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नई दिल्ली: 30 साल पुरानी पानी की समस्या का समाधान: राजस्थान-हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर, लाखों लोगों को मिलेगा लाभ,

New Delhi: Solution to a 30-year-old water problem—Yamuna water project agreement signed between Rajasthan and Haryana; lakhs of people to benefit.

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नई दिल्ली:30 साल पुरानी पानी की समस्या का समाधान: राजस्थान-हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर, लाखों लोगों को मिलेगा लाभ, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा दोनों राज्यों एवं केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अमित शाह ने इस समझौते को सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे दोनों राज्यों के लोगों की लगभग तीन दशक पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो गया है। समझौते के अनुसार जुलाई से अक्टूबर के बीच लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी पश्चिमी यमुना नहर से तीन विशाल भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा और इनके माध्यम से राजस्थान तथा हरियाणा के लाखों लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। विशेष रूप से राजस्थान के शुष्क और कम वर्षा वाले इलाकों में यह परियोजना जीवनरेखा साबित होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति देगी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “सहकारी संघवाद” के मंत्र को हरियाणा, राजस्थान और जल शक्ति मंत्रालय ने सच्चे अर्थों में चरितार्थ किया है। उन्होंने कहा कि—“यदि राज्य सहयोग और समन्वय की भावना से कार्य करें तो तीन दशक पुरानी समस्याओं का भी सहज समाधान संभव है।” उन्होंने इस समझौते को दोनों राज्यों के लिए Win-Win Situation करार दिया।
समझौते में निम्न प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है जैसे कि लागत और वित्तीय जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, जल आवंटन और जल छोड़ने के वैज्ञानिक प्रोटोकॉल, संचालन एवं रखरखाव की स्पष्ट व्यवस्था और निगरानी और पारदर्शिता तंत्र व विवाद समाधान की प्रभावी प्रक्रिया।

अमित शाह ने कहा कि यह समझौता आने वाले दशकों तक विवाद-मुक्त और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित रहेगा। गृह मंत्री ने कहा कि जो पानी अब तक उपयोग में नहीं आ रहा था, वह अब लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ बड़े जलाशयों और तालाबों में संग्रहित होकर भूजल स्तर बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इससे जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी। यह परियोजना पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान के हिस्से का पानी पहुंचाने की व्यवस्था करेगी, जिससे राज्य 1994 के अपर यमुना बेसिन समझौते के तहत अपने अधिकार वाले जल का पूर्ण उपयोग कर सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा, कृषि और पशुपालन को लाभ मिलेगा, भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी तथा लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। यह परियोजना भारत में सहकारी संघवाद, जल प्रबंधन और सतत विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत करती है।

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Ib News
Author: Ib News

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