केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मटियाला में कार्यक्रम का किया उद्घाटन,
‘नमस्ते’ योजना के तहत कचरा बीनने वाले श्रमिकों की औपचारिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
बीरेंद्र दाश
नई दिल्ली
कचरा बीनने वाले श्रमिकों को मिला ‘नमस्ते’ कार्ड, 300 से ज्यादा सफाईकर्मियों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित, राजधानी दिल्ली में कचरा बीनने वाले श्रमिकों को औपचारिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने मटियाला स्थित एमसीडी सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में एमसीडी के नजफगढ़ जोन के कचरा बीनने वाले श्रमिकों को ‘नमस्ते’ कार्ड जारी करने के कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इस कार्यक्रम में नजफगढ़ जोन के 300 से अधिक कचरा बीनने वाले श्रमिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों को ‘नमस्ते’ कार्ड के साथ आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए, जिससे उन्हें स्वास्थ्य सेवा कवरेज और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच का लाभ मिल सके।
क्या है ‘नमस्ते’ योजना?
राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्ययोजना (NAMASTE) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इस योजना का उद्देश्य देश में स्वच्छता कार्य से जुड़े श्रमिकों की सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। योजना के दायरे में सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों के साथ-साथ कचरा बीनने वाले श्रमिकों को भी शामिल किया गया है।

कचरा बीनने वालों को औपचारिक पहचान
‘नमस्ते’ कार्ड जारी होने से कचरा बीनने वाले श्रमिकों को औपचारिक रूप से पहचान देने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। कचरा बीनने वाले श्रमिक शहरों में कचरे के संग्रह, छंटाई और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक उनका काम अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़ा रहा है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ‘नमस्ते’ योजना के माध्यम से ऐसे श्रमिकों की पहचान, सुरक्षा और कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मटियाला में आयोजित कार्यक्रम में नजफगढ़ जोन के 300 से अधिक कचरा बीनने वाले श्रमिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें ‘नमस्ते’ कार्ड उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा कई उपस्थित श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए। इससे स्वच्छता कार्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्यबल को स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।
आयुष्मान कार्ड से स्वास्थ्य कवरेज पर जोर
‘नमस्ते’ कार्ड के साथ आयुष्मान कार्ड का वितरण इस पहल के स्वास्थ्य सुरक्षा वाले पहलू को भी मजबूत करता है। स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े काम में लगे श्रमिकों को कई तरह के व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना कल्याणकारी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सरकार की कोशिश है कि स्वच्छता कर्मियों को केवल उनकी पहचान ही नहीं मिले, बल्कि वे स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभों तक भी पहुंच बना सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने शहरों को स्वच्छ रखने में कचरा बीनने वाले श्रमिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन श्रमिकों का कार्य शहरों की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। मंत्री ने श्रमिकों को उनकी कार्य परिस्थितियों में सुधार और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन भी दिया।
‘नमस्ते’ योजना के प्रमुख उद्देश्य
‘नमस्ते’ योजना का व्यापक उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। योजना के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:
- स्वच्छता कर्मियों की औपचारिक पहचान
- व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य
- स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना
- कौशल विकास
- स्वच्छता कार्यों का मशीनीकरण
- जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई को समाप्त करना
- स्वच्छता कर्मियों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार
‘नमस्ते’ योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य देशभर में जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई की कार्य प्रणालियों को समाप्त करना है। इसके लिए स्वच्छता कार्यों में मशीनों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रमिकों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में सीधे काम करने से बचाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कचरा बीनने वाले श्रमिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पहचान?
कचरा बीनने वाले श्रमिक शहरी कचरा प्रबंधन और रिसाइक्लिंग व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बड़ी मात्रा में पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को कचरे की धारा से अलग करने में योगदान देते हैं। लेकिन अनौपचारिक काम के कारण कई श्रमिक सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से बाहर रह जाते हैं। औपचारिक पहचान मिलने से उनके लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
स्वच्छता कर्मियों की गरिमा और सुरक्षा पर फोकस
‘नमस्ते’ योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित काम, सम्मानजनक पहचान और बेहतर सामाजिक-आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है। मटियाला में आयोजित कार्यक्रम इसी दिशा में एक स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया, जिसमें नजफगढ़ जोन के 300 से अधिक कचरा बीनने वाले श्रमिकों को शामिल किया गया।
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