आईटी नियम 2021 और 2026 संशोधनों के तहत सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त दिशा-निर्देश किए लागू,
महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर विशेष जोर
अरुण कुमार
नई दिल्ली:सरकार का बड़ा डिजिटल सुरक्षा अभियान: अश्लील, डीपफेक और AI से बने फर्जी कंटेंट पर होगी सख्त कार्रवाई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बढ़ी जिम्मेदारी, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी नीतियों का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है। सरकार ने कहा है कि इंटरनेट को अश्लील, आपत्तिजनक, डीपफेक और अन्य गैरकानूनी सामग्री से मुक्त रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं।
सरकार ने कहा कि आईटी नियम, 2021 के तहत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री को रोकें, जो अश्लील या पोर्नोग्राफिक हो, बाल यौन शोषण से संबंधित हो, बच्चों के लिए हानिकारक हो, किसी व्यक्ति की निजता का उल्लंघन करती हो और महिलाओं या किसी भी लिंग के प्रति अपमानजनक या उत्पीड़नकारी हो या किसी भी लागू भारतीय कानून का उल्लंघन करती हो, यदि कोई मध्यस्थ इन कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करता, तो उसे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (थर्ड पार्टी कंटेंट पर कानूनी छूट) का लाभ नहीं मिलेगा और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकार ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को आईटी नियमों में संशोधन कर कृत्रिम रूप से तैयार जानकारी (Synthetic Generated Information – SGI) और डीपफेक जैसी तकनीकों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नियामक ढांचे को और मजबूत किया गया। संशोधित नियमों के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों और बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्मों को AI से तैयार अवैध कंटेंट, डीपफेक वीडियो, किसी व्यक्ति का फर्जी प्रतिरूपण और अश्लील और भ्रामक सामग्री व बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय लागू करना होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट पाया जाता है जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) या POCSO Act, 2012 के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को इसकी जानकारी सक्षम कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देनी होगी।
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से नागरिक सभी प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं- महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की गुमनाम शिकायत, “महिला/बाल संबंधित अपराध” मॉड्यूल और पहचान गोपनीय रखते हुए शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई है।
NCRP में “Report & Check Suspect” मॉड्यूल भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से नागरिक निम्नलिखित की रिपोर्ट कर सकते हैं जैसेकि संदिग्ध वेबसाइट URL, WhatsApp नंबर, Telegram हैंडल, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, SMS Header और सोशल मीडिया लिंक तथा Deepfake सामग्री।
सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (CCPWC) योजना के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस राशि से साइबर फोरेंसिक लैब, प्रशिक्षण केंद्र, साइबर सलाहकार व पुलिस, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं को विकसित किया गया है। सरकार के अनुसार- 33 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। 24,600 से अधिक पुलिस कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और लोक अभियोजकों को साइबर अपराध जांच एवं फोरेंसिक का प्रशिक्षण दिया गया है।
I4C द्वारा 2 लाख से अधिक NCC, NSS और NYKS स्वयंसेवकों को साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है और छात्रों के लिए ‘किशोरों/शिक्षार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक’ व महिलाओं के लिए ‘महिला सुरक्षा हेतु साइबर सुरक्षा हैंडबुक’ भी जारी की गई हैं। सरकार Information Security Education & Awareness (ISEA) परियोजना के माध्यम से सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करने तथा आम नागरिकों में साइबर स्वच्छता और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी कर रही है।
सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम और AI आधारित तकनीकों के दौर में इंटरनेट को सुरक्षित बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। नए नियमों के माध्यम से सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को ऑनलाइन सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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सरकार का डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर ये फैसला बिल्कुल सराहनीय हे, ओर ये होना भी जरूरी था ये हमारे देश में हो रहे बढ़ते अपराध को रोकने के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा।