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भारत मे बीटिंग रिट्रीट का आयोजन

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भारत में बीटिंग रिट्रीट समारोह, गणतंत्र दिवस के उत्सवों का औपचारिक समापन करने के लिए आयोजित किया जाता है। यह सैन्य परंपरा सूर्यास्त के समय सैनिकों को युद्धभूमि से वापस बुलाने की प्राचीन प्रथा पर आधारित है।

इसका ऐतिहासिक महत्व ये है कि यह परंपरा 16वीं शताब्दी के इंग्लैंड से शुरू हुई, जहां ड्रम बजाकर सैनिकों को शिविरों में लौटने का संकेत दिया जाता था। भारत में इसका आगमन ब्रिटिश काल मे हुआ था और स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में औपचारिक रूप से अपनाया गया, बीटिंग रिट्रीट समारोह की ऐतिहासिक जड़ें 17वीं शताब्दी के इंग्लैंड से जुड़ी हुई हैं। वहां मूल रूप से “वॉच सेटिंग” नामक प्रथा थी, जहां सूर्यास्त पर ड्रम और बिगुल बजाकर सैनिकों को युद्धभूमि से शिविरों में वापस बुलाया जाता था।1690 में इंग्लैंड के राजा जेम्स द्वितीय ने सेनाओं को ड्रम बजाकर ट्रूप्स वापस बुलाने का आदेश देते थे। तभी से यह परंपरा ब्रिटेन से कनाडा, अमेरिका जैसे देशों में फैली, जहां शाम की बंदूक फायरिंग के बाद सैनिक पीछे हटते थे।

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भारत में 1950 के दशक में बीटिंग रिट्रीट समारोह शुरू हुआ, जब मेजर जी.ए. रॉबर्ट्स (ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट) ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के स्वागत के लिए जवाहरलाल नेहरू के निर्देश पर इसे आयोजित किया थी। आपको बता दें कि पहला औपचारिक समारोह 1952 में रिगल मैदान और लाल किले पर हुआ था। उसके बाद हर साल 29 जनवरी को दिल्ली के विजय चौक पर शाम को होता है, जहां थल, जल और वायु सेना के बैंड मार्चिंग धुनें बजाते हैं। राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शरीक होते हैं, और समारोह राष्ट्रगान के साथ समाप्त होता है।

राष्ट्रपति के आगमन पर उन्हे नेशनल सैल्यूट दिया जाता है। फिर तीनों सेनाओं के बैंड सामूहिक वादन करते हैं, जिसमें ड्रमर्स कॉल और लोकप्रिय मार्चिंग ट्यून्स शामिल होती हैं सूर्यास्त पर रिट्रीट बिगुल बजता है, राष्ट्रीय ध्वज उतारा जाता है। बैंड मास्टर राष्ट्रपति से बैंड वापसी की अनुमति मांगते हैं, फिर ‘सारे जहां से अच्छा’ बजाते हुए लौटते हैं। और कार्यक्रम की समाप्ति राष्ट्रगान के साथ होती है।

विजय चौक पर शाम 6:15 बजे शुरू होने वाला यह 50 मिनट का यह समारोह सैन्य अनुशासन, एकता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, जो गणतंत्र दिवस की परेडों के बाद शांति और समापन का संदेश देता है। केवल दो बार (2001 भूकंप और 2009 में राष्ट्रपति वेंकटरमण के निधन पर) इसे रद्द किया गया था।
Ib News
Author: Ib News

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