यूजीसी ने कहा- फ्रेंचाइजी मॉडल से ODL और Online डिग्री चलाना नियमों के खिलाफ, 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची भी जारी
जैनेन्द्र यादव
नई दिल्ली: UGC की बड़ी चेतावनी: एडटेक कंपनियों के जरिए ऑनलाइन डिग्री कराने वाले विश्वविद्यालयों पर होगी कार्रवाई, छात्रों को प्रवेश से पहले करें यह जांच, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) कार्यक्रमों के नाम पर छात्रों को गुमराह करने वाली एडटेक (EdTech) कंपनियों और उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी एडटेक कंपनी के साथ फ्रेंचाइजी व्यवस्था के माध्यम से डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम संचालित करना नियमों के विरुद्ध है और ऐसे कार्यक्रमों को यूजीसी की मान्यता प्राप्त नहीं होगी।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि यूजीसी ने इस संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी कर छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
यूजीसी ने पाया है कि कुछ एडटेक कंपनियां समाचार पत्रों, सोशल मीडिया और टेलीविजन पर ऐसे विज्ञापन प्रकाशित और प्रसारित कर रही हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि वे यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के सहयोग से ऑनलाइन और ODL माध्यम से डिग्री एवं डिप्लोमा कार्यक्रम संचालित कर रही हैं। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की फ्रेंचाइजी व्यवस्था अनुमेय नहीं है और ऐसे किसी भी कार्यक्रम अथवा डिग्री को आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं मानी जाएगी।
यूजीसी ने कहा है कि यदि कोई एडटेक कंपनी या उच्च शिक्षण संस्थान इस प्रकार की अवैध व्यवस्था में शामिल पाया जाता है तो उसके विरुद्ध लागू कानूनों, नियमों और विनियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन या ODL कोर्स में प्रवेश लेने से पहले यूजीसी की Distance Education Bureau (DEB) वेबसाइट पर संबंधित विश्वविद्यालय और कार्यक्रम की मान्यता (Recognition Status) अवश्य जांच लें।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यदि किसी अनधिकृत संस्था द्वारा डिग्री कार्यक्रम चलाने की शिकायत मिलती है तो यूजीसी पहले उसे कारण बताओ नोटिस जारी करता है। यदि संस्था का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसे यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालयों (Fake Universities) की सूची में शामिल कर दिया जाता है।
फरवरी 2026 में प्रकाशित नवीनतम सूची के अनुसार देशभर में 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। यह सूची यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
फर्जी विश्वविद्यालयों और अवैध संस्थानों पर रोक लगाने के लिए यूजीसी ने 30 मई 1996 को एंटी-मालप्रैक्टिस सेल (AMPC) की स्थापना की थी। यह सेल उन संस्थानों की निगरानी करता है जो यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति डिग्री प्रदान कर रहे हैं या शैक्षणिक कार्यक्रम चला रहे हैं।
यूजीसी ने छात्रों को जागरूक करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जैसेकि अवैध संस्थानों को कारण बताओ नोटिस और चेतावनी पत्र जारी किए जा रहे हैं, राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची समय-समय पर वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है, सोशल मीडिया और वेबसाइट के माध्यम से नियमित सार्वजनिक सूचनाएं जारी की जाती हैं और छात्रों को प्रवेश से पहले संस्थानों की मान्यता जांचने की सलाह दी जाती है तथा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से फर्जी संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षा के तेजी से बढ़ते बाजार में कई फर्जी संस्थान और एडटेक कंपनियां छात्रों को आकर्षक विज्ञापनों के माध्यम से भ्रमित कर रही हैं। ऐसे में किसी भी विश्वविद्यालय या ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रम में प्रवेश लेने से पहले उसकी यूजीसी मान्यता की जांच करना अत्यंत आवश्यक है। यूजीसी ने दोहराया है कि केवल वही डिग्री और कार्यक्रम वैध माने जाएंगे जिन्हें आयोग से विधिवत मान्यता प्राप्त है।
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