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दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में ‘ट्री वॉक’ और संडे बर्ड वॉक, 42 पक्षी प्रजातियों के साथ दिखे 300 से ज्यादा पक्षी

‘Tree Walk’ and Sunday Bird Walk at Delhi’s National Zoological Park: Over 300 birds across 42 species spotted.

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150 से अधिक पेंटेड स्टॉर्क ने बनाया आकर्षण का केंद्र, 40 वृक्ष प्रजातियों का भी हुआ अवलोकन;

नागरिक विज्ञान पहल के तहत आयोजित हुआ कार्यक्रम

IB NEWS

नई दिल्ली:दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में ‘ट्री वॉक’ और संडे बर्ड वॉक, 42 पक्षी प्रजातियों के साथ दिखे 300 से ज्यादा पक्षी, राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (National Zoological Park) में 23 अगस्त 2026 को 11वें संडे बर्ड वॉक के साथ ‘ट्री वॉक @ NZP’ के दूसरे संस्करण का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के दस्तावेजीकरण, निगरानी और संरक्षण के प्रयासों से जोड़ना था।

राष्ट्रीय चिड़ियाघर की यह पहल नागरिक विज्ञान (Citizen Science) को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम लोगों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को शहरी जैव विविधता को करीब से समझने का अवसर प्रदान करती है।

‘ट्री वॉक @ NZP’ का आयोजन सुबह 7 बजे से 10 बजे तक किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन वैज्ञानिक-डी डॉ. सी.आर. मगेष ने किया, जबकि संडे बर्ड वॉक का संचालन पक्षीविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. पारितोष अहमद के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम में प्रकृति प्रेमियों, छात्रों, वन्यजीव फोटोग्राफरों, जैव विविधता शोधकर्ताओं, एनजेडपी इंटर्न, स्वयंसेवकों और संरक्षण में रुचि रखने वाले नागरिकों ने भाग लिया। कुल 25 प्रतिभागियों ने इस प्रकृति अवलोकन कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
प्रकृति सैर के दौरान प्रतिभागियों ने 42 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया। इस दौरान 300 से अधिक पक्षियों को देखा गया। इसके अलावा वॉक के मार्ग में 40 वृक्ष प्रजातियों का भी अवलोकन और पहचान की गई। प्रतिभागियों को पक्षियों और पेड़ों की पहचान के साथ-साथ उनके व्यवहार और पारिस्थितिक महत्व को समझने का व्यावहारिक अवसर मिला।
इस बर्ड वॉक का सबसे खास आकर्षण 150 से अधिक पेंटेड स्टॉर्क (Painted Stork) रहे। जानकारी के अनुसार ये पक्षी अगस्त के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रीय चिड़ियाघर पहुंचे और तालाब के अंदर तथा आसपास मौजूद पेड़ों पर घोंसले बनाना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार पेंटेड स्टॉर्क का आगमन और उनका घोंसला बनाना चिड़ियाघर के आर्द्रभूमि और वृक्ष आवासों के पारिस्थितिक महत्व का एक सकारात्मक संकेत है। घोंसले बनाने की गतिविधि ने प्रतिभागियों, प्रशिक्षुओं, स्वयंसेवकों और नागरिक वैज्ञानिकों को पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार और प्रजनन पारिस्थितिकी को करीब से देखने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के दौरान पक्षीविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. पारितोष अहमद ने ‘रिंगो’ नाम के एक नर पेंटेड स्टॉर्क के बारे में रोचक जानकारी साझा की। बताया कि रिंगो को पिछले चार वर्षों से इसी क्षेत्र में घोंसला बनाते हुए देखा जा रहा है। एनजेडपी के प्रशिक्षु इस पक्षी के व्यवहार और गतिविधियों का आगे भी अध्ययन कर रहे हैं। यह उदाहरण प्रतिभागियों के लिए पक्षियों के व्यवहार, आवास और लंबे समय तक किए जाने वाले वैज्ञानिक अवलोकन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बना।
ट्री वॉक के दौरान प्रतिभागियों को पेड़ों की पहचान के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में बताया गया। इसमें मुख्य रूप से—
  • पत्तियों की आकृति
  • छाल की विशेषताएं
  • फूल
  • फल
  • पेड़ों की कैनोपी संरचना जैसी विशेषताओं के आधार पर विभिन्न वृक्ष प्रजातियों की पहचान करना शामिल था। प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान पेड़ों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न इकोसिस्टम सर्विसेज के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें प्रमुख रूप से—कार्बन का अवशोषण और भंडारण, वायु शुद्धिकरण, तापमान नियंत्रण और मृदा संरक्षण तथा जैव विविधता के लिए आवास उपलब्ध कराना शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में पेड़ स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों को Citizen Science से जोड़ना भी था। प्रतिभागियों को अपने अवलोकनों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने, प्रजातियों की पहचान करने और जैव विविधता से संबंधित डेटा रिकॉर्ड करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई गई। इससे आम नागरिक केवल प्रकृति को देखने वाले दर्शक न रहकर जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में सक्रिय भागीदार बन सकते हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय चिड़ियाघर के निदेशक ने कहा कि पेड़ स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र की नींव हैं। वे बड़ी संख्या में प्रजातियों को सहारा देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि Nature Walks @ NZP जन-जागरूकता बढ़ाने, जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और शहरी वनों एवं हरित क्षेत्रों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने में मदद कर रही हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों, विशेषज्ञों और चिड़ियाघर अधिकारियों के बीच संवादात्मक चर्चा और फीडबैक सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों और अधिकारियों ने सामूहिक तस्वीर भी ली। राष्ट्रीय चिड़ियाघर की ओर से प्रकृति सैर को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के लिए प्रत्येक रविवार को अधिकतम 20 से 25 प्रतिभागियों को शामिल किया जाता है।
राष्ट्रीय चिड़ियाघर के अनुसार अगली प्रकृति सैर 30 अगस्त 2026, रविवार को आयोजित की जाएगी। इस दिन ‘रविवार सरीसृप, उभयचर और मोलस्क वॉक’ के साथ ‘रविवार पक्षी वॉक’ भी आयोजित होगी। प्रकृति सैर में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाता है।

इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित Google Form के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण लिंक प्रत्येक सप्ताह सोमवार से शुक्रवार तक उपलब्ध रहता है और राष्ट्रीय चिड़ियाघर, नई दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट तथा ‘NZP साथी’ मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराया जाता है।

राष्ट्रीय चिड़ियाघर की यह पहल बताती है कि शहरों के भीतर भी जैव विविधता के संरक्षण और अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। 42 पक्षी प्रजातियों, 300 से अधिक पक्षियों और 40 वृक्ष प्रजातियों का अवलोकन न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का विषय रहा, बल्कि इसने नागरिक विज्ञान के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण में आम लोगों की भूमिका को भी रेखांकित किया। वहीं, 150 से अधिक पेंटेड स्टॉर्क का आगमन और उनका घोंसला बनाना राष्ट्रीय चिड़ियाघर के आर्द्रभूमि और वृक्ष आवासों के महत्व को भी सामने लाता है।

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Author: Ib News

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