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बिहार में सीएम और भविष्य की राजनीति

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बिहार की सेवा अपने परिवार से बढ़कर की है । उनके लिए पूरा बिहार ही उनका परिवार है

जदयू की ये 85 सीट भाजपा के 89 पर बहुत ज्यादा भारी

आचार्य विनोबा भावे जी का भूदान आंदोलन सफल रहा ।

जहां जॉर्ज फर्नांडीज जी को अपना नेता दिल से माना

सत्य प्रकाश मिश्रा
जदयू नेता के निजी विचार-

हर मीडिया एक नाम आगे बढ़ा रहा है । लगता है अप्रैल के महीने के आते आते तक नामों की संख्या बढ़ती जाएगी
सीएम जदयू से आखिर क्यों नहीं हो । भाजपा से सीएम होगा ये बात अचानक आई कहां से । इसको मीडिया ने जोर पकड़ाया है कि सीएम भाजपा से होगा । इसका माने ये खबर सुनियोजित डाली गई है या डलवाई गई है । जदयू के पास 85 सीट है और भाजपा के पास 89 सीट । चार ही सीट ज्यादा है लेकिन जदयू 4 सीट कम इसलिए है क्योंकि उसे उन सीटों को भी लड़ना पड़ता है जहां मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं और भाजपा के कारण मुस्लिम वोट जदयू को कितना मिलता है ये सबको पता है । इसलिए अब समझिए कि जदयू की ये 85 सीट भाजपा के 89 पर बहुत ज्यादा है और भारी है ।


एक समय था कि देश में कोई सेकुलर दल भाजपा को छूना भी पसंद नहीं करता था । उसके नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने से भी बचता था । ये दौर 94 के बाद का है समता पार्टी पहला ऐसा सेकुलर दल हुआ जिसने भाजपा से गठबंधन किया और इस तरह एनडीए बना । उसके बाद ममता बनर्जी भी एनडीए में सरकार में रहीं समता पार्टी के जुड़ने से कई और दल भाजपा के साथ आए । शरद यादव जी का जनता दल भी साथ आया । रामबिलास जी का दल लोजपा भी साथ आया । माने अकेले समता पार्टी के जुड़ जाने से देश में भाजपा का विस्तार हुआ और पहली बार केंद्र में अटल जी के नेतृत्व में एक गैर कांग्रेशु गठबंधन की सरकार ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा किया । लोगों ने उसे एक कट्टर हिंदूवादी पार्टी के बजाय अब एक सामान्य अन्य राजनीतिक पार्टी के रूप में स्वीकार किया जिसका सिर्फ राम मंदिर से नहीं बल्कि विकास के अलग अलग मुद्दे से पहचान बनी ।
इसलिए भाजपा को बिहार के संदर्भ में ये बात पूरी तरह समझनी होगी कि यदि वो ही हर राज्य में अपना सीएम चाहती है तो भविष्य में उसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है । क्योंकि यदि भाजपा अन्य वैचारिक दलों को मुख्य जगह नहीं देगी तो गठबंधन का अर्थ सिर्फ इतना रह जाएगा कि आप उसके साथ हैं वो आपके साथ नहीं उसके सामने छोटी पार्टियों के वैचारिक पटल पर भी विकास संभव नहीं । इसलिए भाजपा को ये बात समझनी चाहिए कि वो तबतक ज्यादा मजबूर है जब उसके गठबंधन के दलों के नेता मुख्य रूप से नेतृत्व में होंगे । इसलिए बिहार में गठबंधन के साथी का सीएम बनाकर भाजपा को देश में मेसेज देना ही चाहिए कि एनडीए का मकसद सबका साथ सबके विकास का सही मंच है । सभी का सम्मान ही उसे देश में तथा अन्य राज्यों में भी ज्यादा विस्तार और लंबे समय तक मजबूत रखेगा
जाति आधारित प्रतिनिधत्व भी सबको तो नहीं दिया जा सकता है । एक ही जाति का कोई एक सीएम हो सकता है या फिर 2 डिप्टी सीएम । इससे तो तीन जाति ही तो एड्रेस होगी । नीतीश कुमार जी जाति के नेता तो बिल्कुल नहीं हैं वो बिहार के पूरी जमात के नेता हैं । इसलिए भविष्य में बिहार में किसी ऐसे नेता को ढूंढना होगा जो जाति के नेता नहीं हों वो पूरे बिहार के नेता हों । उनमें बिहार के नेता होने की भी सभी गुण और संभावनाएं हो । नीतीश कुमार जी शिक्षा से इंजीनियर हैं । समाजवादी धारा की सोच में पले बढ़े और वैचारिक पटल पर एक न्यायवादी राष्ट्रनेता हैं । बिहार कम से कम इतना शिक्षित और वैचारिक नेता का हकदार तो जरूर है ।

इसलिए सबकी राय में बिहार की कल्पना नीतीश कुमार जी के बगैर करना मुश्किल है, उन्होंने बिहार की सेवा अपने परिवार से बढ़कर की है । उनके लिए पूरा बिहार ही उनका परिवार है । अबतक जो नाम चल रहे है वो नीतीश कुमार जी के सामने कहीं नहीं टिकते ।

बिहार के भविष्य का सवाल है । इसलिए बहुत सोच समझ कर एक काबिल ,शिक्षित और जिनकी छवि उदारवादी हो व्यवहार में न्यायवादी हो बिहार को वैसा नेता और नेतृत्व मिले । किसी जाति का सिर्फ नेतृत्व बिहार को कम से कम नहीं चाहिए
बिहार में सदैव सभी जातियों का सम्मान है । बिहार देश का पहला ऐसा राज्य है जहां समाजवाद , समता मूलक समाज निर्माण की धारा चली । जहां स्वामी सहजानंद जी का जमींदारी उन्मूलन की फसल लहलहाई । जहां आचार्य विनोबा भावे जी का भूदान आंदोलन सफल रहा । सोचिए जहां जॉर्ज फर्नांडीज जी को अपना नेता दिल से माना । ये वो बिहार है जहां जाति एक सच्चाई है लेकिन सिर्फ जाति ही सच्चाई नहीं है उसपर राजनीतिक विचारों का झंडा ज्यादा जरूरी है

भाजपा देश में मजबूत है बिहार में भी मजबूत है लेकिन उसे अपने मजबूत होते हुए इतिहास में जरूर देखना चाहिए । कमल के साथ बाकी दल यदि मुख्य रूप में मजबूत रहे तभी कमल अपनी छंटा बिखेरने में लगातार कामयाब होगा, इसलिए बिहार में बुद्ध महावीर के बिना बाकी कल्पना संभव नहीं ।

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Ib News
Author: Ib News

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