बच्चों को नशे से बचाने के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, सभी स्कूलों में नई गाइडलाइन लागू
अमित शाह की बैठक के बाद बड़ा फैसला, स्कूलों के आसपास नशा बेचने पर सख्ती
2029 तक नशा मुक्त भारत का रोडमैप, स्कूलों से शुरू होगी बड़ी मुहिम
स्कूलों को बनाया जाएगा नशा विरोधी अभियान का केंद्र, राज्यों को निर्देश जारी
अरुण कुमार
नई दिल्ली- नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को तेज़ी से आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को संयुक्त मार्गदर्शिका जारी की है। यह दिशा-निर्देश तीन-वर्षीय कार्ययोजना के तहत स्कूलों में मिशन मोड में लागू किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को नशे से दूर रखना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों और युवाओं में नशीले पदार्थों का बढ़ता उपयोग अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौती बन चुका है, जिसे रोकने के लिए स्कूलों को प्रमुख भूमिका दी गई है।
नशीले पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग पर हाल ही में अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित नार्को‑समन्वय केंद्र (NCORD) की 9वीं शीर्ष बैठक में व्यापक चर्चा हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वर्ष 2029 तक नशा मुक्त भारत का रोडमैप तैयार किया जाए, सभी मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करें, समयबद्ध समीक्षा तंत्र स्थापित किया जाए और स्कूलों को जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन का केंद्र बनाया जाए।
इस बैठक में स्कूलों के लिए बड़े फैसले लिये गये हैं जिसमे 500 मीटर नशा-मुक्त क्षेत्रतीन-वर्षीय कार्ययोजना में कई अहम प्रावधान शामिल हैं। स्कूलों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को नशा-मुक्त घोषित किया जाएगा और विद्यालय प्रमुख / नोडल शिक्षक उल्लंघन की सूचना देंगे,पुलिस और स्थानीय प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी होगी ये निर्देश सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में लागू होगा।

कार्ययोजना के तहत स्कूलों में निम्न कार्यक्रम लागू होंगे जिसमे नशा विरोधी जागरूकता अभियान. छात्रों के लिए परामर्श सेवाएं, निवारक शिक्षा का पाठ्यक्रम में समावेश और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम के साथ साथ शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण, स्कूल प्रमुखों का क्षमता विकास एवं नोडल शिक्षक नियुक्ति की जायेगी ताकि छात्र सहभागिता में सहपाठी नेतृत्व कार्यक्रम, छात्र क्लब और पोस्टर और रचनात्मक प्रतियोगिताएं जैसे अभियान होंगे।
सरकार ने कार्ययोजना के लिए तीन स्तरों पर निगरानी ढांचा बनाया है पहला विद्यालय स्तर, दुसरा जिला स्तर पर और तीसरा राज्य स्तर होगा इसमें स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं वह नोडल अधिकारी नियुक्त करें, सभी स्कूलों तक योजना को पहुंचाएं और निगरानी तंत्र स्थापित करें जिससे कि समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस पहल का उद्देश्य है बच्चों को नशे से बचाना,स्कूलों को सुरक्षित बनाना,नशा-मुक्त समाज का निर्माण करना है। सरकार का मानना है कि यदि स्कूल स्तर पर रोकथाम शुरू की जाए तो नशे के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाया जा सकता है।
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