अरुण कुमार
नई दिल्ली:
चीनी के दाम ₹48 से ₹55.70 किलो पहुंचे, क्या इथेनॉल है जिम्मेदार? सरकार ने बताया असली कारण, देश में हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई 2026 को चीनी की कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने साफ किया है कि इसके लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।
सरकार के मुताबिक चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण हैं। इनमें अनुमान से कम चीनी उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, मौसम की मार, गन्ने की फसल में बीमारी, वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी और कुछ हिस्सों में सट्टेबाजी एवं जमाखोरी शामिल हैं।
इथेनॉल को चीनी की महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत: सरकार
चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ने पर सरकार ने आपत्ति जताई है।सरकार के अनुसार इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा भारत में उत्पादित इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से प्राप्त होता है। इसलिए सरकार का कहना है कि मौजूदा चीनी मूल्य वृद्धि को सीधे इथेनॉल नीति से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
अनुमान से कम हुआ चीनी का उत्पादन
मौजूदा चीनी सीजन में देश में करीब 306 लाख टन (LMT) चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। यह गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान 343 LMT से काफी कम है। गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों, साथ ही अत्यधिक बारिश और जलभराव से उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान से कम होने के बावजूद अक्टूबर में नया क्रशिंग सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है।
दुनिया में भी बढ़ रही चीनी की कीमत
सरकार के अनुसार चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी केवल भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी आपूर्ति को लेकर दबाव बना हुआ है। 2026-27 के लिए दुनिया में लगभग 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान लगाया गया है। मौसम संबंधी चिंताओं ने भी वैश्विक उत्पादन पर असर डाला है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून 2026 के करीब 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में अंतरराष्ट्रीय कीमत में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
इथेनॉल कार्यक्रम से किसानों और चीनी मिलों को फायदा
सरकार ने कहा है कि इथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद की है। भारत में सामान्य तौर पर सालाना करीब 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280-290 LMT रहती है। अधिक उत्पादन वाले वर्षों में अतिरिक्त चीनी का स्टॉक मिलों की पूंजी को लंबे समय तक रोक देता था। इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होती थी और किसानों को गन्ने का भुगतान मिलने में देरी की स्थिति बन सकती थी।
अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट करने से इस समस्या को कम करने में मदद मिली है। सरकार के अनुसार 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 चीनी सीजन के लिए गन्ना किसानों के करीब 97 प्रतिशत बकाये का भुगतान किया जा चुका है।
चीनी उद्योग को सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता भी हुई कम
सरकार के मुताबिक चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति में सुधार के कारण सरकारी सहायता पर निर्भरता भी कम हुई है। आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2021 के बीच चीनी उद्योग को करीब ₹14,600 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी। वहीं 2021-22 के बाद से ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है। सरकार ने यह भी कहा कि लंबे समय में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमतों में अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि हुई है। अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच सालाना वृद्धि करीब 3 प्रतिशत रही।
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के बड़े कदम
हालिया कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
1. डीलरों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट-1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है।
2. थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा– 1 सितंबर 2026 से थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
3. चीनी मिलों में स्टॉक की जांच– केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। इसका उद्देश्य जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों की पहचान करना है।
4. 10 LMT कच्ची चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात– घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने एहतियाती कदम के तौर पर 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है।
5. अक्टूबर में बढ़ेगी चीनी की उपलब्धता– राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है।
सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से अधिक हो सकता है। इससे त्योहारों के मौसम में बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सरकार ने कहा है कि वह चीनी के स्टॉक, कीमतों और बाजार में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है।
सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध कराना, अनावश्यक मूल्य वृद्धि और जमाखोरी रोकना तथा गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
चीनी की कीमत बढ़ने का पूरा मामला एक नजर में-
- 20 जुलाई 2026: ₹48.18 प्रति किलो
- 20 अगस्त 2026: ₹55.70 प्रति किलो
- अनुमानित घरेलू उत्पादन: 306 LMT
- शुरुआती उत्पादन अनुमान: 343 LMT
- वैश्विक चीनी कमी का अनुमान: 33 LMT
- अंतरराष्ट्रीय कीमत: $474 से बढ़कर $552 प्रति टन
- गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान: 97%
- डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट: 400 टन
- ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी आयात: 10 LMT
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