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BRICS 2026: चार देशों से 11 देशों तक कैसे पहुंचा ब्रिक्स? नई दिल्ली शिखर सम्मेलन पर दुनिया की नजर

BRICS 2026: How did BRICS grow from four nations to eleven? The world's eyes are on the New Delhi summit.

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नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

BRICS 2026: चार देशों से 11 देशों तक कैसे पहुंचा ब्रिक्स? नई दिल्ली शिखर सम्मेलन पर दुनिया की नजर, कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक आर्थिक संक्षिप्त नाम आज एक महत्वपूर्ण वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक मंच बन चुका है। BRICS अब एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक फैली उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को एक मंच पर लाने वाला समूह है।

भारत वर्ष 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भारत की इस वर्ष की BRICS प्राथमिकता का मूल विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” है। भारत का जोर BRICS को केवल चर्चा का मंच बनाए रखने के बजाय समावेशी, समाधान-केंद्रित और परिणामोन्मुख सहयोग के लिए प्रभावी मंच के रूप में मजबूत करने पर है।

आज BRICS में कितने देश हैं?

वर्तमान में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य देश हैं:

  • ब्राजील
  • रूस
  • भारत
  • चीन
  • दक्षिण अफ्रीका
  • मिस्र
  • इथियोपिया
  • ईरान
  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • इंडोनेशिया

इन 11 देशों की सामूहिक हिस्सेदारी दुनिया की लगभग 49.5% आबादी, करीब 40% वैश्विक GDP और लगभग 26% वैश्विक व्यापार में है। इस विस्तार ने BRICS की भौगोलिक पहुंच को भी काफी बढ़ाया है। अब इसमें एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका से जुड़े आर्थिक और रणनीतिक हित एक साथ दिखाई देते हैं।

BRIC से BRICS बनने की कहानी

BRICS की कहानी की शुरुआत BRIC से हुई। साल 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने “The World Needs Better Economic BRICs” नामक पेपर में Brazil, Russia, India और China के लिए BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था। इसका उद्देश्य उन चार बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर ध्यान आकर्षित करना था, जिनके आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना जताई गई थी। धीरे-धीरे यह अवधारणा आर्थिक विश्लेषण से आगे बढ़कर राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद का मंच बन गई।

2006 में औपचारिक सहयोग

2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने BRIC के रूप में राजनीतिक सहयोग का मंच बनाया। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ। वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में चारों देशों ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रभावी आवाज और प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया।

दक्षिण अफ्रीका के आने से बना BRICS

BRIC के विस्तार का पहला बड़ा चरण दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से आया। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद समूह का नाम BRICS हो गया और इसका भौगोलिक प्रतिनिधित्व तीन महाद्वीपों से आगे बढ़ गया। इसके बाद BRICS का एजेंडा भी लगातार विस्तृत हुआ। आर्थिक सहयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार और विकास जैसे विषय इसमें शामिल होते गए।

2024-25 में BRICS का सबसे बड़ा विस्तार

BRICS के विस्तार का सबसे महत्वपूर्ण चरण 2024 में आया। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य के रूप में BRICS में शामिल हुआ। इसके साथ BRICS ने एक Partner Country व्यवस्था भी विकसित की, जिससे पूर्ण सदस्यता के बिना भी कई देशों को BRICS के सहयोग और संवाद तंत्र से जोड़ने का रास्ता खुला। 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर कंट्री का दर्जा दिए जाने की जानकारी BRICS के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज है।

BRICS का उद्देश्य क्या है?

BRICS का मूल उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और विकासात्मक सहयोग को मजबूत करना है। समूह के प्रमुख एजेंडे में-

  • वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार
  • विकासशील देशों की आवाज मजबूत करना
  • व्यापार और निवेश बढ़ाना
  • वित्तीय सहयोग
  • जलवायु परिवर्तन से निपटना
  • खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा
  • विज्ञान एवं तकनीक में सहयोग
  • स्वास्थ्य सहयोग
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था
  • कौशल और रोजगार
  • कृषि एवं ग्रामीण विकास
  • आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
  • लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग। BRICS अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और संतुलन की मांग भी करता रहा है।
2008 का वित्तीय संकट बना महत्वपूर्ण मोड़

2008 का वैश्विक वित्तीय संकट BRICS के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इस संकट ने मौजूदा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की कमजोरियों को सामने रखा। BRIC देशों ने IMF और World Bank जैसे संस्थानों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद BRICS के भीतर आर्थिक और वित्तीय सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

न्यू डेवलपमेंट बैंक और वित्तीय सुरक्षा

BRICS सहयोग का एक बड़ा संस्थागत परिणाम New Development Bank (NDB) रहा। इसका उद्देश्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना है। BRICS ने वित्तीय अस्थिरता के समय सदस्य देशों को सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से Contingent Reserve Arrangement (CRA) जैसे तंत्र भी विकसित किए।

भारत की BRICS यात्रा

भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और शुरुआत से ही इसके विकास में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। भारत ने इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता की थी। अब 2026 में भारत चौथी बार समूह का नेतृत्व कर रहा है।

2012: नई दिल्ली से संस्थागत मजबूती

भारत ने 29 मार्च 2012 को नई दिल्ली में चौथे BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। उस समय वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए BRICS साझेदारी पर जोर दिया गया। विकास बैंक, स्थानीय मुद्रा में वित्तीय सहयोग और Contingent Reserve Arrangement जैसे महत्वपूर्ण विचारों को आगे बढ़ाने में इस अध्यक्षता की भूमिका रही।

2016: गोवा सम्मेलन

अक्टूबर 2016 में भारत ने गोवा में 8वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, व्यापार, नवाचार, ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिली। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ BRICS सहयोग को मजबूत करने और FATF मानकों के महत्व पर भी जोर दिया।

2021: डिजिटल और स्वास्थ्य सहयोग

भारत ने 9 सितंबर 2021 को 13वें BRICS शिखर सम्मेलन की वर्चुअल मेजबानी की। यह BRICS की 15वीं वर्षगांठ का वर्ष भी था। इस दौरान डिजिटल स्वास्थ्य, वैक्सीन अनुसंधान, आतंकवाद-रोधी सहयोग, रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्रों को आगे बढ़ाया गया।

BRICS 2026: भारत ने क्या बदला?

