नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रकों और बसों को बदलने की तैयारी तेज! अशोक लेलैंड और स्विच मोबिलिटी बने सरकार की नई वाहन प्रतिस्थापन योजना के पहले साझेदार। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और अशोक लेलैंड के बीच पुरानी ट्रक एवं बस प्रतिस्थापन योजना के तहत पहला समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किया गया है। इस समझौते में अशोक लेलैंड की सहायक कंपनी स्विच मोबिलिटी भी शामिल है।
इस एमओयू के साथ अशोक लेलैंड और स्विच मोबिलिटी इस योजना में शामिल होने वाले देश के पहले मूल उपकरण निर्माता (OEM) बन गए हैं। यह समझौता दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल वाहनों से बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समझौते के तहत अशोक लेलैंड और स्विच मोबिलिटी योजना के अंतर्गत खरीदे जाने वाले पात्र ट्रकों और बसों के एक्स-शोरूम मूल्य पर 8 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान करेंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में यह छूट समान सकल वाहन भार (GVW) श्रेणी के इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाहन पर लागू छूट की सीमा तक उपलब्ध होगी। योजना के अंतर्गत वाहन मालिकों को केवल कंपनी की छूट ही नहीं मिलेगी, बल्कि केंद्र सरकार भी कई वित्तीय लाभ प्रदान करेगी। इनमें 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान और पांच वर्षों तक निश्चित मासिक ईंधन वाउचर व स्वच्छ और आधुनिक वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन।
योजना में भाग लेने वाले राज्यों द्वारा पात्र लाभार्थियों को अतिरिक्त राहत दी जाएगी। जैसे कि 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत तक छूट और वाहन पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट तथा स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन। यह योजना विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत उन ट्रकों और बसों के लिए बनाई गई है जो भारत स्टेज-IV (BS-IV) या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं। पुराने और अधिक प्रदूषणकारी वाहन हैं। इनके स्थान पर BS-VI या उससे उच्च उत्सर्जन मानक वाले वाहन या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे जाएंगे।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वाहन प्रदूषण को कम करना और परिवहन क्षेत्र के आधुनिकीकरण को गति देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आने से राजधानी और आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में अन्य प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता भी इस योजना में शामिल होंगे। इससे योजना का दायरा और व्यापक होगा तथा स्वच्छ परिवहन तकनीकों को अपनाने की प्रक्रिया तेज होगी। केंद्र सरकार की यह पहल न केवल प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगी बल्कि इलेक्ट्रिक और अत्याधुनिक परिवहन साधनों को बढ़ावा देकर भारत के हरित एवं सतत विकास के लक्ष्य को भी मजबूत करेगी।
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Acchi baat hai. Badti pollution ko rokne ke liye achha kadam hai.