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पणजी
अमित शाह का बड़ा ऐलान: 2026-2029 में ड्रग्स के खिलाफ मिशन मोड, हर राज्य में ANTF और 1,751 नशामुक्ति केंद्रों का लक्ष्य, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को गोवा की राजधानी पणजी में नारकोटिक्स नियंत्रण को लेकर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केंद्र सरकार की ड्रग्स के खिलाफ रणनीति और आने वाले तीन वर्षों के रोडमैप की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद रहे।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था का विषय न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स से होने वाली अवैध कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद और नारको-टेरर नेटवर्क को मजबूत करने में भी किया जा सकता है। इसलिए सरकार का लक्ष्य केवल ड्रग्स की छोटी-बड़ी खेप पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे आपूर्ति नेटवर्क, वित्तीय श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को खत्म करना है।
2026 से 2029 तक मिशन मोड में चलेगा अभियान
गृह मंत्री ने बताया कि जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक के लिए तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत नशे के खिलाफ कार्रवाई को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में समयबद्ध लक्ष्य, संबंधित मंत्रालयों की जिम्मेदारी, मापने योग्य परिणाम, तिमाही समीक्षा और परिणाम आधारित जवाबदेही तय की जाएगी।

इस रणनीति के चार प्रमुख स्तंभ हैं- इंटेलिजेंस और ऑपरेशन आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण और डिमांड रिडक्शन और हार्म रिडक्शन व क्षमता निर्माण और अंतर-एजेंसी समन्वय। सरकार का लक्ष्य ड्रग्स के कारोबार में शामिल बड़े नेटवर्क और किंगपिन तक पहुंचने के लिए बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच को मजबूत करना है।
अमित शाह ने कहा कि अब यदि देश के किसी हिस्से में ड्रग्स की छोटी-सी खेप भी पकड़ी जाती है तो जांच केवल उस आरोपी तक सीमित नहीं रहेगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि ड्रग्स कहां से आया, किसने भेजा और आगे किन लोगों तक पहुंचना था। इसी तरह सीमा या बंदरगाह पर बड़ी खेप पकड़े जाने पर जांच का अगला चरण यह पता लगाना होगा कि उसे देश के अंदर छोटे पैकेटों में बांटकर किन शहरों और युवाओं तक पहुंचाया जाना था। इसे सरकार की Bottom-to-Top और Top-to-Bottom जांच रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
अमित शाह ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 2004 से 2014 के दौरान लगभग 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए थे, जिनकी कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये थी। वहीं, 2014 से 2026 के दौरान ड्रग्स की जब्ती बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपये बताई गई। उन्होंने बताया कि 2004-2014 के दौरान लगभग 3.36 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए थे, जबकि 2014-2026 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 48.68 लाख किलोग्राम हो गया।
46 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग
ड्रग्स की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत किया है। गृह मंत्री के अनुसार, भारत ने 46 देशों के साथ समझौते किए हैं। इसके अलावा एनकॉर्ड की 10 शीर्ष बैठकें, 7 कार्यपालक बैठकें, 277 राज्य स्तरीय बैठकें और 16,798 जिला स्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं। इसका उद्देश्य केंद्र, राज्यों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं और कार्रवाई का बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
नशामुक्त भारत अभियान के तहत 25 करोड़ लोगों तक पहुंच
अमित शाह ने बताया कि नशामुक्त भारत अभियान के तहत करीब 25 करोड़ नागरिकों से संपर्क कर उन्हें नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई है। उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में लगभग 5.70 लाख नागरिकों को नशामुक्त बनाने में मदद किए जाने की जानकारी भी दी गई। सरकार अब नशे की मांग कम करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और युवा संगठनों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।
1,751 नशामुक्ति केंद्र बनाने की तैयारी
आने वाले रोडमैप के तहत देश में नशामुक्ति केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 1,751 करने का लक्ष्य रखा गया है। गृह मंत्री के अनुसार, इस अभियान में करीब 10 हजार स्वयंसेवकों को जोड़ा जाएगा। साथ ही NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से बड़ी संख्या में ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार किए जाएंगे। शिक्षा, युवा एवं खेल मंत्रालय तथा शिक्षण संस्थानों के माध्यम से शैक्षणिक परिसरों को ड्रग-फ्री बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
हर राज्य में एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स
सरकार ने मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र की ओर से 7 प्रतिशत केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। गृह मंत्रालय फॉरेंसिक रिपोर्ट को 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी काम करेगा।

डार्क वेब और क्रिप्टो लेन-देन पर भी नजर
ड्रग्स तस्करी के आधुनिक तरीकों को देखते हुए जांच एजेंसियां तकनीक आधारित निगरानी को भी मजबूत करेंगी। रोडमैप में विशेष रूप से डार्क नेट, एन्क्रिप्टेड संचार, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और डेड-ड्रॉप डिलीवरी तथा ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क जैसे माध्यमों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। ANTF में डार्क नेट और क्रिप्टो सेल विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
भारतपोल के जरिए भगोड़ों पर शिकंजा
अमित शाह ने आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण किया गया है। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, नारकोटिक्स और गैंगवार जैसे गंभीर मामलों में आरोपी लोग शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए। अकेले 2026 में जुलाई तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने बताया कि भारतपोल के माध्यम से केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों की पुलिस के बीच प्रत्यर्पण के लिए एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया गया है।
भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या सील
गृह मंत्री के अनुसार, 2019 से 2026 तक भगोड़ों की करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति सील या जब्त की जा चुकी है। सरकार का कहना है कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद भगोड़ों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मदद मिली है।
साइबर अपराध के लिए 1930 हेल्पलाइन
अमित शाह ने साइबर अपराध से निपटने के लिए 1930 हेल्पलाइन को भी महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों के खिलाफ देश में एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया गया है और इसकी निगरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की जा रही है।
गोवा में नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने गोवा पुलिस और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में नई न्याय संहिता और तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद दोषसिद्धि दर 53.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
2019 के बाद नक्सलवाद और आतंकवाद पर भी सरकार का दावा
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद में कमी आई है और आतंकवाद से संबंधित स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या अब काफी हद तक कमजोर हो चुकी है और अनेक लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं। पूर्वोत्तर में भी करीब 11 हजार युवाओं के हथियार छोड़ने और केंद्र सरकार द्वारा 14 से अधिक समझौते किए जाने का उल्लेख उन्होंने किया।
‘ड्रग्स के साथ नहीं’—विदेशियों को अमित शाह का संदेश
गृह मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया भर के लोगों का स्वागत करता है, लेकिन देश में ड्रग्स के कारोबार को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने Death Triangle और Death Crescent के रास्ते भारत में होने वाली कथित ड्रग्स तस्करी पर रोक लगाने के लिए चतुष्कोणीय रणनीति अपनाने की बात कही।
2047 तक नशामुक्त युवा शक्ति का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि 2047 में नशामुक्त युवा शक्ति विकसित भारत की मजबूत नींव बने। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई अब केवल पुलिस और जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और समाज की सामूहिक भागीदारी होगी।
सरकार के 2026-2029 रोडमैप का मुख्य उद्देश्य ड्रग्स की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना, वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार करना, अंतरराष्ट्रीय तस्करी रोकना और नशे की मांग को कम करना है। अमित शाह ने कहा कि जिस संकल्प के साथ देश ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया है, उसी दृढ़ता के साथ ड्रग्स की समस्या को भी खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
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