केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने 11 नए FTO के लिए Letter of Intent सौंपे,
भारत की पायलट प्रशिक्षण क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
अरुण कुमार
नई दिल्ली:भारत में पायलट बनने का सपना होगा आसान: 7 एयरपोर्ट पर खुलेंगे 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर, हर साल 750 नए कैडेट्स को मिलेगा प्रशिक्षण, भारत के तेजी से बढ़ते नागरिक उड्डयन क्षेत्र को नई उड़ान देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के सात हवाई अड्डों पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) स्थापित करने के लिए आशय पत्र (Letter of Intent) प्रदान किए।
इस पहल से देश की वार्षिक पायलट प्रशिक्षण क्षमता में 750 नए कैडेट प्रति वर्ष की बढ़ोतरी होगी, जिससे भारत का घरेलू विमानन प्रशिक्षण तंत्र और मजबूत होगा। वर्तमान में देशभर के 63 फ्लाइंग बेस पर 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) संचालित हो रहे हैं। अब सात नए AAI हवाई अड्डों पर 11 नए FTO शुरू होने से प्रशिक्षित पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और भारतीय एयरलाइंस की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे विमानन बाजारों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल एयरपोर्ट और विमानन अवसंरचना का विस्तार ही नहीं कर रही, बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कुशल विमानन पेशेवर भी तैयार कर रही है। उन्होंने कहा “हमारा विजन स्पष्ट है—’भारत में प्रशिक्षण, भारत में उड़ान’।”
मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 6 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन स्थापित हुए, प्रशिक्षण विमानों की संख्या 324 से बढ़कर 385 हो गई औऱ वार्षिक उड़ान घंटों में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई तथा प्रशिक्षण क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (Commercial Pilot Licence – CPL) जारी होने के आंकड़ों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। 2024 मे 1,347 CPL जारी, 2025 में 1,652 CPL जारी (पिछले दशक का सर्वाधिक) तथा 2026: संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

मंत्री ने बताया कि भारतीय एयरलाइंस ने वर्तमान में 1,640 विमानों का ऑर्डर दिया है। अगले पांच वर्षों में लगभग 500 नए विमान भारतीय बेड़े में शामिल होंगे। ऐसे में हजारों प्रशिक्षित पायलटों और विमानन विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। सरकार ने पायलट प्रशिक्षण को आसान और सस्ता बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं जैसेकि FTO नीति का उदारीकरण, एयरपोर्ट रॉयल्टी समाप्त, भूमि किराया युक्तिसंगत और CPL परीक्षा प्रक्रिया का डिजिटलीकरण व इलेक्ट्रॉनिक पायलट लाइसेंस जारी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बना भारत। इन सुधारों से प्रशिक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हुई है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा शुरू किए गए FTO Ranking Framework का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। मंत्री ने बताया-‘C’ श्रेणी के FTO की संख्या घटी, ‘B’ श्रेणी के संस्थानों की संख्या बढ़ी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (IGRUA) ने प्रति विमान प्रति वर्ष औसतन 1,765 उड़ान घंटे दर्ज किए, जबकि वैश्विक औसत लगभग 1,500 घंटे है। IGRUA ने वित्त वर्ष 2025-26 में 27% राजस्व वृद्धि दर्ज की और दो दशकों से अधिक समय बाद पहली बार संस्थान बजट अधिशेष में पहुंचा।

मंत्री ने HANSA-3 (NG) स्वदेशी प्रशिक्षण विमान के विकास को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब अपने प्रशिक्षण विमानों के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राम मोहन नायडू ने कहा कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी FTO को निर्देश दिए कि प्रशिक्षकों की निगरानी मजबूत करें, SOP का कड़ाई से पालन करें और सुरक्षा संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने FTO IFR Slot Booking App का भी शुभारंभ किया। यह मोबाइल ऐप IFR प्रशिक्षण स्लॉट की ऑनलाइन जानकारी देगा और डिजिटल स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराएगा तथा एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर, डिजिटल सुधार, स्वदेशी विमान और आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली भारत को आने वाले वर्षों में एशिया के प्रमुख पायलट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य केवल घरेलू जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि विदेशी छात्रों को भी भारत में पायलट प्रशिक्षण के लिए आकर्षित करना है।
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