नई दिल्ली: World Lion Day 2026: भारत में एशियाई शेर 523 से बढ़कर 891 हुए, Project Lion का बड़ा असर, विश्व शेर दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत में एशियाई शेरों के संरक्षण की दिशा में मिली महत्वपूर्ण सफलता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत ने वन्यजीवों और जैव-विविधता के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार मजबूत किया है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत में एशियाई शेरों की संख्या में पिछले एक दशक के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2015 में देश में एशियाई शेरों की संख्या 523 थी, जो 2025 में बढ़कर 891 हो गई। यह वृद्धि शेर संरक्षण के क्षेत्र में भारत के प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि का श्रेय वन अधिकारियों, वन्यजीव संरक्षणवादियों, स्थानीय समुदायों और उन सभी लोगों को दिया जो एशियाई शेरों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
एशियाई शेर दुनिया में केवल भारत में पाए जाते हैं और इनका प्रमुख प्राकृतिक आवास गुजरात का गिर परिदृश्य है। शेरों की संख्या में वृद्धि भारत के संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2015 में एशियाई शेरों की संख्या 523 थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 891 तक पहुंच गया। यानी इस अवधि में शेरों की आबादी में 368 की वृद्धि दर्ज हुई। यह वृद्धि शेरों के संरक्षण, उनके आवास की सुरक्षा, वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे प्रयासों के महत्व को दर्शाती है।

विश्व शेर दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से भारत की इस उपलब्धि को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एशियाई शेरों के संरक्षण में भारत की सफलता देश की वन्यजीव और जैव-विविधता संरक्षण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मंत्री ने वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों के समर्पण की सराहना करते हुए भारत की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एशियाई शेरों की दहाड़ आने वाली पीढ़ियों तक सुनाई देती रहे, इसके लिए संरक्षण के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी विश्व शेर दिवस पर भारत के संरक्षण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण शेर आवासों की सुरक्षा, संरक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देकर भारत ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि विकास और प्रकृति संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। उनके अनुसार, जैव-विविधता और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के साथ विकास की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना आज के समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
भारत में शेर संरक्षण को दीर्घकालिक और व्यापक रणनीति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को Project Lion की घोषणा की थी। इस परियोजना का उद्देश्य केवल शेरों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक आवास को मजबूत करना है। Project Lion के तहत शेर संरक्षण को वैज्ञानिक, तकनीकी और सामुदायिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
Project Lion के बाद शेरों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। वर्ष 2020 से अब तक शेरों का क्षेत्र लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर करीब 35,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इस विस्तार का मतलब केवल भौगोलिक क्षेत्र में वृद्धि नहीं है, बल्कि शेरों के लिए उपलब्ध प्राकृतिक आवास, उनके विचरण क्षेत्र और संरक्षण व्यवस्था को व्यापक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
Project Lion के तहत शेर संरक्षण के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है। इसके प्रमुख घटकों में शामिल हैं: 1. पर्यावास सुधार-शेरों के प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने और उनके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
2. रोग निगरानी-शेरों को बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए रोग निगरानी और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
3. पशु चिकित्सा सहायता-बीमार या घायल वन्यजीवों के लिए आधुनिक पशु चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
4. वैज्ञानिक संख्या ट्रैकिंग-शेरों की आबादी और उनके व्यवहार की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी की जा रही है, ताकि संरक्षण की रणनीति वास्तविक आंकड़ों पर आधारित हो।
5. तकनीक का इस्तेमाल-शेरों की निगरानी और संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीक आधारित उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
6. जैव-विविधता संरक्षण-Project Lion केवल शेरों तक सीमित नहीं है। इसके तहत शेरों के साथ उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और जैव-विविधता की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाता है।
7. स्थानीय समुदायों की भागीदारी-मानव और वन्यजीव के बीच बेहतर सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है।
8. लाभ साझाकरण-संरक्षण से जुड़े लाभों को स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने और उनके सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
एशियाई शेर भारत की प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका संरक्षण केवल एक वन्यजीव प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा से जुड़ा हुआ है। शेरों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ आवास बनाए रखने से कई अन्य वन्यजीव प्रजातियों, वनस्पतियों और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को भी लाभ मिलता है। इसीलिए शेर संरक्षण को व्यापक जैव-विविधता संरक्षण के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण की सफलता केवल सरकारी एजेंसियों के प्रयासों से संभव नहीं है। जिन क्षेत्रों में वन्यजीव और मानव आबादी एक-दूसरे के करीब रहते हैं, वहां स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। Project Lion में भी समुदाय आधारित संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर जोर दिया गया है। स्थानीय लोगों को संरक्षण प्रक्रिया से जोड़ने से वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और संघर्ष की स्थितियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
विश्व शेर दिवस 2026 पर सामने आई यह उपलब्धि भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है। शेरों की संख्या में वृद्धि और उनके क्षेत्र के विस्तार से यह संकेत मिलता है कि दीर्घकालिक संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, आवास प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी को साथ लेकर चलना प्रभावी रणनीति हो सकती है। भारत का लक्ष्य अब केवल शेरों की मौजूदा आबादी को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके प्राकृतिक आवास और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाए रखना है।
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