अरुण कुमार

नई दिल्ली: एनएचआरसी ने राज्यों के मानवाधिकार आयोगों के साथ किया बड़ा मंथन, डिजिटल समन्वय और त्वरित न्याय पर जोर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग National Human Rights Commission (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी), विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने की।

सम्मेलन में मानवाधिकार संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने, डिजिटल समन्वय बढ़ाने और शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस अवसर पर एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी, महासचिव भरत लाल, महानिदेशक अनुपमा नीलेकर चंद्र सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि भारत का मानवाधिकार ढांचा अद्वितीय है क्योंकि यहां राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग कई मामलों में समवर्ती क्षेत्राधिकार के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने कहा-“देश के मानवाधिकार प्रदर्शन का मूल्यांकन सभी आयोगों के सामूहिक कार्यों से होता है, इसलिए मामलों की पुनरावृत्ति रोकना और सूचना साझाकरण मजबूत करना बेहद जरूरी है।” उन्होंने एसएचआरसी से अपने कार्यों को पूरी तरह डिजिटल बनाने, एचआरसीनेट पोर्टल से जुड़ने और अधिकार क्षेत्र की स्पष्टता बनाए रखने का आग्रह किया।
महासचिव भरत लाल ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में आयोग को 4.28 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं इनमें प्रमुख शिकायतें थीं-पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन — 18%, माफियाओं द्वारा संगठित शोषण — 17.4%, पेंशन/वेतन भुगतान से जुड़े मामले — 6%, महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन — 5.8%, जेलों की स्थिति — 3.5%, श्रमिक अधिकार उल्लंघन — 2.2%, स्वास्थ्य संबंधी मामले — 2%, शैक्षणिक संस्थानों में उल्लंघन — 2%, बाल अधिकार उल्लंघन — 1.7% , एनएचआरसी ने शिकायत प्रबंधन के लिए एचआरसीनेट पोर्टल विकसित किया है। वर्तमान में 23 राज्य मानवाधिकार आयोग इस प्रणाली से जुड़े हैं। हालांकि आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, नागालैंड अब तक पोर्टल से नहीं जुड़े हैं। जबकि मध्य प्रदेश, राजस्थान जुड़ने के बावजूद शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया पूरी तरह शुरू नहीं कर पाए हैं।

सम्मेलन में निम्न प्रमुख मानवाधिकार मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ जिसमे विशेष प्रतिवेदकों ने हिरासत में मौत, पुलिस ज्यादती और जेल सुधारों को गंभीर चिंता बताया। मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों, नशामुक्ति केंद्रों और आश्रय गृहों की स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया। बचाए गए बाल श्रमिकों और बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास को मजबूत करने की सिफारिश की गई। ट्रांसजेंडर, दिव्यांग और मानसिक रोगियों के लिए बेहतर पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा हुई। जल प्रदूषण, पर्यावरणीय न्याय और जलवायु परिवर्तन को भी मानवाधिकार मुद्दा बताते हुए निगरानी तंत्र मजबूत करने की बात कही गई।
सम्मेलन में सुझाव दिए गए कि जेलों में भीड़ कम की जाए, कैदियों के लिए बेहतर सुविधाएं दी जाएं और अस्पतालों, आश्रय गृहों और वृद्धाश्रमों का नियमित निरीक्षण हो तथा दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, इसके साथ ही अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों, सफाईकर्मियों, खदान श्रमिकों और ट्रक चालकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने की सिफारिश की गई।

एनएचआरसी सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि मानवाधिकार मामलों के त्वरित समाधान के लिए एनएचआरसी और एसएचआरसी के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। वहीं सदस्य विजया भारती सयानी ने प्रभावित समुदायों तक आयोगों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।
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2 thoughts on “नई दिल्ली: एनएचआरसी ने राज्यों के मानवाधिकार आयोगों के साथ किया बड़ा मंथन, डिजिटल समन्वय और त्वरित न्याय पर जोर”
NHRC mei nyaya prakriya jaldi aur sathik hona chahiye. Justice should be rendered to all the victims, particularly the vulnerable one in any society or belonging to any gender both in State and National levels.
Nhrc meeting