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नई दिल्ली: भारत में तकनीकी नवाचार को मिलेगी नई रफ्तार: प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने लॉन्च किया ‘टीआरएल कम्पास’ प्लेटफॉर्म,

New Delhi: Technological innovation in India will gain new momentum: Office of the Principal Scientific Adviser launches 'TRL Compass' platform,

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TRL Compass से अनुसंधान परियोजनाओं का होगा मानकीकृत मूल्यांकन, विकसित भारत 2047 के विज़न को मिलेगी मजबूती

बीरेन्द्र दाश

नई दिल्ली:भारत में तकनीकी नवाचार को मिलेगी नई रफ्तार: प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने लॉन्च किया ‘टीआरएल कम्पास’ प्लेटफॉर्म, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) ने भारतीय डेटा सुरक्षा परिषद (डीएससीआई) के सहयोग से देश के अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘टीआरएल कम्पास’ (Technology Readiness Level Compass) प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया है। इस पहल की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने की।

यह प्लेटफॉर्म विश्व स्तर पर स्वीकृत नौ-स्तरीय टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) प्रणाली को भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढालता है और सार्वजनिक वित्त पोषण वाली अनुसंधान परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए एक समान राष्ट्रीय मानक उपलब्ध कराता है।

र्यक्रम में ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी, एएनआरएफ के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन, नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सीएसओ संगीता गुप्ता, डीएससीआई तथा सीएसआईआर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

टीआरएल कम्पास एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो किसी तकनीक के विचार से लेकर उसके व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचने की तैयारी का वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक आकलन करता है। यह मूल्यांकन निम्न पहलुओं पर आधारित होगा-तकनीकी परिपक्वता, विनिर्माण क्षमता, गुणवत्ता मानक और कार्यक्रम प्रबंधन व व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं। इससे परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल विशेषज्ञों की व्यक्तिगत राय पर आधारित न होकर प्रमाणित और दस्तावेजी प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकेगा।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल शोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे बाजार में उपयोगी और व्यावसायिक तकनीकों में बदलना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा “भारत की वैज्ञानिक क्षमता का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि हम अनुसंधान को कितनी तेजी और प्रभावशीलता से व्यावहारिक तकनीकों में परिवर्तित कर पाते हैं।” उन्होंने देश के सभी संस्थानों से टीआरएल कम्पास को तकनीकी वित्तपोषण, समीक्षा और विकास के लिए मानक ढांचे के रूप में अपनाने का आग्रह किया।
टीआरएल कम्पास, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करेगा। इसमें दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए विशेष परिशिष्ट भी शामिल किए गए हैं पहला स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स और दुसरा सॉफ्टवेयर एवं डिजिटल टेक्नोलॉजी, इससे विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार अधिक सटीक मूल्यांकन संभव होगा।
ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने कहा कि भारतीय नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने में सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी परिपक्वता के आकलन की एकरूप प्रणाली का अभाव रहा है। उन्होंने कहा कि टीआरएल कम्पास—शिक्षा जगत, उद्योग, और निवेशकों व और सरकारी एजेंसियों को एक साझा मंच पर लाएगा और तकनीकी हस्तांतरण को अधिक सरल बनाएगा।
इस अवसर पर डीएससीआई के सीईओ विनायक गोडसे और ओपीएसए की सलाहकार एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. प्रीति बंजल ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, क्षमता मानचित्रण, टेक्नोलॉजी रडार विकास और प्रशिक्षित टीआरएल मूल्यांकनकर्ताओं का निर्माण तथा राष्ट्रीय स्तर पर टीआरएल कम्पास को बढ़ावा देने के क्षेत्रों में सहयोग करेगी।
टीआरएल कम्पास के अंतर्गत मूल्यांकन प्रश्नावली, दिशानिर्देश और सहायक दस्तावेज अब देशभर के शोधकर्ताओं, परियोजना अन्वेषकों, समीक्षकों और वित्तपोषण एजेंसियों के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। यह पहल भारत को वैश्विक गहन प्रौद्योगिकी (Deep Tech) नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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Author: Ib News

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