नई दिल्ली/लेह: शांति, ज्ञान और करुणा का पर्व — बुद्ध पूर्णिमा जानिए भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी खास बातें, आज देशभर में बुद्ध पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है।इस अवसर पर बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर सहित देश के प्रमुख बौद्ध स्थलों पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। श्रद्धालु ध्यान, दान और सेवा के माध्यम से भगवान बुद्ध के संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, शांति और सह-अस्तित्व का संदेश देने वाला दिवस है।

भारत समेत दुनिया भर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला बुद्ध पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष भी आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का संदेश लेकर आया है। यह दिनभगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण—तीनों का प्रतीक माना जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा (जिसे वैश्विक स्तर पर Vesak भी कहा जाता है) वैसाख महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह बौद्ध धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, भारत, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार समेत कई देशों में मनाया जाता है, यह पर्व तीन ऐतिहासिक घटनाओं की याद दिलाता है जिसमे भगवान बुद्ध का जन्म, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण, इसलिए इसे जीवन, ज्ञान और मुक्ति का दिन कहा जाता हैl

भगवान गौतम बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व लुंबिनी (आज का नेपाल) में हुआ था। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था, राजकुमार होते हुए भी उन्होंने संसार के दुखों को समझा और 29 वर्ष की आयु में त्याग कर तपस्या शुरू की उसके बाद बोधगया में उन्हे बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था उन्होंने मध्यम मार्ग और अहिंसा का संदेश दिया जिसके बाद उनकी शिक्षाएं आज भी दुनिया को शांति और संतुलन का रास्ता दिखाती हैं।

बुद्ध पूर्णिमा पर श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर विशेष पूजा करते हैं महाबोधि टेम्पल, सारनाथ,कुशीनगर, और लुम्बिनि । यह पर्व दीप जलाकर और बुद्ध प्रतिमा की पूजा कर, ध्यान और प्रार्थना और गरीबों को दान और भोजन कराकर तथा बुद्ध के उपदेशों का पाठ व बोधि वृक्ष की पूजा की जाती है। यह दिन अहिंसा, करुणा और सेवा का संदेश देता है

भगवान गौतम बुद्ध के प्रमुख संदेश: “क्रोध को प्रेम से जीतो”, “मन ही सब कुछ है, जैसा सोचोगे वैसे बनोगे”, “अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है”

वहीं बुद्ध पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर देशभर में श्रद्धा, शांति और करुणा का संदेश गूंज रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भगवान बुद्ध के आदर्शों—अहिंसा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि:
भगवान बुद्ध के विचार आज भी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाते हैं
उनका जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है उन्होंने सभी देशवासियों के जीवन में शांति और समृद्धि की कामना की।

वहीं, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष (Sacred Relics) को लद्दाख के लोगों के दर्शन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे उन्होंने “लद्दाख के लिए ऐतिहासिक क्षण” बताया। अमित शाह ने कहा कि: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर Ladakh में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन, यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इन अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे, इससे लद्दाख में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ेगा।










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