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नई दिल्ली: संविधान हत्या दिवस पर संस्कृति मंत्रालय का विशेष आयोजन, गजेंद्र सिंह शेखावत बोले— लोकतंत्र भारत के डीएनए में है,

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हुआ कार्यक्रम, ‘लोकतंत्र अमर रहे’ प्रदर्शनी और डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी बनी आकर्षण का केंद्र

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आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हुआ कार्यक्रम, ‘लोकतंत्र अमर रहे’ प्रदर्शनी और डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी बनी आकर्षण का केंद्र

डॉ दीपक शर्मा

नई दिल्ली: संविधान हत्या दिवस पर संस्कृति मंत्रालय का विशेष आयोजन, गजेंद्र सिंह शेखावत बोले— लोकतंत्र भारत के डीएनए में है, संस्कृति मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अपने परिसर में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संगठन सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों, नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि लोकतंत्र भारत की आत्मा और उसके डीएनए का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उन गुमनाम लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करने का अवसर है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का सम्मान, स्वतंत्र मीडिया, नागरिक गरिमा और संविधान की सर्वोच्चता का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि आपातकाल ने देश को यह समझने का अवसर दिया कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की शुरुआत “Long Live Democracy” (लोकतंत्र अमर रहे) प्रदर्शनी के अवलोकन से हुई। इस प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रेस स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव को दर्शाया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन 24 जून 2026 को सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने किया था, जिसमें विभिन्न विद्यालयों और गैर-सरकारी संगठनों के एक हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर संविधान हत्या दिवस पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम में “डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी” (DDR) को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। यह राष्ट्रीय पहल भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े जिला स्तर के नायकों, घटनाओं और ऐतिहासिक स्थलों का डिजिटल दस्तावेजीकरण करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सीसीआरटी ने इस परियोजना में स्थानीय इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों और क्षेत्रीय आंदोलनों से जुड़ी कहानियों को संकलित कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

समारोह में स्वतंत्रता सेनानी शेषराव लक्ष्मणराव खोत और येदुल्ला सूर्यनारायण रेड्डी के परिवारों को सम्मानित किया गया। साथ ही, रिपॉजिटरी को समृद्ध बनाने वाले शिक्षकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों को भी सम्मान प्रदान किया गया।

प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी के निर्देशन में सीसीआरटी के विद्यार्थियों ने “मौन से आवाज, अंधेरे से सुबह तक” शीर्षक से एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र की दृढ़ता, स्वतंत्रता और जनभागीदारी की भावना को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
आपातकाल के दौरान जेल में रहे वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक राम बहादुर राय ने विशेष व्याख्यान देते हुए उस दौर की चुनौतियों, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और नागरिक अधिकारों के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रव्यापी ‘सेवा पर्व’ पहल के अंतर्गत तैयार की गई कलाकृतियों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। “विकसित भारत के रंग, कला के संग” थीम पर आधारित इस पहल का उद्देश्य कला और संस्कृति के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रीय गौरव और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल, आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय, संयुक्त सचिव समर नंदा, श्री के.के. मिश्रा तथा सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संविधान हत्या दिवस का यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संवैधानिक मूल्यों की महत्ता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों को स्मरण करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा।

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Author: Ib News

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