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उपराष्ट्रपति ने तमिलिसाई सुंदरराजन की RSS पर लिखी पुस्तक का किया विमोचन

The Vice President released the book written by Tamilisai Soundararajan on the RSS.

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IB NEWS

नई दिल्ली

उपराष्ट्रपति ने तमिलिसाई सुंदरराजन की RSS पर लिखी पुस्तक का किया विमोचन, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन द्वारा लिखित पुस्तक “A Century of Service – The RSS in 100 Acts of Seva” का विमोचन किया। पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS की सौ वर्ष की सेवा-यात्रा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र-निर्माण में उसके योगदान को दर्ज किया गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “आज की खबर कल का इतिहास बन जाती है”, इसलिए अच्छे कार्यों और सामाजिक योगदान को दर्ज करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि महत्वपूर्ण कार्यों का दस्तावेजीकरण नहीं किया गया, तो वे समय के साथ लोगों की स्मृतियों से मिट सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तक यह दर्शाती है कि सेवा की भावना किस प्रकार निरंतर सामाजिक सेवा में बदलती है। उन्होंने “सेवा ही धर्म है, यह एक कर्तव्य है” को एक बुनियादी आदर्श बताते हुए कहा कि RSS की सेवा पहलों का उद्देश्य गरीबों, वंचितों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाना रहा है। उनके अनुसार, इन सेवा गतिविधियों में मजदूरों, महिलाओं और बच्चों सहित समाज के अलग-अलग वर्गों तक सहायता पहुंचाने का उल्लेख है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान RSS स्वयंसेवकों द्वारा भोजन, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की सहायता पहुंचाने की भूमिका को भी याद किया।
‘चरित्र-निर्माण के जरिए राष्ट्र-निर्माण’ पर जोर

पुस्तक में शामिल “चरित्र-निर्माण के जरिए राष्ट्र-निर्माण” के विचार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के निर्माण के लिए देशभक्ति, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के चरित्र, कर्तव्यबोध और समाज के प्रति जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है। पुस्तक में सेवा कार्यों के साथ-साथ इन मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को भी रेखांकित किया गया है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए दस्तावेज होगी पुस्तक

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक केवल RSS की सौ वर्ष की सेवा का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सेवा परंपरा, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को समझने वाला दस्तावेज भी होगी। उन्होंने डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन और पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में सामाजिक सेवा और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े कार्यों को दर्ज करने के लिए इस तरह के और प्रयास किए जाएंगे।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, पुडुचेरी के गृह मंत्री ए. नमासिवायम और पुस्तक की लेखिका और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह पुस्तक ऐसे समय में सामने आई है जब RSS अपने स्थापना वर्ष से जुड़े शताब्दी कालखंड को रेखांकित कर रहा है। पुस्तक का केंद्रीय विषय संगठन की सेवा गतिविधियों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े दृष्टिकोण का दस्तावेजीकरण है। हालांकि पुस्तक में प्रस्तुत विवरण RSS की सेवा-यात्रा और उसके दृष्टिकोण पर केंद्रित हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति के संबोधन का मुख्य जोर अच्छे कार्यों को दर्ज करने, सामाजिक योगदान को संरक्षित रखने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने पर रहा।

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Author: Ib News

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