Search
Close this search box.

नई दिल्ली/गोरखपुर: गोरखपुर का कचरे का पहाड़ बना ‘राप्ती ईको पार्क’, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 एकड़ डंपसाइट का हुआ वैज्ञानिक निस्तारण,

New Delhi/Gorakhpur: Gorakhpur's garbage mountain has become 'Rapti Eco Park', 40 acres of dumpsite has been scientifically disposed of under the Swachh Bharat Mission.

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

40 एकड़ का डंपसाइट वैज्ञानिक तरीके से समाप्त।

बायोमाइनिंग तकनीक से हुआ कचरे का निस्तारण।

प्रतिदिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग। लाखों टन कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन।

मोहित कुमार

नई दिल्ली/गोरखपुर: गोरखपुर का कचरे का पहाड़ बना ‘राप्ती ईको पार्क’, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 एकड़ डंपसाइट का हुआ वैज्ञानिक निस्तारण, स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) के अंतर्गत देशभर में लेगेसी वेस्ट (Legacy Waste) डंपसाइट्स के वैज्ञानिक निस्तारण का अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए वर्षों पुराने कचरे के विशाल पहाड़ को वैज्ञानिक तरीके से समाप्त कर उसे “कचरे से कंचन राप्ती ईको पार्क” के रूप में विकसित कर दिया है। यह परियोजना केवल भूमि पुनरुद्धार (Land Reclamation) नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, संसाधनों के पुनः उपयोग और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

करीब 40 एकड़ क्षेत्र में फैला यह डंपसाइट लगभग सात वर्षों तक गोरखपुर शहर के कचरे के निस्तारण का प्रमुख केंद्र रहा। इस दौरान यहां लाखों टन कचरा जमा हो गया, जिसने समय के साथ एक विशाल कचरे के पहाड़ का रूप ले लिया। इस डंपसाइट से आसपास के लोगों को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था इसकी वजह से असहनीय दुर्गंध, धुएं का लगातार उत्सर्जन, लीचेट (Leachate) का रिसाव, मच्छरों की बढ़ती संख्या, स्वास्थ्य संबंधी खतरे, भूजल एवं मिट्टी प्रदूषण और वायु गुणवत्ता में गिरावट तथा सड़क दुर्घटनाओं का खतरा और तेज हवा चलने पर कचरा आसपास के घरों तक पहुंच जाता था, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया था।
इस चुनौतीपूर्ण समस्या के समाधान के लिए गोरखपुर नगर निगम ने बायोमाइनिंग (Bio-Mining) तकनीक अपनाई। परियोजना में 8 ट्रॉमल मशीनें, जेसीबी मशीनों का उपयोग और लगभग 25 प्रशिक्षित कर्मी तथा प्रतिदिन लगभग 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग, कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया जैसेकि RDF (Refuse Derived Fuel), ब्लैक सॉइल और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री व इनर्ट सामग्री, परियोजना में “Waste to Wealth” की अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू किया गया। प्राप्त सामग्री का उपयोग ब्लैक सॉइल का उपयोग निम्न भूमि भराई में, RDF को अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग में ईंधन के रूप में भेजा गया और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का पुनः उपयोग व लैंडफिल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई हा।
डंपसाइट हटने के बाद कई सकारात्मक बदलाव सामने आए जैसेकि मीथेन गैस उत्सर्जन में कमी, भूजल प्रदूषण में कमी, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, वायु गुणवत्ता बेहतर हुई, हरित क्षेत्र का विकास और जैव विविधता में वृद्धि तथा मधुमक्खियों एवं तितलियों की संख्या बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना क्लाइमेट चेंज नियंत्रण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
डंपसाइट हटने के बाद पूरी 40 एकड़ भूमि को जनहित में विकसित करते हुए “कचरे से कंचन राप्ती ईको पार्क” बनाया गया। इस पार्क की सबसे खास बात यह है कि यहां मौजूद कई कलात्मक संरचनाएं नगर निगम के अपशिष्ट पदार्थों से तैयार की गई हैं, जो “Waste is Resource” का संदेश देती हैं।
पार्क में नागरिकों के लिए अनेक आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं जिसमे विशाल ग्रीन लॉन, वॉकिंग ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक, किड्स ज़ोन, ओपन जिम, योग एवं मेडिटेशन क्षेत्र, सेल्फी प्वाइंट, थीम आधारित उद्यान, सोलर लाइटिंग, जल संरक्षण संरचनाएं, आधुनिक बैठने की व्यवस्था और फूड कोर्ट, कियोस्क, पार्किंग व सार्वजनिक सुविधाएं दी गई हैं।
पार्क में संचालित रेस्टोरेंट “शक्ति की रसोई” नामक महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित किया जा रहा है। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे नए अवसर प्राप्त हुए हैं। राप्ती ईको पार्क बनने के बाद प्रतिदिन लगभग 500 लोग सुबह और शाम यहां सैर, योग, व्यायाम, मनोरंजन और परिवार के साथ समय बिताने के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां पहले बदबू और बीमारी थी, वहीं आज स्वच्छ वातावरण और हरियाली है।
इस परियोजना से स्थानीय व्यापार बढ़ा, सड़क संपर्क बेहतर हुआ, पर्यटन को बढ़ावा मिला और नए रोजगार के अवसर बने तथा आसपास की संपत्तियों का मूल्य भी बढ़ा है। गोरखपुर का यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यह परियोजना दिखाती है कि यदि वैज्ञानिक तकनीक, नगर निकायों की इच्छाशक्ति और जनभागीदारी साथ आए तो वर्षों पुराने कचरे के पहाड़ भी हरित सार्वजनिक स्थलों में बदले जा सकते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन Rapti Eco Park Gorakhpur Eco Park Legacy Waste Bio Mining Gorakhpur Dump Site Waste to Wealth Solid Waste Management Smart City Gorakhpur Swachh Bharat Mission Urban नगर निगम गोरखपुर राप्ती ईको पार्क कचरे से कंचन पर्यावरण संरक्षण बायोमाइनिंग तकनीक

#SwachhBharatMission, #RaptiEcoPark, #Gorakhpur, #LegacyWaste, #BioMining, #WasteToWealth, #CleanIndia, #UrbanDevelopment, #Environment, #Sustainability, #GreenIndia, #SmartCity, #SolidWasteManagement, #EcoPark, #IndiaDevelopment

Ib News
Author: Ib News

Leave a Comment

और पढ़ें