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स्वावलंबन और स्वदेशी आंदोलन ही मंदी से लड़ेगा: डॉ. दीपेंद्र चाहर भारतीय मजदूर संघ (BMS)

Self-reliance and the Swadeshi movement alone will combat the economic slowdown: Dr. Deependra Chahar, Bharatiya Mazdoor Sangh (BMS)

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6.6% ग्रोथ के अनुमान के बीच BMS का जोर—विदेशी निर्भरता घटाने, बचत बढ़ाने और श्रमिकों को रोजगार देने वाला बनने का आह्वान

नई दिल्ली:

स्वावलंबन और स्वदेशी आंदोलन ही मंदी से लड़ेगा: डॉ. दीपेंद्र चाहर भारतीय मजदूर संघ (BMS), भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि के बावजूद वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और संभावित विकास दर में कमी को लेकर बहस तेज है। ऐसे समय में भारतीय मजदूर संघ (BMS), दिल्ली प्रदेश ने आर्थिक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए स्वावलंबन और स्वदेशी को महत्वपूर्ण रास्ता बताया है।

BMS दिल्ली प्रदेश के महामंत्री डॉ. दीपेंद्र चाहर का कहना है कि आर्थिक मंदी या धीमी होती विकास दर से मुकाबले की असली ताकत केवल सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक या विदेशी निवेशक नहीं, बल्कि स्वावलंबी श्रमिक और मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था हो सकती है। उनके मुताबिक भारत को अपनी अर्थव्यवस्था की विदेशी निर्भरता कम करते हुए घरेलू उत्पादन, रोजगार, कौशल और बचत को बढ़ावा देना होगा।

7.7% से 6.6% ग्रोथ का अनुमान, चिंता क्यों?

डॉ. चाहर के मुताबिक भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर एक तरफ मजबूत तस्वीर सामने आती है, वहीं दूसरी तरफ विकास दर में संभावित गिरावट का अनुमान चिंता पैदा करता है। महंगे तेल, कमजोर रुपये, वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि धीमी पड़ती ग्रोथ का सबसे ज्यादा असर किस वर्ग पर पड़ेगा?

BMS का तर्क है कि इसका सीधा प्रभाव रोजगार, वेतन, महंगाई और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आय पर पड़ सकता है।

विदेशी निर्भरता कम करना ही स्वदेशी का मूल विचार

डॉ. दीपेंद्र चाहर का कहना है कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों का एक बड़ा कारण भारत की कुछ क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता भी है। उनके अनुसार अमेरिका की टैरिफ नीतियां, पश्चिम एशिया में संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करती हैं। वह कहते हैं कि स्वदेशी का अर्थ विदेशी वस्तुओं का पूरी तरह बहिष्कार करना नहीं, बल्कि घरेलू उत्पादों और भारतीय उत्पादन को प्राथमिकता देना है।

उनके मुताबिक दत्तोपंत ठेंगड़ी की विचारधारा में स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा विचार है।

स्वदेशी खरीद से घरेलू अर्थव्यवस्था को कैसे फायदा?

डॉ. चाहर ने स्वदेशी को समझाने के लिए रोजमर्रा की खरीदारी का उदाहरण दिया। उनका तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति विदेशी उत्पाद खरीदता है तो खर्च का एक हिस्सा देश से बाहर चला जाता है। इसके विपरीत भारतीय उत्पाद खरीदने पर पैसा घरेलू उत्पादन श्रृंखला में अधिक समय तक घूमता है। कपास किसान से लेकर कताई मजदूर, बुनकर, दर्जी और दुकानदार तक कई लोगों को इससे रोजगार और आय मिलती है। इसीलिए उनके अनुसार स्वदेशी उत्पाद खरीदना केवल देशभक्ति का विषय नहीं बल्कि घरेलू रोजगार और आर्थिक गतिविधि को मजबूत करने का माध्यम भी है।

कमजोर रुपया और महंगा तेल: श्रमिक पर सबसे ज्यादा असर

डॉ. चाहर का कहना है कि रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की महंगाई का असर कई स्तरों पर दिखाई देता है। तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है। इससे वस्तुओं की कीमतों पर दबाव आता है और अंततः महंगाई बढ़ सकती है। उनके अनुसार महंगाई का सबसे ज्यादा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग पर पड़ता है। संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते जैसी कुछ सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन असंगठित क्षेत्र, दिहाड़ी मजदूरों और गिग वर्कर्स के लिए महंगाई का सामना करना ज्यादा मुश्किल होता है।

