अरुण कुमार
नई दिल्ली: Agriculture Scholarship 2026: 6 हजार छात्रों को ₹21.35 करोड़, अब हर महीने DBT से मिलेगी स्कॉलरशिप, कृषि शिक्षा से जुड़े देशभर के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-IARI, पूसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से कृषि विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि जारी की।
इस पहल के तहत देशभर के 6,000 से अधिक कृषि विद्यार्थियों को कुल ₹21.35 करोड़ की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी गई। सरकार के अनुसार, नई NSP-DBT व्यवस्था से अब कृषि विद्यार्थियों को उनकी स्कॉलरशिप/फेलोशिप की राशि नियमित रूप से और बिना अनावश्यक देरी के सीधे बैंक खाते में मिल सकेगी।

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कृषि विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप के लिए लंबे समय तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। NSP के जरिए DBT प्रणाली से राशि सीधे लाभार्थी विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे स्कॉलरशिप वितरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और निर्बाध बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि समय पर वित्तीय सहायता मिलने से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई, शोध और प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्कॉलरशिप केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कृषि शिक्षा को अधिक सशक्त, व्यावहारिक और अवसरों से जोड़ने का महत्वपूर्ण साधन है।
उन्होंने कहा कि DBT व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिलेगी और स्कॉलरशिप वितरण में होने वाली पारंपरिक देरी की समस्या को दूर किया जा सकेगा। मंत्री ने विद्यार्थियों से कृषि शिक्षा और शोध व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सुझाव और नए विचार साझा करने की अपील भी की।
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि शिक्षा में केवल कक्षा में पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वास्तविक कृषि परिस्थितियों का अनुभव विद्यार्थियों को बेहतर किसान, वैज्ञानिक और कृषि उद्यमी बनने में मदद करता है। उन्होंने कृषि शिक्षा को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों के साथ जोड़ने पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी नवाचार, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव, आधुनिक खेती, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए युवाओं के लिए कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार कृषि क्षेत्र में फूड सिक्योरिटी, न्यूट्रिशन और किसान आय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने ICAR के वैज्ञानिकों के योगदान की भी सराहना की। मंत्री के अनुसार, वैज्ञानिकों के अनुसंधान और किसानों की मेहनत ने देश के अन्न भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कृषि विद्यार्थियों से अपने करियर के साथ-साथ बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और देश के लिए सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।

नई व्यवस्था से कृषि विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप वितरण की प्रक्रिया में कई बदलाव होने की उम्मीद है। स्कॉलरशिप की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी, भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, विद्यार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता मिलेगी, मैनुअल प्रक्रिया और अनावश्यक देरी कम होगी, स्कॉलरशिप वितरण की निगरानी बेहतर होगी और विद्यार्थियों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा व शिक्षा और शोध पर विद्यार्थियों का ध्यान अधिक केंद्रित हो सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने हरियाली अमावस्या के अवसर पर देशभर के ICAR संस्थानों में कृषि विद्यार्थियों से पौधारोपण करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि हरित पहलें केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि और पर्यावरण दोनों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा हैं। कृषि विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, ICAR के सचिव ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, डीडीजी डॉ. यशपाल सिंह मलिक और IARI के निदेशक डॉ. सी. श्रीनिवास राव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में ICAR और IARI के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में कृषि विद्यार्थी शामिल हुए। इसके अलावा देशभर से हजारों विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े।
इस पहल के तहत शुरुआती चरण में 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को ₹21.35 करोड़ की स्कॉलरशिप/फेलोशिप राशि DBT के माध्यम से जारी की गई है। सरकार का लक्ष्य ऐसी डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करना है, जिससे विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने में कम से कम परेशानी हो और वे अपनी शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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Achhi baat hai.