सुनीता भट्ट अरुण
नई दिल्ली: AI से बदलेगा अल्पसंख्यक कल्याण का भविष्य! विकसित भारत@2047 के लिए सरकार ने तैयार किया बड़ा टेक्नोलॉजी रोडमैपअल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने “विकसित भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से अल्पसंख्यक कल्याण तथा समावेशी विकास” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। “भागीदारी से भाग्योदय” थीम पर आधारित इस सम्मेलन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।

सम्मेलन का उद्देश्य सहकारी संघवाद, तकनीक आधारित प्रशासन और सहभागी शासन के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए एक मजबूत और दूरदर्शी रोडमैप तैयार करना था। सम्मेलन में विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए समावेशी और समानता आधारित राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया गया। इसमें नीति संवाद, हितधारकों से परामर्श और सहयोगात्मक भागीदारी को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने AI शिखर सम्मेलन के बाद सभी मंत्रालयों में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने की अपील के अनुरूप मंत्रालय ने कई नई पहल शुरू की हैं। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बातचीत आधारित AI बॉट्स विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इन AI आधारित प्रणालियों का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं की बेहतर, तेज और प्रभावी जानकारी उपलब्ध कराना है।

मंत्रालय के सचिव डॉ वत्स कृष्ण ने सम्मेलन को केंद्र और राज्यों के बीच सार्थक संवाद का खुला मंच बताया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर संस्थागत सहयोग और समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
सम्मेलन में AI आधारित प्रशासनिक मॉडल को लेकर व्यापक चर्चा हुई। मंत्रालय ने बताया कि आने वाले समय में AI आधारित टूल्स जो निगरानी तंत्र को मजबूत करेंगे, शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएंगे और डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद करेंगे तथा योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक के माध्यम से योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शिता और तेजी से लोगों तक पहुंचे।

सम्मेलन के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न योजनाओं को लागू करने में आने वाली प्रशासनिक और जमीनी चुनौतियों को सामने रखा। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए व्यावहारिक समाधान और मार्गदर्शन दिया। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) के अधिकारियों द्वारा आयोजित विशेष सत्र में कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए संस्थागत समन्वय पर जोर दिया गया। इस दौरान अल्पसंख्यक युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए युवाओं के लिए अधिक रोजगार अवसर तैयार करने की रणनीति साझा की गई।

जनरेशन इंडिया ने AI आधारित कौशल विकास और रोजगार सृजन मॉडल पर प्रस्तुति दी। इसमें रोजगार मैपिंग, कार्यबल तैयारी और परिणाम आधारित कार्यान्वयन ढांचे जैसे वैश्विक मॉडल साझा किए गए। इसके अलावा EkStep Foundation, Jnanaani और Sarvam AI जैसी संस्थाओं ने AI सक्षम शासन प्रणाली और स्केलेबल डिजिटल समाधान प्रस्तुत किए जिसमे लाभार्थी लक्ष्यीकरण, रियल टाइम निगरानी, शिकायत प्रबंधन और नागरिक केंद्रित सेवाएं व रणनीतिक योजना और डेटा विश्लेषण है।
सम्मेलन में विशेष रूप से वर्ष 2027 की हज यात्रा को तकनीक आधारित और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में AI के बड़े पैमाने पर उपयोग की योजना पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय का लक्ष्य है कि AI आधारित डिजिटल सिस्टम के जरिए यात्रियों को बेहतर सुविधा, निगरानी और सहायता उपलब्ध कराई जाए। सम्मेलन का समापन समावेशी विकास, जवाबदेह शासन और तकनीक-सक्षम कल्याणकारी व्यवस्था के साझा संकल्प के साथ हुआ। मंत्रालय को उम्मीद है कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव और विचार-विमर्श विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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