‘हॉट मनी’ के बजाय घरेलू पूंजी पर जोर

डॉ. चाहर ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी पूंजी तेजी से भारतीय बाजार में आ सकती है और उतनी ही तेजी से बाहर भी जा सकती है। इसलिए भारत को दीर्घकालिक और स्थिर पूंजी पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने भारतीय प्रवासियों से पूंजी जुटाने के संभावित विकल्पों के साथ-साथ घरेलू बचत और घरेलू निवेश को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका विचार है कि यदि भारतीय परिवार अपनी बचत का अधिक हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था और भारतीय उत्पादों से जोड़ें तो यह भी एक तरह का ‘स्वदेशी बॉन्ड’ बन सकता है।

6.6% ग्रोथ में रोजगार पर क्या असर होगा?

डॉ. चाहर के मुताबिक विकास दर में कमी का संभावित असर रोजगार सृजन पर भी पड़ सकता है। उनका तर्क है कि यदि कंपनियों को आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है तो वे स्थायी नियुक्तियों की जगह ठेकेदारी या सीमित भर्ती को प्राथमिकता दे सकती हैं। ऐसे माहौल में श्रमिकों के सामने केवल नौकरी खोजने के बजाय रोजगार पैदा करने की क्षमता विकसित करने का विकल्प भी होना चाहिए।

BMS का जोर इसी विचार पर है कि श्रमिक केवल नौकरी मांगने वाला न बने, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वयं रोजगार देने वाला उद्यमी भी बन सके।

CGTMSE और स्वरोजगार की संभावनाएं

डॉ. चाहर ने छोटे उद्यमों और स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक यदि किसी ITI प्रशिक्षित युवा के पास वेल्डिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, एसी रिपेयरिंग या सिलाई जैसे कौशल हैं तो वह छोटे स्तर से अपना कारोबार शुरू कर सकता है और आगे अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकता है। उनके अनुसार यही आर्थिक स्वावलंबन है—जहां कौशल को रोजगार में बदलने के साथ दूसरे लोगों के लिए भी काम के अवसर पैदा किए जाते हैं।

डॉ. दीपेंद्र चाहर ने दिल्ली प्रदेश के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से पांच प्रमुख अपील की हैं।
1. स्वदेशी अपनाएं

त्योहारों पर विदेशी सजावटी सामान की जगह स्थानीय कारीगरों के उत्पाद, भारतीय कपड़े, जूते-चप्पल और मिट्टी के दीये खरीदने की अपील की गई है।

2. बचत को आदत बनाएं

परिवारों को कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर Emergency Fund तैयार करने और e-Shram, EPFO तथा ESI जैसी व्यवस्थाओं से संबंधित रिकॉर्ड अपडेट रखने की सलाह दी गई है।

3. हुनर को प्राथमिकता दें

डॉ. चाहर का कहना है कि बदलती अर्थव्यवस्था में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। युवाओं को रोजगार बाजार की जरूरत के मुताबिक नए कौशल सीखने चाहिए।

4. अफवाहों से बचें

सोशल मीडिया पर बैंकिंग व्यवस्था या अर्थव्यवस्था को लेकर फैलने वाली अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपील की गई है।

5. श्रम का सम्मान करें

घर में काम करने वाले कर्मचारी, ऑटो चालक, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य श्रमिकों को समय पर भुगतान और सम्मान देने की अपील की गई है। उनका कहना है कि श्रमिक की खरीद क्षमता बढ़ेगी तो घरेलू मांग और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि चुनौती चाहे वैश्विक परिस्थितियों से पैदा हुई हो, लेकिन उसका मुकाबला भारत के भीतर मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर नागरिकों के जरिए किया जा सकता है। “स्वावलंबी भारत और स्वदेशी भारत” के संकल्प के साथ मौजूदा आर्थिक चुनौतियों को अवसर में बदलने का आह्वान इसी सोच का हिस्सा है।

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Ib News
Author: Ib News

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