“भारत तभी विश्वगुरु बनेगा, जब वह अपनी जड़ों से जुड़ेगा!” बेंगलुरु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर आयोजित सम्मेलन में राज्यपाल थावरचंद गहलोत का बड़ा संदेश।
डॉ दीपक शर्मा
बेंगलुरु :NEP 2020 के क्रियान्वयन पर राष्ट्रीय सम्मेलन: सभ्यतागत ज्ञान से जुड़कर ही भारत विश्वगुरु बन सकता है – थावरचंद गहलोत, भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन: भारतीय ज्ञान प्रणालियों का समेकन” का भव्य उद्घाटन बेंगलुरु में हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राज्यपाल ने कहा कि भारत आज पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है और इसका मार्ग अपने सभ्यतागत ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और भारतीय ज्ञान परंपराओं से पुनः जुड़ने से होकर गुजरता है।

गहलोत ने कहा कि आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, जीवन विज्ञान, भूगोल, इतिहास और भारतीय भाषाओं जैसी परंपरागत ज्ञान प्रणालियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य के सतत एवं नैतिक विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों के युग में भी भारत को अपने मूल्यों, नैतिकता और दायित्वबोध से जुड़े रहना होगा। उन्होंने कहा कि “भारतीय ज्ञान प्रणालियों के धार्मिक और नैतिक सिद्धांतों से निर्देशित तकनीक मानव कल्याण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।”
भारतीय शिक्षण मंडल के अध्यक्ष प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का केंद्रीय आधार बताते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अकादमिक समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में प्रारंभिक प्रतिरोध का प्रमुख कारण औपनिवेशिक मानसिकता रही है और अब समय आ गया है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का डीकोलोनाइजेशन किया जाए।

भारतीय शिक्षण मंडल के महामंत्री प्रो. भरत शरण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की दृष्टि को व्यवहारिक शैक्षणिक मॉडल में बदलने के लिए शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा देशभर में भारतीयता-आधारित शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. एम. आर. जयाराम ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की स्मृतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक, समग्र और टिकाऊ ढांचा है जो आधुनिक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास में भारतीय ज्ञान प्रणालियों के समावेशन पर विशेष बल दिया ताकि विद्यार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहें।
डॉ. एम. वी. श्याम ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणालियों का समावेशन उच्च शिक्षा को नया स्वरूप देने वाला कदम साबित होगा।उन्होंने कहा कि यह केवल पाठ्यक्रम में नए विषय जोड़ने का प्रयास नहीं, बल्कि शिक्षण और अधिगम की संपूर्ण प्रक्रिया को पुनर्परिभाषित करने वाला व्यापक शैक्षिक दृष्टिकोण है। उन्होंने अनुभवात्मक, अंतरविषयी और मूल्य-आधारित शिक्षा मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी तथा भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानंद सहित अनेक शिक्षाविद एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 45 प्रांतों से आए शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति-निर्माता, विश्वविद्यालय प्रशासक और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों को भारतीय ज्ञान परंपराओं के संदर्भ में व्यावहारिक रूप से लागू करने हेतु संस्थागत रणनीतियां और शैक्षणिक मॉडल विकसित करना है।
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1 thought on “बेंगलुरु :NEP 2020 के क्रियान्वयन पर राष्ट्रीय सम्मेलन: सभ्यतागत ज्ञान से जुड़कर ही भारत विश्वगुरु बन सकता है – थावरचंद गहलोत”
Bahut achhi baat hai.