IBNEWS
नई दिल्ली: National Handloom Designer Conference 2026: हथकरघा सेक्टर को डिजाइन से मिलेगा नया बाजार, भारत के हथकरघा क्षेत्र को डिजाइन, नवाचार और आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में National Handloom Designer Conference 2026 का आयोजन किया गया। वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, फैशन डिजाइनरों, वस्त्र विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, क्लस्टर डिजाइनरों, मास्टर बुनकरों, निर्यातकों, खुदरा विक्रेताओं और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
सम्मेलन का मुख्य फोकस डिजाइन आधारित नवाचार, बाजारोन्मुख उत्पाद विकास, बुनकरों की आय बढ़ाने और भारतीय हथकरघा उत्पादों को घरेलू एवं वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर रहा।

वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हथकरघा क्षेत्र का भविष्य केवल भारत के बुनकरों के पारंपरिक कौशल पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत संस्थागत समर्थन भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश का हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। मंत्रालय के सहयोगी तंत्र के तहत 29 बुनकर सेवा केंद्र और 357 हथकरघा क्लस्टर विकास कार्यक्रम उत्पादन क्षमता, कौशल और बाजार संपर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वस्त्र मंत्रालय की सचिव ने बताया कि इस वर्ष डिजाइन की दृष्टि से संभावनाशील 80 हथकरघा क्लस्टरों को एक संरचित डिजाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इसके लिए लगभग 80 डिजाइनरों को सीधे जोड़ा गया, ताकि पारंपरिक हथकरघा उत्पादों में आधुनिक डिजाइन और बाजार की जरूरतों के अनुरूप बदलाव किए जा सकें। सरकार का उद्देश्य डिजाइन को केवल सौंदर्य सुधार तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसे प्रीमियम मूल्य निर्धारण और बुनकरों की आय बढ़ाने का माध्यम बनाना है।

विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने भारतीय हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और सततता बढ़ाने में डिजाइन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलती बाजार मांगों के अनुरूप पारंपरिक शिल्प को विकसित करने के लिए डिजाइनरों और बुनकरों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। डिजाइन विशेषज्ञों और बुनकरों की साझेदारी से पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक उत्पादों में बदलने और नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंच बनाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता 2026 में चयनित उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में आठ राज्यों के नौ हथकरघा क्लस्टरों में किए गए डिजाइन हस्तक्षेप और समकालीन उत्पाद विकास को प्रदर्शित किया गया। इनमें प्रमुख क्लस्टर-मिरनचक क्लस्टर, पूर्व बर्धमान क्लस्टर, वनिता क्लस्टर, देव भूमि भराड़ी क्लस्टर, द्वारका क्लस्टर, खुरकुल क्लस्टर, रिडरोल क्लस्टर, इंफाल पूर्व और कोंडापालकला क्लस्टर शामिल हैं।
इन क्लस्टरों के उत्पादों में पारंपरिक बुनाई विरासत को आधुनिक डिजाइन और बदलती बाजार प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया।

National Handloom Designer Conference 2026 का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता 2026 का पुरस्कार समारोह रहा। इस दौरान परिधान, गृह सज्जा, शिल्प पुनरुद्धार और निर्णायक मंडल की विशेष सम्मान श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्लस्टर डिजाइनरों को सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के माध्यम से उन डिजाइन हस्तक्षेपों को पहचान मिली, जिन्होंने पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सौंदर्यबोध और बदलती उपभोक्ता मांग के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा।
सम्मेलन में हथकरघा क्षेत्र के भविष्य से जुड़े तीन प्रमुख विषयों पर पैनल चर्चा आयोजित की गई।
1. डिजाइन नवाचार और बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता- इस चर्चा में बदलते उपभोक्ता रुझान, उत्पाद डिजाइन, ब्रांडिंग और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय हथकरघा की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर विचार किया गया।
2. सतत क्लस्टर विकास और भारतीय हथकरघा का भविष्य-इस सत्र में हथकरघा क्लस्टरों को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, सतत उत्पादन और बुनकरों की आजीविका को सुरक्षित रखने पर चर्चा हुई।
3. मूल्य सृजन के लिए डिजाइन थिंकिंग-इस पैनल में डिजाइन को केवल उत्पाद की सुंदरता से आगे ले जाकर मूल्य संवर्धन, प्रीमियम उत्पाद निर्माण और बेहतर बाजार अवसर पैदा करने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने भारतीय हथकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ब्रांडिंग, निर्यात, प्रौद्योगिकी के एकीकरण और नए उपभोक्ता रुझानों को समझने की जरूरत पर जोर दिया। भारतीय हथकरघा की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविध पारंपरिक बुनाई तकनीक, स्थानीय शिल्प और सांस्कृतिक विरासत है। डिजाइन और आधुनिक बाजार रणनीतियों के साथ इन विशेषताओं को जोड़कर उच्च-मूल्य वाले उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
सम्मेलन में प्रदर्शित उत्पादों ने यह दिखाया कि भारतीय हथकरघा क्षेत्र में परंपरा और आधुनिकता के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। डिजाइन हस्तक्षेप के माध्यम से पारंपरिक बुनाई, रंग, पैटर्न और तकनीकों को आधुनिक परिधान, होम डेकोर और अन्य लाइफस्टाइल उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक तरफ भारतीय बुनाई विरासत का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी तरफ बुनकरों के उत्पादों को नए बाजार और बेहतर कीमत मिल सकती है।
वस्त्र मंत्रालय का जोर हथकरघा क्षेत्र को केवल विरासत और परंपरा के रूप में संरक्षित करने के बजाय इसे आर्थिक रूप से मजबूत और बाजार आधारित क्षेत्र बनाने पर है। डिजाइन, तकनीक, कौशल विकास, बाजार संपर्क और ब्रांडिंग के बेहतर इस्तेमाल से बुनकरों के उत्पादों की मांग बढ़ाने और उन्हें प्रीमियम बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
National Handloom Designer Conference 2026 ने यह संदेश दिया कि भारतीय हथकरघा की वैश्विक क्षमता को बढ़ाने के लिए डिजाइन और नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श और प्रदर्शनी से डिजाइनर-बुनकर सहयोग को मजबूत करने, सतत आजीविका को बढ़ावा देने और भारतीय हथकरघा उत्पादों की घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा को आधुनिक डिजाइन, तकनीक और बाजार से जोड़कर हथकरघा क्षेत्र को नई आर्थिक ताकत देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
National Handloom Designer Conference 2026, Handloom Designer Conference, Handloom Design Competition 2026, Indian Handloom, Handloom Sector, Handloom Weavers, Textile Ministry, Handloom Cluster, Handloom News, Indian Textiles, हथकरघा, हथकरघा समाचार, हथकरघा बुनकर, वस्त्र मंत्रालय










1 thought on “National Handloom Designer Conference 2026: हथकरघा सेक्टर को डिजाइन से मिलेगा नया बाजार”
Badhia