अरुण कुमार
नई दिल्ली
Ramleela Maidan: INDIA गठबंधन की रैली- राहुल गांधी ने निकाला ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च, BJP ने भी किया पलटवार, दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत बड़ी रैली आयोजित की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों सहित कई विपक्षी दलों के नेता इसमें शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा की लड़ाई बताया, जबकि भाजपा ने रैली के उद्देश्य और समय पर सवाल उठाए।

रैली में कितने लोग पहुंचे? विपक्ष और पुलिस के आंकड़ों में अंतर
रैली में भीड़ की संख्या को लेकर आयोजकों और पुलिस के अनुमान अलग-अलग रहे। INDIA गठबंधन के नेताओं ने लगभग 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद जताई थी, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान करीब 50 हजार लोगों का था। रामलीला मैदान की व्यवस्था और बैठने की क्षमता को देखते हुए भीड़ के वास्तविक आंकड़े को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक संख्या सामने नहीं आई है।

रविवार सुबह से ही दिल्ली के अलग-अलग इलाकों और दूसरे राज्यों से आए कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंचने लगे थे। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से समर्थकों के आने की खबरें आईं। दोपहर तक मैदान और मार्च के रास्ते पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिखाई दिए।

राहुल गांधी के नेतृत्व में निकला मार्च
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च का नेतृत्व किया। विपक्षी नेता पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एकत्र हुए। इसके बाद वे खुले वाहन से मिंटो रोड और कनॉट प्लेस की ओर पहुंचे और वहां से रामलीला मैदान तक मार्च किया।

इस दौरान सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, हेमंत सोरेन और अन्य विपक्षी नेता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची और SIR के खिलाफ नारे लगाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

किस नेता ने क्या कहा?
राहुल गांधी: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है। उन्होंने लोगों से वोट और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। मार्च के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस में भाजपा ने दुकानदारों की दुकानें जबरन बंद करवाईं। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई।
मल्लिकार्जुन खड़गे: कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर भी राजनीतिक निशाना साधा।
अखिलेश यादव: समाजवादी पार्टी प्रमुख ने मतदाता सूची में नामों से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया और उत्तर प्रदेश की सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के वोट कटने की शिकायतें हैं, उन्हें भी इस विरोध में शामिल होना चाहिए।
तेजस्वी यादव: RJD नेता ने अपने संबोधन में रामलीला मैदान को महाभारत के कुरुक्षेत्र से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री मोदी के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया।
अन्य विपक्षी नेता: ममता बनर्जी, प्रियंका गांधी, फारूक अब्दुल्ला, वामपंथी दलों के नेताओं और अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों ने भी रैली में भाग लिया। विपक्षी नेताओं ने मतदाता अधिकारों, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही को प्रमुख मुद्दा बनाया।

भाजपा ने रैली पर क्या कहा?
भाजपा ने विपक्षी रैली पर तीखा पलटवार किया। भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इसे राजनीतिक नाटक बताते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस आयोजन के जरिए राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि- राहुल गांधी ने सिख दंगों के जख्म पर नमक छिड़कने के लिए आज 1 नवंबर को ही दिल्ली में बड़ा जलसा रखा है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1 नवंबर को रैली आयोजित करने के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह तारीख 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी से जुड़ी है और कांग्रेस को इस संवेदनशील दिन पर राजनीतिक कार्यक्रम नहीं करना चाहिए था। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी रैली के आयोजन पर सवाल उठाए।

भाजपा ने निकाली अलग मार्च
विपक्ष की रैली के जवाब में भाजपा ने पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर तक 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की याद में अलग मार्च आयोजित किया। इसमें हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और भाजपा के अन्य नेता शामिल हुए। भाजपा ने कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही की मांग की।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, यातायात पर असर

रैली के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। मैदान और मार्च मार्ग पर हजारों पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। निगरानी के लिए CCTV कैमरे, ड्रोन और अन्य सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन भी लागू किए गए।
रामलीला मैदान की रैली ने SIR, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर केंद्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है, जबकि भाजपा ने विपक्ष के आरोपों और रैली के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। अब निगाहें चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और INDIA गठबंधन के अगले कदमों पर रहेंगी।
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