सुनीता अरुण | विशेष लेख
कब है गणेश चतुर्थी 2026? क्यों सबसे पहले पूजे जाते हैं गणपति, जानें मोदक-दूर्वा और विसर्जन का महत्व, गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, समृद्धि और शुभारंभ का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति की पूजा करने की परंपरा है, इसलिए उन्हें ‘प्रथम पूज्य’ कहा जाता है।
2026 में कब मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी?
गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। 14 सितम्बर के दिन घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। भक्त विधि-विधान से पूजा, आरती और प्रसाद अर्पित करते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाता है।

क्यों सबसे पहले पूजे जाते हैं भगवान गणेश?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश तथा कार्तिकेय के बीच यह प्रतियोगिता हुई कि कौन सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके लौटता है।
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर संसार की परिक्रमा के लिए निकल गए, जबकि गणेश जी ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की तीन परिक्रमा की। उन्होंने कहा कि माता-पिता ही उनके लिए पूरा संसार हैं।
गणेश जी की बुद्धि और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। तभी से किसी भी शुभ कार्य, पूजा, विवाह, गृहप्रवेश या धार्मिक अनुष्ठान से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।
गणेश जी का स्वरूप क्या संदेश देता है?
भगवान गणेश का स्वरूप कई आध्यात्मिक और जीवनोपयोगी संदेश देता है—
- बड़ा सिर: व्यापक सोच और ज्ञान का प्रतीक।
- बड़े कान: अधिक सुनने और धैर्य रखने का संदेश।
- छोटी आंखें: एकाग्रता और लक्ष्य पर ध्यान।
- लंबी सूंड: परिस्थिति के अनुसार विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता।
- बड़ा पेट: सुख-दुख और जीवन की परिस्थितियों को सहन करने का प्रतीक।
- छोटा वाहन मूषक: इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण का संदेश।
मोदक का क्या महत्व है?
गणेश जी को मोदक अत्यंत प्रिय माना जाता है। मोदक को ज्ञान, आनंद और आध्यात्मिक उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। इसका बाहरी आवरण साधना और परिश्रम को दर्शाता है, जबकि अंदर की मिठास ज्ञान और आत्मिक सुख का संकेत देती है।
गणेश चतुर्थी पर भक्त भगवान को मोदक, लड्डू और अन्य मिठाइयों का भोग लगाते हैं। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में उकडीचे मोदक विशेष रूप से बनाए जाते हैं।
गणपति को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व है। आमतौर पर उन्हें 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दूर्वा शीतलता, पवित्रता और जीवनशक्ति का प्रतीक है।
पौराणिक कथा में अनलासुर नामक दैत्य का उल्लेख मिलता है, जिसे गणेश जी ने निगल लिया था। उसके कारण उत्पन्न गर्मी को शांत करने के लिए ऋषियों ने गणेश जी को दूर्वा अर्पित की थी। तभी से गणपति पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है।
गणेश पूजा में लाल फूल और सिंदूर का महत्व
गणेश जी को लाल रंग प्रिय माना जाता है। लाल फूल, लाल चंदन और सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है। लाल रंग ऊर्जा, शक्ति, उत्साह और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दौरान गणेश जी को सिंदूर चढ़ाकर भक्त सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं।
गणेश विसर्जन का आध्यात्मिक संदेश

गणेश चतुर्थी के बाद प्रतिमा का विसर्जन अनंत चतुर्दशी या स्थानीय परंपरा के अनुसार निर्धारित दिन किया जाता है। विसर्जन का अर्थ भगवान का समाप्त होना नहीं, बल्कि यह संदेश है कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है।
प्रतिमा मिट्टी से बनती है और अंततः जल में विलीन हो जाती है। यह प्रकृति के पंचतत्वों में लौटने तथा अहंकार, आसक्ति और भौतिक मोह को छोड़ने का प्रतीक माना जाता है।
विसर्जन के समय भक्त कहते हैं—
“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।”
यह जयघोष श्रद्धा, उत्साह और अगले वर्ष फिर गणपति के स्वागत की भावना को व्यक्त करता है।
पर्यावरण-अनुकूल गणेश उत्सव क्यों जरूरी है?
गणेश उत्सव श्रद्धा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस, रासायनिक रंगों और प्लास्टिक सजावट से जलस्रोतों को नुकसान हो सकता है। इसलिए मिट्टी से बनी प्राकृतिक प्रतिमाओं और पर्यावरण-अनुकूल रंगों का इस्तेमाल करना बेहतर है।
भक्तों को चाहिए कि—
- प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें।
- रासायनिक रंगों और प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करें।
- कृत्रिम या घरेलू विसर्जन कुंड का उपयोग करें।
- पूजा सामग्री को जलस्रोतों में न डालें।
- उत्सव के दौरान स्वच्छता और ध्वनि प्रदूषण का ध्यान रखें।
गणेश चतुर्थी का मुख्य संदेश
गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बुद्धि, विनम्रता, अनुशासन, प्रकृति और सामाजिक एकता का पर्व है। भगवान गणेश का आशीर्वाद हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य की शुरुआत ज्ञान, विवेक और सकारात्मक सोच के साथ करनी चाहिए।
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Bahut achha