भारत सरकार ने ग्रामीण विकास और रोजगार के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 11 मई 2026 को विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा। इसके लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 यानी मनरेगा को उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा।
यह बदलाव केवल एक नई योजना नहीं, बल्कि विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप ग्रामीण भारत के समग्र, आधुनिक और उत्पादक विकास की दिशा में बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि नया अधिनियम ग्रामीण रोजगार, आय वृद्धि, गांवों में आधारभूत ढांचे के विकास और आत्मनिर्भरता को नई गति देगा।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक होंगे, उन्हें हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। यह अवधि वर्तमान मनरेगा की तुलना में अधिक है और इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करना है। अधिनियम के अनुसार यदि निर्धारित समयसीमा में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के पात्र होंगे।
सरकार ने मजदूरी भुगतान व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है। मजदूरी का भुगतान पहले की तरह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा।मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो श्रमिकों को विलंब क्षतिपूर्ति यानी मुआवजा भी दिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के इतिहास में बजट अनुमान स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा आवंटन बताया जा रहा है। राज्यों के हिस्से को जोड़ने पर इस कार्यक्रम का कुल संभावित व्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत जारी सभी कार्य बिना किसी बाधा के चलते रहेंगे। इसके बाद इन परियोजनाओं को विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के तहत नई व्यवस्था में समाहित कर दिया जाएगा। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड नई ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड प्रणाली लागू होने तक मान्य रहेंगे। जिन लोगों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर इस अधिनियम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण नियमों का प्रारूप तैयार कर रहा है। इनमें शामिल हैं श्रम बजट आवंटन नियम, संक्रमणकालीन प्रावधान नियम, शिकायत निवारण नियम, मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ता भुगतान नियम और प्रशासनिक व्यय नियम तथा केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम। सरकार के अनुसार इन नियमों को जल्द सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम 2025 ग्रामीण रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, ग्राम पंचायतों के सशक्तिकरण और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा। इसे विकसित और समृद्ध ग्रामीण भारत की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
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1 thought on “नई दिल्ली:भारत–जी राम जी अधिनियम 2025 लागू , मनरेगा की जगह अब 125 दिन रोजगार गारंटी”
Achhi baat hai…