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नई दिल्ली: भारतीय फिल्म उद्योग को नई उड़ान: केंद्र सरकार के दो बड़े फैसले, प्रसून जोशी की अध्यक्षता में बनेगा उच्चस्तरीय अध्ययन समूह,

भारतीय फिल्म उद्योग के लिए केंद्र सरकार के दो बड़े फैसले, प्रसून जोशी की अध्यक्षता में बनेगा अध्ययन समूह, राज्यों को भेजे गए मॉडल सिनेमा नियम

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भारत के फिल्म उद्योग को मिलेगा नया बूस्ट!

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नई दिल्ली: भारतीय फिल्म उद्योग को नई उड़ान: केंद्र सरकार के दो बड़े फैसले, प्रसून जोशी की अध्यक्षता में बनेगा उच्चस्तरीय अध्ययन समूह, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारतीय फिल्म उद्योग को अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में फिल्म निर्माण, वितरण और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई रणनीतिक निर्देश जारी किए गए।

इन फैसलों के तहत एक उच्चस्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध गीतकार और लेखक प्रसून जोशी करेंगे। साथ ही, देशभर में सिनेमा स्क्रीन और थिएटर अवसंरचना के विस्तार के लिए राज्यों को मॉडल राज्य सिनेमा नियम भेजे गए हैं।

भारत के फिल्म उद्योग को मिलेगा नया बूस्ट!
मंत्रालय द्वारा गठित इस अध्ययन समूह में फिल्म उद्योग के विशेषज्ञों और तकनीकी साझेदारों को शामिल किया गया है। समूह भारतीय सिनेमा के समक्ष मौजूद अवसरों और चुनौतियों का अध्ययन करेगा तथा क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए ठोस सुझाव प्रस्तुत करेगा। यह समूह अपनी रिपोर्ट तीन महीनों के भीतर मंत्रालय को सौंपेगा। 1. वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय फिल्मों की भूमिका-भारतीय फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावशाली बनाने के उपाय सुझाए जाएंगे। 2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वर्चुअल प्रोडक्शन-एआई, वर्चुअल प्रोडक्शन और उभरती तकनीकों का फिल्म उद्योग पर प्रभाव का विश्लेषण किया जाएगा तथा इनके बेहतर उपयोग की रणनीति तैयार होगी। 3. संस्थागत वित्त और नए निवेश मॉडल-फिल्म निर्माताओं को बैंकों, वित्तीय संस्थानों और वैकल्पिक फंडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए सुझाव दिए जाएंगे। 4. फिल्म निर्माण और वितरण में वित्तीय चुनौतियां-निर्माताओं को पूंजी जुटाने में आने वाली कठिनाइयों और उनके समाधान पर कार्य किया जाएगा। 5. राज्यों के साथ समन्वित नीति निर्माण-समूह विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन कर भारतीय सिनेमा के दीर्घकालिक विकास के लिए व्यापक नीति ढांचा तैयार करेगा। क्योंकि सिनेमा और थिएटर का नियमन राज्य सूची का विषय है, विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम और अनुमतियां लागू होती हैं। इससे विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नए सिनेमाघरों के निर्माण में बाधाएं उत्पन्न होती रही हैं।

इसी समस्या के समाधान के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने व्यापक परामर्श के बाद मॉडल राज्य सिनेमा नियम तैयार किए हैं।इन नियमों का उद्देश्य-सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली को बढ़ावा देना, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मल्टीप्लेक्स और मिनी थिएटर विकसित करना, अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना और निवेश आकर्षित करना व आधुनिक तकनीकों के अनुरूप अवसंरचना तैयार करना है। मंत्रालय ने सभी राज्यों से इन नियमों को अपनाने का आग्रह किया है और इनके क्रियान्वयन में सहयोग देने का आश्वासन भी दिया है।

भारतीय फिल्म उद्योग के लिए इन पहलों से देश में फिल्म उद्योग के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है जैसे कि सिनेमा स्क्रीन की संख्या में वृद्धि, छोटे शहरों में मनोरंजन अवसंरचना का विस्तार, एआई और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसी तकनीकों का उपयोग, फिल्म निर्माताओं को संस्थागत वित्त तक पहुंच और वैश्विक बाजार में भारतीय फिल्मों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि व रोजगार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
बैठक में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय फिल्म उद्योग को नई तकनीकों, वित्तीय संसाधनों और आधुनिक नीतिगत ढांचे से जोड़ते हुए विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाए। सरकार का उद्देश्य भारतीय सिनेमा को केवल मनोरंजन उद्योग तक सीमित न रखकर उसे संस्कृति, रचनात्मकता और आर्थिक विकास का वैश्विक माध्यम बनाना है।
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Author: Ib News

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