दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 15 दिनों में दिल्ली से 807 लोग लापता

509 महिलाएं और लड़कियां (करीब 63%) 298 पुरुष191 नाबालिग (जिनमें 137 बच्चे, ज्यादातर लड़कियां)
पुलिस ने इनमें से 235 लोगों को किया ट्रेस,लेकिन 572 लोग अभी भी लापता
पुलिस का कहना है कि इसमें कोई “असामान्य उछाल” नहीं है, ये ट्रेंड पिछले सालों जैसा ही है।

सोशल मीडिया- प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया मे जिस प्रकार से खबरें वायरल हो रही हैे वो कहीं हमारी सामाजिक सुरक्षा की असफलता तो नही है,इसे देखकर तो यही लगता है क्योंकि ये खबरें अब डर पैदा करने वाली हैं। देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 शुरू होते ही जनवरी के पहले 15 दिनों के भीतर सैकड़ो लोगों के रहस्यमय तरीके से लापता होने के मामले सामने आए हैं।AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने इसे “डराने वाला” बताया है।
दिल्ली पुलिस ने इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में 807 लापता मामलों में कोई “असामान्य उछाल” (no significant surge) नहीं है। दिल्ली पुलिस खुद इन मामलों को “स्थिर ट्रेंड” बताती है और ज्यादातर केस बाद में सुलझ जाते हैं लेकिन जनता और मीडिया में चिंता ज्यादा है, खासकर महिलाओं/नाबालिगों और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का इस मामले पर कहना है कि सबसे आम कारण रिपोर्ट्स के अनुसार-

- घर से स्वेच्छा से भागना (Runaway cases): सबसे बड़ा कारण यही है। ज्यादातर लोग (खासकर किशोरियां और युवा) पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध (एलोपमेंट), पढ़ाई/रोजगार का दबाव, या घरेलू तनाव से घर छोड़कर चले जाते हैं। कई बार ये लोग बाद में खुद लौट आते हैं या मिल जाते हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में कोई अपराध नहीं होता, बल्कि व्यक्तिगत फैसला होता है।
- पारिवारिक/घरेलू विवाद: झगड़े, मारपीट, या मानसिक तनाव के कारण लोग घर छोड़ देते हैं। महिलाओं और किशोरियों में यह बहुत आम है।
- रोजगार/आर्थिक झांसा: बेहतर नौकरी, काम या पैसे के लालच में लोग बाहर जाते हैं और संपर्क टूट जाता है। कुछ मामलों में एजेंट या गिरोहों द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाया जाता है।
- मानव तस्करी (Human Trafficking): यह सबसे गंभीर और चिंताजनक कारण है, खासकर महिलाओं, लड़कियों और बच्चों के लिए। दिल्ली को ट्रैफिकिंग का हब माना जाता है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुछ केसों में संगठित गिरोह शामिल होते हैं, जहां लोगों को जबरन काम (घरेलू नौकरानी, यौन शोषण) या अंग तस्करी के लिए ले जाया जाता है। हालांकि पुलिस कहती है कि ऐसे संगठित बड़े केस कम हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे बढ़ती समस्या मानते हैं।
- अपहरण या अन्य अपराध: कुछ मामलों में अपहरण, जबरन शादी, या अन्य क्राइम शामिल होते हैं। नाबालिगों (खासकर 12-18 साल की लड़कियां) में यह जोखिम ज्यादा है।
- अन्य कारक:
- मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं (डिप्रेशन, आदि)।
- प्रवासन (माइग्रेशन): दिल्ली में आने वाले मजदूर/छात्र अक्सर संपर्क खो देते हैं।
- मौसमी/आर्थिक दबाव: साल के अंत/शुरुआत में वित्तीय तनाव से कुछ लोग गायब हो जाते हैं।
- बेघर होना या आवास की कमी।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो-:
- जनवरी 2026 में कुल ~1,777 केस (औसतन ~2,000 प्रति माह से कम)।
- महिलाएं/लड़कियां ~60-63% केसों में।
- नाबालिग ~191 (ज्यादातर लड़कियां)।
- पुलिस ने 2016 से अब तक ~1.8 लाख लोगों को ट्रेस किया है, रिकवरी रेट ~77%।
- पुलिस का स्टैंड: कोई “असामान्य उछाल” नहीं, पिछले सालों जैसा ही ट्रेंड। AI फेशियल रिकग्निशन और ऑपरेशन मिलाप जैसे प्रयासों से सुधार हो रहा है।

वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में भी ऐसे ही मामले सामने आए हैं जिन्होंने हालत की गंभीरता को और ज्यादा भयावह बना दिया है कि इस मुद्दे पर खुद इलाहाबाद हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा है, सबसे डराने वाली बात यहां यह है कि कई लोग घर से रोज मर के काम के लिए निकले और फिर कभी लौटकर वापस ही नहीं आये। इसी बीच जौनपुर जिले से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सुरेरी थाना क्षेत्र के कमरुद्दीनपुर गांव की तीन बच्चियों दो सगी और एक चचेरी बहन सिर्फ आधार कार्ड की फोटो कॉपी कराने पास के बाजार में जाने की बात कह कर दोपहर में घर से निकली थी लेकिन रात हुई और तीनों वापस नहीं आई, रिश्तेदारों को फोन किया आसपास के बाजारों में खोज जान पहचान वालों से भी पूछा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला, धीरे-धीरे घर में गांव में खबर फैलते ही लोग दहशत में आ गए लापता लड़कियों में 19 वर्षीय शिल्पी चौहान 18 वर्ष से शिवांगी चौहान और 11 वर्षीय बच्ची शामिल है इतनी छोटी बच्ची का भी गायब हो जाना लोगों को अंदर तक खिला देने वाला है लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। ये मामला सिर्फ एक गांव या एक जिले तक सीमित नहीं है पूरे राज्य में हालात चिंता जनक है अदालत में रखे गए सरकारी हलफनामे की माने तो 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच 1लाख 8हजार 300 से ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश में लापता हुए हैं। जबकि इन लाखों मामलों से पुलिस ने केवल 9700 मामलों में ही कार्रवाई शुरू की है बाकी शिकायत फाईलो मे सिमट कर रह गई हैं। यानी हजारों परिवार अपने लापता बच्चों, बेटियों,भाइयों,पतियों का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन चुप बैठा है। इन्ही सबको देखते हुये हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कुछ संज्ञान लिया। जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि आंकड़े चौंकाने वाले हैं अदालत ने साफ कहा कि लापता लोगों के मामले में तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है लेकिन अधिकारियों का रवैया बेहद लापरवाह नजर आता है कोर्ट ने इसे जनहित का गंभीर मामला बताते हुए इन रि मिसिंग पर्सन इन द स्टेट शीर्षक से पीआईएल दर्ज करने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

आपको बता दें कि ये तब हुआ है जब एक पिता जिनका बेटा जुलाई 2024 से लापता था वह अदालत पहुंचे और पुलिस की निष्क्रियता की शिकायत की। अब अगर कोई ये सोचता है कि यह समस्या छोटे शहरों तक सीमित है तो राजधानी के आंकड़े डराने के लिए काफी है क्योकि दिल्ली में सिर्फ 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच 807 लोग लापता हुए हैं जिनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां थी मतलब हर दिन दर्जनों लोग अचानक गायब हो रहे हैं। समाज सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा है मानो जैसे कुछ हुआ ही न हो । ऐसी घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मानव तस्करी गिरोह सक्रिय बच्चों और युवतियों को निशाना बना रहा है. क्या स्थानीय स्तर पर संगठित अपराध बढ़ रहा है या फिर पुलिस तंत्र की सस्ती अपराधियों को हौसले दे रही है जब कोई व्यक्ति घर से निकले और वापस न लौटे और उसका कोई रिकॉर्ड कोई सुराग न मिले तो यह सिर्फ परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा की असफलता है, डर सिर्फ आंकड़ों का नहीं यहां सन्नाटो का भी है। दरअसल सबसे बड़ी बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर लोग लापता हो रहे हैं फिर भी कोई राष्ट्रीय आपात जैसा माहौल नहीं दिखता है, ना ही सरकार, और न ही विपक्ष किसी तरह की कार्यवाही की मांग कर रहा है। जबकि ये मामले ज्यादातर सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक होते हैं, लेकिन ट्रैफिकिंग जैसे अपराधी कारणों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जरूरत है।










4 thoughts on “15 दिनों में दिल्ली से 807 लोग लापता, कहीं ये सामाजिक सुरक्षा की असफलता तो नही!”
Gumshuda news
Missing
Human trafficking
Good story pls be carefull