गुजरात: राजकोट में पत्रकार की कथित पुलिस यातना पर NHRC सख्त, गुजरात DGP को नोटिसस नई दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गुजरात के राजकोट में एक पत्रकार की कथित गैरकानूनी गिरफ्तारी और पुलिस यातना से जुड़े मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 22 मार्च 2026 को राजकोट क्राइम ब्रांच पुलिस द्वारा एक पत्रकार को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि पुलिस हिरासत में पत्रकार को निर्वस्त्र कर उल्टा लटकाया गया और शारीरिक यातनाएं दी गईं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने राजकोट सिविल अस्पताल के कर्मचारियों को पीड़ित को भर्ती न करने के लिए धमकाने की कोशिश की। इसके अलावा, पत्रकार को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने और उनका घर गिराने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
एनएचआरसी ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य सत्य पाए जाते हैं, तो यह पीड़ित के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने गुजरात के डीजीपी से दो सप्ताह के भीतर निम्नलिखित बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है:
- मामले की जांच की वर्तमान स्थिति
- संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका
- पीड़ित की स्वास्थ्य स्थिति
- उठाए गए प्रशासनिक या कानूनी कदम
29 मार्च 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित पत्रकार एक ऑनलाइन मीडिया आउटलेट संचालित करते हैं। रिपोर्ट में पुलिस यातना के कारण उन्हें लगी चोटों का विस्तृत विवरण भी सामने आया है। बताया गया है कि गंभीर चोटों के बाद पत्रकार को 23 मार्च 2026 को राजकोट सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार किया गया।
इस घटना ने पुलिस हिरासत में कथित यातना और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई करेगा।
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