कुल्लू
Malana में CBN का जन संवाद: अवैध भांग की खेती छोड़ने और नशामुक्ति पर जोर,भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मलाना गांव में 6 अक्टूबर 2026 को ‘जन संवाद’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम ‘युवा रक्षा’ पहल के तहत निवारक जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और अवैध भांग की खेती से प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक एवं टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं, स्थानीय समुदाय और स्कूली बच्चों को भांग, चरस और हशीश ऑयल के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। इसके साथ ही ग्रामीणों को अवैध भांग की खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसल प्रणालियों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल टिकाऊ आजीविका अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

‘नशा मुक्त भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की पहल
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अनुसार, मलाना में आयोजित यह जन संवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशा मुक्त भारत’ के विजन और नशामुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक निवारक पहल है। इसका उद्देश्य केवल मादक पदार्थों के खिलाफ जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए व्यावहारिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ विकल्प तलाशना भी है, जहां अवैध भांग की खेती लंबे समय से स्थानीय अर्थव्यवस्था और जीवन-शैली से जुड़ी रही है। CBN ने कहा कि लगातार जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और स्थानीय समुदाय के सहयोग के जरिए नशीली दवाओं की मांग को कम करने तथा वैकल्पिक आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कुल्लू जिले का मलाना गांव अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक सामुदायिक संस्थाओं के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र लंबे समय से अवैध भांग उत्पादन से भी जुड़ा रहा है। ऐसे में यहां नशामुक्ति और वैकल्पिक आजीविका से जुड़े प्रयासों का महत्व बढ़ जाता है। CBN के जन संवाद में इसी स्थानीय संदर्भ को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों से सीधे बातचीत की गई और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया।
जन संवाद के दौरान CBN की टीम ने ग्रामीण युवाओं और आम लोगों को भांग, चरस और हशीश ऑयल के सेवन से होने वाले संभावित स्वास्थ्य एवं सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक किया। अभियान का मुख्य संदेश था कि नशे से बचाव केवल कानून प्रवर्तन का विषय नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, युवा, स्कूल और पूरा समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।
अवैध भांग की खेती के बजाय वैकल्पिक आजीविका पर जोर
जन संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अवैध भांग की खेती के स्थान पर वैकल्पिक आजीविका विकसित करने को लेकर चर्चा रहा।CBN ने ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा समर्थित वैकल्पिक फसलों और आजीविका मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसमें स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी गतिविधियों की पहचान करने पर जोर दिया गया जिनसे ग्रामीण परिवारों को नियमित एवं टिकाऊ आय मिल सके।

सेब की खेती में कठिनाइयों पर ग्रामीणों ने रखी बात
जन संवाद के दौरान ग्रामीणों ने वैकल्पिक कृषि व्यवस्था अपनाने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को भी सामने रखा। विशेष रूप से सेब की खेती से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने संपर्क व्यवस्था, बाजार तक पहुंच और कृषि उत्पादों के लिए उचित मूल्य मिलने से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा। यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि किसी भी वैकल्पिक फसल को सफल बनाने के लिए केवल खेती की तकनीक ही पर्याप्त नहीं होती। उत्पादन के साथ-साथ सड़क संपर्क, बाजार, भंडारण, परिवहन और उचित मूल्य भी जरूरी हैं।
मधुमक्खी पालन और पशुपालन से आय बढ़ाने पर चर्चा
मलाना में वैकल्पिक आजीविका के संभावित क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में इन गतिविधियों को कृषि के साथ जोड़कर अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित किया जा सकता है। CBN के जन संवाद का उद्देश्य स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे विकल्पों की संभावनाओं पर समुदाय के साथ बातचीत करना रहा, जिनसे ग्रामीणों को अवैध गतिविधियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सके।
पर्यटन भी बन सकता है वैकल्पिक आय का माध्यम
मलाना की विशिष्ट सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को देखते हुए पर्यटन आधारित आजीविका की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। स्थानीय स्तर पर पर्यटन से जुड़े अवसरों को विकसित करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि पर्यटन गतिविधियां पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक सामुदायिक व्यवस्थाओं के अनुरूप टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ें।
जन संवाद में अवैध भांग की खेती के स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव को भी चर्चा का विषय बनाया गया। ग्रामीणों के साथ वनों की कटाई और पारंपरिक चरागाह क्षेत्रों में कमी जैसी समस्याओं पर भी बातचीत हुई। विशेष रूप से भेड़ और बकरियों के लिए पारंपरिक रूप से उपलब्ध चरागाह क्षेत्रों में कमी को ग्रामीण आजीविका से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में सामने रखा गया।इससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध खेती का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था या नशीले पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पर्यावरण, पशुपालन, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ सकता है।
जन संवाद के दौरान CBN अधिकारियों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों को आमने-सामने बातचीत का अवसर मिला। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी स्थानीय समस्याओं और वैकल्पिक आजीविका विकसित करने में आने वाली चुनौतियों को सामने रखा। CBN टीम ने भी टिकाऊ विकास, निवारक जागरूकता और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों को लेकर समुदाय के साथ विचार-विमर्श किया।
ग्रामीणों ने लिया अवैध भांग की खेती को हतोत्साहित करने का संकल्प
कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पहलू समुदाय द्वारा लिया गया सामूहिक संकल्प रहा। जन संवाद के दौरान समुदाय के सदस्यों ने आगामी कृषि मौसम में मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने और अवैध भांग की खेती को हतोत्साहित करने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने वैकल्पिक आजीविका और फसल विकास के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
स्कूली बच्चों ने भी लिया नशामुक्ति का संकल्प
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों की भागीदारी भी रही। बच्चों ने नशे से दूर रहने और स्वस्थ एवं नशामुक्त समुदाय के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। युवाओं और स्कूली बच्चों को अभियान से जोड़ना निवारक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि शुरुआती उम्र में नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता भविष्य में नशे की मांग को कम करने में मदद कर सकती है।
NDPS नीति और वैकल्पिक विकास पर जोर
CBN के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) नीति, 2012 तथा Narcotics Control 2026-2029 Vision Document के तहत अवैध भांग की खेती से प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक विकास को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों से जुड़ी है। इस दृष्टिकोण में नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका और विकास के अवसर तैयार करने पर जोर दिया जाता है।
‘युवा रक्षा’ पहल का उद्देश्य
CBN की ‘युवा रक्षा’ पहल का उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें नशामुक्त एवं स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करना है। मलाना में जन संवाद इसी व्यापक निवारक दृष्टिकोण का स्थानीय स्तर पर एक उदाहरण रहा, जिसमें जागरूकता के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की गई।
मलाना का जन संवाद यह संकेत देता है कि नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान को केवल कार्रवाई और प्रतिबंध तक सीमित रखने के बजाय जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और आर्थिक विकल्पों के साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यदि स्थानीय समुदायों को खेती, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, पर्यटन और अन्य गतिविधियों के माध्यम से स्थायी आय के विकल्प उपलब्ध होते हैं, तो अवैध गतिविधियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
मलाना में आयोजित जन संवाद के माध्यम से केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने नशीले पदार्थों के खिलाफ समुदाय आधारित निवारक रणनीति पर जोर दिया। कार्यक्रम में युवाओं, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की भागीदारी के साथ नशे से दूर रहने, अवैध भांग की खेती को हतोत्साहित करने और वैकल्पिक आजीविका के अवसर तलाशने का संकल्प लिया गया। CBN के अनुसार, यह पहल वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य निवारक जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और अवैध खेती के टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देना है।
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