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नई दिल्ली: विश्व स्तनपान सप्ताह 2026: जन्म के पहले घंटे में मां का दूध सबसे जरूरी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुरू किया देशव्यापी जागरूकता अभियान,

New Delhi: World Breastfeeding Week 2026: Mother's milk is most important in the first hour of birth, Ministry of Women and Child Development launches nationwide awareness campaign,

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1 से 7 अगस्त तक पूरे देश में मनाया जा रहा है विश्व स्तनपान सप्ताह,

‘जीवन की सर्वोत्तम संभव शुरुआत हेतु स्तनपान’ विषय पर विशेष गतिविधियां

सुनीता भट्ट अरुण

नई दिल्ली: विश्व स्तनपान सप्ताह 2026: जन्म के पहले घंटे में मां का दूध सबसे जरूरी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुरू किया देशव्यापी जागरूकता अभियान, भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 1 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक पूरे देश में विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week 2026) मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है “जीवन की सर्वोत्तम संभव शुरुआत हेतु स्तनपान: स्तनपान के महत्व का प्रचार”

यह अभियान पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य संस्थानों, आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक मंचों और डिजिटल मीडिया के माध्यम से स्तनपान के महत्व के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाई जा रही है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन उसके संपूर्ण विकास की नींव रखते हैं। इन 1000 दिनों में गर्भावस्था की अवधि, जन्म के बाद पहले 6 महीने और जन्म के बाद 24 महीने तक का समय शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसी अवधि में मिलने वाला उचित पोषण, देखभाल और स्नेह बच्चे के मस्तिष्क विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक वृद्धि और सीखने की क्षमता व भविष्य के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है।
मंत्रालय ने सभी परिवारों से अपील की है कि नवजात शिशु को जन्म के पहले घंटे (Golden Hour) के भीतर मां का दूध अवश्य पिलाया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह समय बच्चे के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
मंत्रालय ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध (Colostrum) शिशु के लिए अमूल्य होता है। इसे अक्सर “शिशु का पहला प्राकृतिक टीका” कहा जाता है क्योंकि इसमें एंटीबॉडी और प्रोटीन तथा आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस पहले दूध को कभी भी फेंकना नहीं चाहिए।
अभियान के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि जन्म के बाद पहले 6 महीने तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाए। इस दौरान शिशु को पानी, शहद, घुट्टी, ग्लूकोज, फॉर्मूला दूध देने की आवश्यकता नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार केवल मां का दूध ही बच्चे की सभी पोषण और पानी की जरूरतों को पूरा करता है तथा संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है। मंत्रालय ने सलाह दी है कि 6 महीने पूरे होने पर उम्र के अनुसार पूरक आहार शुरू किया जाए, साथ ही स्तनपान दो वर्ष या उससे अधिक समय तक जारी रखा जाए।
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान सही स्तनपान पोजिशन, शिशु को सही तरीके से पकड़ना, त्वचा से त्वचा का संपर्क और बार-बार स्तनपान तथा स्तनपान संबंधी समस्याओं का समाधान जैसे विषयों पर माताओं को मार्गदर्शन दिया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि जो माताएं नौकरी पर वापस लौटती हैं, उन्हें Breast Milk निकालने और सुरक्षित तरीके से संग्रहित करने तथा शिशु को उपलब्ध कराने के बारे में भी परामर्श दिया जा रहा है ताकि स्तनपान बिना बाधा जारी रह सके। अभियान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, एएनएम और चिकित्सक व पोषण विशेषज्ञ माताओं को आवश्यक सहायता और परामर्श प्रदान कर रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य कर्मियों, परिवारों और समाज से अपील की है कि ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार किया जाए, जिसमें हर मां बिना किसी बाधा के स्तनपान करा सके और प्रत्येक बच्चे को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत मिल सके। विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य केवल माताओं को जागरूक करना नहीं, बल्कि पूरे समाज को यह समझाना है कि स्वस्थ भारत की नींव स्वस्थ माताओं और स्वस्थ बच्चों से ही रखी जा सकती है।

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Ib News
Author: Ib News

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