मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत को बड़ी जिम्मेदारी, FATF के शीर्ष नेतृत्व में पहली बार भारतीय अधिकारी
बीरेन्द्र दाश
नई दिल्ली: FATF में भारत का ऐतिहासिक परचम: विवेक अग्रवाल बने FATF के पहले भारतीय वाइस-प्रेसिडेंट, भारत ने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1994 बैच के अधिकारी और वर्तमान में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में सचिव विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का वाइस-प्रेसिडेंट (Vice President) चुना गया है।
यह पहली बार है जब भारत को FATF के शीर्ष नेतृत्व में प्रतिनिधित्व मिला है। इस नियुक्ति को मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण (Terror Financing) और वैश्विक वित्तीय अपराधों के खिलाफ भारत की बढ़ती विश्वसनीयता और नेतृत्व क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।

FATF दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण अंतर-सरकारी संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण और विनाशकारी हथियारों के प्रसार के लिए फंडिंग रोकने के वैश्विक मानक निर्धारित करती है। FATF की प्लेनरी बैठक द्वारा अपने सदस्य देशों में से वाइस-प्रेसिडेंट का चयन किया जाता है। वाइस-प्रेसिडेंट संगठन के अध्यक्ष (President) के साथ मिलकर वैश्विक नीतियों और रणनीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत का इस पद तक पहुंचना देश के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और वित्तीय अपराधों से लड़ने की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार FATF में भारत की यह सफलता कई कारणों से महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया FATF Mutual Evaluation में भारत का शानदार प्रदर्शन।मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी मजबूत कानूनी और नियामकीय ढांचा।डिजिटल भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता।वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VASP) और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों पर सक्रिय भूमिका और आतंकवादी वित्तपोषण पर कठोर कार्रवाई तथा वैश्विक वित्तीय सुरक्षा एजेंडे में भारत का बढ़ता योगदान। भारत FATF के 200 से अधिक देशों और न्यायिक क्षेत्रों वाले वैश्विक नेटवर्क में एक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक अग्रवाल ने कहा कि “यह नियुक्ति भारत की सामूहिक प्रतिबद्धता और मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के लिए विकसित मजबूत संस्थागत ढांचे की वैश्विक मान्यता है। मुझे यह जिम्मेदारी सौंपा जाना सम्मान की बात है। मैं FATF वैश्विक नेटवर्क के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित, समावेशी और मजबूत बनाने के लिए कार्य करूंगा।”
भारत सरकार के राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि FATF में भारत की बढ़ती भूमिका वैश्विक वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Financial Action Task Force (FATF) की स्थापना 1989 में हुई थी और इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित है।FATF के प्रमुख कार्य- मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के वैश्विक मानक बनाना, आतंकवादी वित्तपोषण पर निगरानी करना, देशों की वित्तीय प्रणाली का मूल्यांकन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना तथा ब्लैक लिस्ट और ग्रे लिस्ट के माध्यम से निगरानी करना है,आज FATF की सिफारिशों को दुनिया भर में वित्तीय सुरक्षा का मानक माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FATF में भारत के वाइस-प्रेसिडेंट बनने से भारत की वैश्विक वित्तीय विश्वसनीयता मजबूत होगी।आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ेगा। डिजिटल और फिनटेक क्षेत्र में भारत की नेतृत्व भूमिका मजबूत होगी और वैश्विक वित्तीय नीतियों के निर्माण में भारत की भागीदारी बढ़ेगी व सीमा पार आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण में सहायता मिलेगी।
FATF के शीर्ष नेतृत्व में भारत की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन तथा आतंकवाद विरोधी प्रयासों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
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