AAERI Verify लॉन्च, छात्रों के शैक्षणिक, पहचान और वित्तीय दस्तावेजों का सुरक्षित और कागजरहित सत्यापन; आवेदन प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी
डॉ दीपक शर्मा
नई दिल्ली: विदेश में पढ़ाई का सपना होगा आसान: ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी में आवेदन से पहले अब DigiLocker से होगा दस्तावेजों का डिजिटल वेरिफिकेशन, विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल शुरू की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) और भारत में ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा प्रतिनिधियों के संघ (AAERI) की साझेदारी से ‘AAERI Verify’ नामक डिजिटल दस्तावेज सत्यापन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है।
इस प्लेटफॉर्म को DigiLocker के साथ सीधे एकीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों के शैक्षणिक, पहचान और वित्तीय दस्तावेजों का सुरक्षित, कागजरहित और छात्र की सहमति पर आधारित डिजिटल सत्यापन करना है।
‘AAERI Verify’ का आधिकारिक अनावरण 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित AAERI के वार्षिक सम्मेलन के दौरान किया गया। इस पहल को ऑस्ट्रेलियाई उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए छात्रों के प्रमाण-पत्रों की जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। AAERI Verify एक source-verified authentication platform के रूप में काम करेगा। इसका मतलब है कि छात्रों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता सीधे विश्वसनीय और अधिकृत स्रोतों से सत्यापित की जा सकेगी।
AAERI Verify को DigiLocker के साथ जोड़ने से छात्रों को अपने डिजिटल दस्तावेज ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के साथ अधिक सुरक्षित तरीके से साझा करने की सुविधा मिलेगी। छात्र की स्पष्ट सहमति के बाद DigiLocker के माध्यम से मूल जारीकर्ता संस्थानों द्वारा जारी और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित रिकॉर्ड तक पहुंच उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे कागजी दस्तावेज भेजने और मैनुअल वेरिफिकेशन पर निर्भरता कम होगी। इस व्यवस्था से दस्तावेजों में छेड़छाड़ या फर्जी प्रमाण-पत्रों के इस्तेमाल का जोखिम कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नई डिजिटल व्यवस्था को मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित किया गया है। चरण 1: छात्र सत्यापन- विश्वविद्यालय में आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले छात्र के शैक्षणिक और पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सकेगा। इससे विश्वविद्यालयों को आवेदन की शुरुआती प्रक्रिया में ही प्रमाण-पत्रों की विश्वसनीयता जांचने में मदद मिलेगी।
चरण 2: प्रायोजक जांच- छात्र को विश्वविद्यालय से प्रवेश प्रस्ताव मिलने के बाद वित्तीय दस्तावेजों और प्रायोजक की वित्तीय प्रामाणिकता की जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस दो-स्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य पूरी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
AAERI Verify और DigiLocker के एकीकरण से विदेश में पढ़ाई की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है जिससे कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी, दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन संभव होगा, मैनुअल वेरिफिकेशन में लगने वाला समय कम हो सकता है, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का जोखिम घटेगा, छात्र की सहमति के आधार पर दस्तावेज साझा किए जाएंगे और मूल जारीकर्ता संस्थानों से सत्यापित रिकॉर्ड तक पहुंच संभव होगी तथा ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के लिए प्रमाण-पत्रों की जांच प्रक्रिया आसान होगी।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के निदेशक जेएल गुप्ता ने इस साझेदारी को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक उपयोगिता से जोड़ते हुए कहा कि DigiLocker को AAERI Verify के साथ एकीकृत करने से भारतीय छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रवेश प्रक्रिया को सुरक्षित, कागजरहित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन में NeGD की भूमिका पर भी प्रस्तुति दी।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) की स्थापना वर्ष 2009 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग के रूप में की गई थी। NeGD व्यापक परियोजना प्रबंधन, नीति निर्माण और तकनीकी मूल्यांकन सहित डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े कार्यों में सहयोग करता है। इसके तकनीकी प्लेटफॉर्म विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के डिजिटल कार्यप्रवाह को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), विदेश मंत्रालय (MEA) और नीति आयोग सहित कई संस्थाएं शामिल हैं।
DigiLocker डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की प्रमुख पहलों में से एक है। यह नागरिकों को अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी किए गए प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से स्टोर करने, साझा करने और सत्यापित करने की सुविधा देता है। दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार DigiLocker के 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। प्लेटफॉर्म अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों के सुरक्षित जारीकरण, भंडारण, साझाकरण और रियल-टाइम सत्यापन को सक्षम बनाता है।
AAERI Verify को भारतीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑस्ट्रेलियाई उच्च शिक्षा प्रणाली के बीच एक महत्वपूर्ण डिजिटल कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। विदेश में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के लिए दस्तावेज सत्यापन अक्सर समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। ऐसे में डिजिटल और स्रोत-सत्यापित प्रणाली से आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिल सकती है। यह पहल भारत की डिजिटल गवर्नेंस क्षमताओं को वैश्विक शिक्षा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का एक प्रमुख गंतव्य है। विश्वविद्यालयों में दाखिले के दौरान शैक्षणिक योग्यता, पहचान और वित्तीय क्षमता से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होती है। AAERI Verify के जरिए इन दस्तावेजों को अधिक सुरक्षित और डिजिटल तरीके से सत्यापित करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इससे भविष्य में भारतीय छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा आवेदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।
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