव और निकासी शामिल है।
- अन्य: संयुक्त अभ्यास जैसे ऑस्ट्राहिंद-2025 में आपदा राहत पर फोकस, तथा टाइगर ट्रायम्फ जैसे अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में HADR पर जोर।

भारत की मानवीय सहायता एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रति प्रतिबद्धता क्षेत्रीय स्थिरता को सुदृढ़ करने तथा वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाने की उसकी व्यापक रणनीतिक दृष्टि का अभिन्न अंग है। ऐसे मिशन सशस्त्र बलों की राष्ट्र सर्वोपरि भावना को प्रतिबिंबित करते हैं, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को लचीलापन, समन्वय और मानवीय सेवा के अवसरों में परिवर्तित करती है। मानवीय सहायता प्रयास भारत की पड़ोसी प्रथम नीति तथा वसुधैव कुटुंबकम विश्व एक परिवार है के शाश्वत भारतीय आदर्श के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करते हैं। संकट की घड़ी में भारतीय सशस्त्र बल मित्र देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं, जो क्षेत्र में प्रथम सहायता प्रदाता के रूप में भारत की विश्वसनीय और उत्तरदायी भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।









