2.33 लाख हस्ताक्षरों वाली याचिका लेकर प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे AAP नेता, भाजपा ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
अरुण कुमार
नई दिल्ली:E20 ईंधन नीति पर AAP-BJP आमने-सामने: अरविंद केजरीवाल ने PM से मुलाकात न मिलने का लगाया आरोप, भाजपा ने बताया ‘राजनीतिक नाटक’ देश में प्रस्तावित E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात नहीं मिलने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा, जबकि भाजपा ने उनके आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक ड्रामा करार दिया।

प्रेस वार्ता में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लगभग एक महीने पहले E20 नीति पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
उन्होंने दावा किया कि 2 लाख 33 हजार से अधिक नागरिकों द्वारा हस्ताक्षरित एक याचिका (Petition) लेकर वे प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। केजरीवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री जी, ट्रंप के दबाव में नहीं बल्कि देशहित में फैसला लीजिए। अमेरिका से एथेनॉल खरीदना और देश पर E20 थोपना बंद कीजिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की चिंताओं को सुनने के बजाय संवाद से बच रही है।

भाजपा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस वार्ता में अरविंद केजरीवाल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनकी “राजनीतिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास” है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल स्वयं को IIT स्नातक और उच्च शिक्षित बताते हैं इसके बावजूद वे तकनीकी विषयों पर बिना पर्याप्त तथ्यों और शोध के बयान देते हैं। E20 पर उनके दावे तथ्यात्मक आधार से रहित हैं। यह जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास है। सुधांशु त्रिवेदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन को लेकर केजरीवाल के पुराने बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी वैज्ञानिक विषयों पर बिना पर्याप्त जानकारी के सवाल उठाए थे।
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों से खरीदे जाने वाले गन्ने और अन्य जैविक फसलों से बने एथेनॉल को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन कम करना व हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित करना, सरकार का कहना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ेगी। आम आदमी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों का कहना है कि E20 नीति के प्रभाव पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए।वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव स्पष्ट किए जाएं। यदि एथेनॉल आयात किया जाता है तो इससे आर्थिक और रणनीतिक सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि, इन दावों पर केंद्र सरकार की ओर से इस संदर्भ में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
E20 नीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता, सार्वजनिक विमर्श और नीति के प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।
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