डॉ दीपक शर्मा
नई दिल्ली
(RRU)राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में शुरू होगा वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा में मास्टर्स का दूसरा बैच, भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के भारतीय कॉरपोरेट मामलों के संस्थान (IICA) के सहयोग से वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा में मास्टर्स (MFES) कार्यक्रम का दूसरा बैच नवंबर 2026 में शुरू किया जाएगा। यह कार्यक्रम अपने पहले बैच की सफलता के बाद शुरू हो रहा है, जिसमें बैंकिंग, कानून प्रवर्तन, जांच, शिक्षा, उद्यमिता और कानूनी सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों के 40 से अधिक पेशेवरों ने भाग लिया था।
कामकाजी पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह एक वर्षीय हाइब्रिड मास्टर्स प्रोग्राम प्रतिभागियों को अपनी नौकरी या पेशेवर जिम्मेदारियां जारी रखते हुए वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ ज्ञान और व्यावहारिक कौशल हासिल करने का अवसर देता है।
वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा पर क्यों बढ़ रहा है जोर?
तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में वित्तीय सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था की मजबूती राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। डिजिटल तकनीक, फिनटेक, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स और सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों के विस्तार के साथ वित्तीय अपराधों के स्वरूप में भी बदलाव आया है। वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण, डिजिटल संपत्तियों से जुड़े अपराध और टेक्नोलॉजी आधारित आर्थिक अपराध कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नियामकों और वित्तीय संस्थानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। ऐसे माहौल में ऐसे विशेषज्ञ पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ रही है, जो वित्तीय एवं आर्थिक अपराधों की पहचान, रोकथाम, जांच और उनसे निपटने की आधुनिक रणनीतियों को समझते हों।

RRU के विशेषज्ञों ने बताया कार्यक्रम का महत्व
मुंबई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में आयोजित कार्यक्रम में RRU के स्कूल ऑफ क्रिमिनल लॉ एंड मिलिट्री लॉ के निदेशक सुनील कविश्वर ने वित्तीय प्रणाली की मजबूती और उसकी समग्रता की सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वित्तीय अपराध अब पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं हैं। अपराधी नेटवर्क वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, आतंकवादी वित्तपोषण, वित्तीय धोखाधड़ी और तकनीक आधारित वित्तीय अपराधों के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते कानून लागू करने वाली एजेंसियों, नियामक संस्थाओं और वित्तीय क्षेत्र के सामने नई और जटिल चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
वित्तीय सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों का वैश्विक मंच तैयार करने की पहल
RRU वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा के उभरते क्षेत्र में क्षमता निर्माण, विशेष प्रशिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक वैश्विक मंच विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। MFES कार्यक्रम में केवल अकादमिक विशेषज्ञता पर ही जोर नहीं दिया जाता, बल्कि अनुभवी प्रैक्टिशनर्स और कामकाजी पेशेवरों को भी जोड़ा जाता है। इन विशेषज्ञों का फील्ड अनुभव कार्यक्रम के शिक्षण और प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद करता है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को वित्तीय एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े वास्तविक मामलों और मौजूदा चुनौतियों की बेहतर समझ देना है।
विशेष पेशेवर कैडर तैयार करने पर जोर
RRU के टीचिंग कम रिसर्च ऑफिसर हर्षित सिंह ने वित्तीय एवं आर्थिक सुरक्षा की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष प्रशिक्षित पेशेवर कैडर तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसे प्रशिक्षित विशेषज्ञ भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने, संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और देश के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह विशेषज्ञता वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता में भारत के योगदान को भी मजबूत करने में मदद कर सकती है।
‘विकसित भारत @2047’ से भी जुड़ा कार्यक्रम
MFES कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के व्यापक विजन के अनुरूप भी देखा जा रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से अधिक जुड़ रही है, वैसे-वैसे मजबूत वित्तीय संस्थानों, सुरक्षित डिजिटल वित्तीय प्रणालियों और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता बढ़ रही है। MFES कार्यक्रम का लक्ष्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है जो वित्तीय प्रणालियों की सुरक्षा, संस्थागत क्षमता निर्माण और उभरते आर्थिक एवं सुरक्षा खतरों से निपटने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए खुला दूसरा बैच
MFES का दूसरा बैच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए खुला है। इसके माध्यम से विभिन्न देशों, क्षेत्रों और पेशेवर पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभागियों को वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े समकालीन मुद्दों पर अध्ययन और विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) नॉलेज पार्टनर के रूप में जुड़ा है। इससे वित्तीय सुरक्षा, बीमा क्षेत्र, नियामकीय व्यवस्था और आर्थिक अपराधों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी।
हाइब्रिड मोड में होगा एक वर्षीय मास्टर्स प्रोग्राम
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसका हाइब्रिड मोड शामिल है। इसे विशेष रूप से कामकाजी पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। प्रतिभागियों को अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां जारी रखते हुए अकादमिक अध्ययन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में विशेष रूप से इन क्षेत्रों से जुड़ी समकालीन चुनौतियों को समझने पर जोर रहेगा:
- वित्तीय अपराध
- आर्थिक अपराध
- डिजिटल वित्तीय अपराध
- वर्चुअल डिजिटल एसेट्स
- वित्तीय धोखाधड़ी
- आतंकवादी वित्तपोषण
- नियामकीय चुनौतियां
- वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा
- जांच और कानून प्रवर्तन
- आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा
पहले बैच में 40 से अधिक पेशेवरों ने लिया हिस्सा
MFES कार्यक्रम का पहला बैच सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इसमें बैंकिंग, कानून प्रवर्तन, जांच, शिक्षा, उद्यमिता और कानूनी सेवाओं सहित अलग-अलग क्षेत्रों के 40 से अधिक पेशेवरों ने हिस्सा लिया। पहले बैच से मिले अनुभवों के आधार पर अब दूसरा बैच शुरू किया जा रहा है, जिसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ संवाद और वर्तमान वित्तीय एवं आर्थिक सुरक्षा चुनौतियों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
इच्छुक पेशेवर कैसे कर सकते हैं आवेदन?
MFES के दूसरे बैच में शामिल होने के इच्छुक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पेशेवर राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के आधिकारिक एडमिशन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और क्षेत्र के विशेषज्ञों से संवाद उपलब्ध कराना है, ताकि वे वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
#RRU #MFES #FinancialSecurity #EconomicSecurity #FinancialCrime #CyberSecurity #IICA #IRDAI #SkillDevelopment #NationalSecurity #India2047