2026 में भारत की अध्यक्षता केवल शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं है। भारत ने वर्षभर 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकों और उच्च-स्तरीय सहभागिताओं के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया है। इनमें राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क प्रमुख स्तंभ रहे हैं।

कृषि में नई पहल

भारत की अध्यक्षता में BRICS Centres of Excellence on Agricultural Practices और Digital Agriculture BRICS Network जैसे सहयोग तंत्रों पर जोर दिया गया है। इनके जरिए प्राकृतिक और जैविक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, AI आधारित निर्णय प्रणाली, जियोस्पेशियल तकनीक, IoT और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य है।

स्वस्थ जीवनशैली पर BRICS मिशन

2026 में Healthy Lifestyles for BRICS Mission के तहत 2026-2029 का रोडमैप शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य मोटापा और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली और निवारक स्वास्थ्य उपायों को बढ़ावा देना है।

मानसिक स्वास्थ्य पर NIMHANS की भूमिका

मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में BRICS Training Hub Network और Centres of Excellence के जरिए क्षमता निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। भारत के NIMHANS को इस सहयोग के लिए समन्वय केंद्र के रूप में नामित किया गया है। लक्ष्य है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से शामिल किया जाए और प्रशिक्षित मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाई जाए।

Skill Development और BRICS Connect

भारत ने कौशल विकास के लिए BRICS Connect को भी आगे बढ़ाया है। इसमें क्षमता निर्माण, महिलाओं की workforce participation, कौशल एवं रोजगार-क्षमता तथा Digital Public Infrastructure जैसे विषय शामिल हैं।

स्मार्ट ग्रिड और Energy Storage

ऊर्जा क्षेत्र में Smart Grid और Energy Storage पर BRICS Guiding Principles और Digital Centre of Excellence जैसी पहलों को आगे बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तकनीकी ज्ञान, नीति अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना है।

Urban Mobility पर सहयोग

शहरी परिवहन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में BRICS Urban Mobility Hub तथा Urban Research and Knowledge Network जैसी पहलों पर काम किया गया है। इसमें climate-resilient urban infrastructure, शहरी नियोजन, निवेश और तकनीकी सहयोग को महत्व दिया गया है।

MSME और Startup Ecosystem

भारत की अध्यक्षता में BRICS MSME Cooperation Portal और BRICS Incubator Network जैसी पहलों को बढ़ावा मिला है। Startup क्षेत्र के लिए BRICS Startup Innovation Fund भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य शुरुआती और विकास चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता तथा नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

Global Value Chains पर फोकस

BRICS देशों ने Global Value Chain Action Plan 2026-2030 के जरिए बाजारों को खोलने, आर्थिक विविधीकरण और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत एवं लचीला बनाने पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है।

Customs और Trade Facilitation

सीमा शुल्क मामलों में सहयोग और परस्पर प्रशासनिक सहायता से जुड़ा BRICS समझौता व्यापार को आसान बनाने, लेन-देन की लागत घटाने और अवैध व्यापार पर लगाम लगाने में मदद कर सकता है। भारत की 2026 अध्यक्षता में व्यापार मंत्रियों की बैठक में भी BRICS Economic Partnership Strategy 2030, MSME finance और resilient global value chains जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई।

BRICS और Global South की आवाज

BRICS का विस्तार केवल सदस्य देशों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक व्यापक उद्देश्य Global South की आवाज को वैश्विक संस्थाओं में मजबूत करना भी है।

भारत की अध्यक्षता इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए विकास, तकनीक, वित्त, जलवायु और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा दे रही है। भारत का लक्ष्य BRICS को ऐसी व्यवस्था की दिशा में ले जाना है जिसमें अलग-अलग विकास मॉडल और राष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश साझा चुनौतियों पर सहयोग कर सकें।

12-13 सितंबर को नई दिल्ली में बड़ा शिखर सम्मेलन

अब BRICS की नजर 18वें BRICS Summit पर है, जिसकी मेजबानी भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान भी आगामी BRICS Summit के लिए उन्हें भारत आमंत्रित करने की बात कही थी। यह शिखर सम्मेलन भारत की वर्षभर चली अध्यक्षता का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। नई दिल्ली में होने वाली बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, जलवायु, तकनीक, सुरक्षा, विकास और Global South से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच उच्चस्तरीय चर्चा होने की उम्मीद है।

चार देशों के आर्थिक विचार से वैश्विक मंच तक

BRICS की करीब 25 वर्षों की यात्रा यह दिखाती है कि 2001 में एक आर्थिक अवधारणा के रूप में सामने आया BRIC, धीरे-धीरे राजनीतिक, आर्थिक, वित्तीय और विकासात्मक सहयोग के व्यापक मंच BRICS में बदल गया। आज 11 सदस्य देशों के साथ यह दुनिया की लगभग आधी आबादी और करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत की 2026 अध्यक्षता का सबसे बड़ा परीक्षण अब यही है कि इस विशाल और विविध समूह को सहमति, सहयोग और ठोस परिणामों की दिशा में कितना प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।12-13 सितंबर का नई दिल्ली शिखर सम्मेलन इसी बदलते BRICS और बदलती वैश्विक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।

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Ib News
Author: Ib News

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