नई दिल्ली:सत्या निकेतन हादसा: MCD के भवन सर्वे पर बड़ा सवाल, हाईकोर्ट ने केंद्र-दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस, दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद राजधानी में भवन सुरक्षा और MCD के सर्वे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हादसे में छह लोगों की मौत और छह लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ दिल्ली सरकार और पुलिस को भी नोटिस जारी किया है।
AICC के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्ता ने सत्या निकेतन हादसे को लेकर MCD की भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मानसून से पहले MCD की ओर से किए गए सर्वे में दिल्ली की करीब 32 लाख इमारतों/घरों को चिन्हित किया गया, लेकिन इनमें केवल 19 को खतरनाक बताया गया। दत्ता के मुताबिक, सत्या निकेतन में जिस इमारत के गिरने से हादसा हुआ, उसे भी MCD के रिकॉर्ड में खतरनाक इमारत की श्रेणी में नहीं रखा गया था।
अभिषेक दत्ता ने आरोप लगाया कि नगर निगम का भवन सर्वे जमीनी हकीकत के बजाय कागजों तक सीमित है। उनका दावा है कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच करीब एक करोड़ इमारतों का सर्वे किया गया, लेकिन केवल 103 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया। उन्होंने भाजपा सरकार पर गरीबों की झुग्गियों के खिलाफ कार्रवाई करने और बड़े बिल्डरों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।

CM रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल और राहत-बचाव अभियान को लेकर जानकारी दी। मुख्यमंत्री के मुताबिक करीब 80 प्रतिशत मलबा हटाया जा चुका था। उन्होंने बताया कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान पानी जमा होने के कारण इमारत के गिरने की स्थिति बनी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 12 लोगों को निकाला गया, जिनमें छह लोगों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य की हालत स्थिर बताई गई। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के संपर्क में प्रशासन लगातार बना हुआ है और बच्चों का समुचित इलाज कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार मामले की निगरानी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की सीधी निगरानी में हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्री भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और प्रधानमंत्री की ओर से लगातार मार्गदर्शन मिल रहा है।
खराब इमारतों की होगी स्ट्रक्चरल जांच

रेखा गुप्ता ने कहा कि खराब स्थिति वाली सभी इमारतों की स्ट्रक्चरल जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
MCD अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई


सत्या निकेतन हादसे के बाद MCD ने भवन विभाग से जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक Rakesh Kumar, SE Ranvir Singh, भवन विभाग के EE Lalit Kr Goel, AE Sunil Chauhan और जूनियर इंजीनियर Ashish Kumar को निलंबित किया गया है। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों में कहा गया है कि यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कथित नाराजगी के बाद हुई।
सैदुलाजाब हादसे की जांच का भी उठा मुद्दा
हादसे के बीच सैदुलाजाब में हुई पिछली घटना की जांच का मुद्दा भी सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि उस जांच में निगम उपायुक्त और कुछ निगम अभियंताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। आरोप है कि उस समय संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। विपक्ष अब इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है और आरोप लगा रहा है कि यदि पिछली घटनाओं के बाद समय रहते सख्त कार्रवाई की गई होती तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता था।
दिल्ली में PG और छात्र आवासों की सुरक्षा पर भी समीक्षा
सत्या निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में भवन सुरक्षा, छात्र आवास और PG नियमों को लेकर भी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गई। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, DG NDRF, दिल्ली पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में असुरक्षित इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, संस्थागत जवाबदेही तय करने और आपात स्थिति में शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए DDMA के तहत इमरजेंसी मैकेनिज्म मजबूत करने पर जोर दिया गया।

मंत्री (UD), GNCTD को संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समिति का नेतृत्व करने का निर्देश दिया गया है। समिति संस्थागत PG दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी और विश्वविद्यालयों, MCD तथा DDA के माध्यम से छात्रों के लिए वैकल्पिक आवास की संभावनाओं पर विचार करेगी। इसके साथ ही खाली पड़े DDA आवासों को छात्र आवास के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवहार्यता का भी आकलन किया जाएगा।
दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती
सत्या निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत की कार्रवाई के बाद भवन सुरक्षा, अवैध/असुरक्षित निर्माण, PG व्यवस्था और संबंधित विभागों की जवाबदेही को लेकर मामला और गंभीर हो गया है।
अब बड़ा सवाल यही है कि राजधानी में हर साल होने वाले भवन सर्वे के बावजूद असुरक्षित इमारतों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई कितनी प्रभावी है। हादसे के बाद सरकार और नगर निगम की ओर से की जा रही जांच और कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
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Dukhad