कच्चा तेल 122 डॉलर पहुंचा, सरकार का बड़ा फैसला — पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये टैक्स कम
पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये राहत, लेकिन कीमत वही — सरकार ने उठाया बड़ा वित्तीय बोझ
ईंधन संकट के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला — पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई
अरुण कुमार
नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में तत्काल कटौती कर दी है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कटौती का सीधा असर पेट्रोल पंपों पर कीमतों में कमी के रूप में नहीं दिखाई देगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि यह निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर बढ़ते घाटे को कम करने और देश में ईंधन की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने के लिए लिया गया है।

सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, इस तेज उछाल की वजह सभी जानते हैंं पहला पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष दुसरा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और तीसरा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग है पिछले चार सप्ताह से भी कम समय में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि उत्पाद शुल्क में कटौती का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सीधे राहत देना नहीं बल्कि तेल कंपनियों के घाटे को कम करना है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन वर्तमान में लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल पर घाटा 26 रुपये प्रति लीटर हो रहा है, डीजल पर घाटा 81.90 रुपये प्रति लीटर और कुल दैनिक घाटा करीब 2,400 करोड़ रुपये हो रहा है बावजूद इसके 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटाने से इन घाटों को आंशिक रूप से कम किया जाएगा।

सरकार ने बताया कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में कीमतें 30-50% बढ़ींं हैं, उत्तरी अमेरिका में 30% वृद्धि हुई है और यूरोप में 20% तक बढ़ोतरी लेकिन इसके बावजूद भारत में कीमतों को स्थिर रखा गया है, जिसकी वित्तीय लागत सरकार खुद उठा रही है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे — कीमतें बढ़ाकर बोझ जनता पर डालना या वित्तीय बोझ उठाकर नागरिकों को राहत देना, उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाने के लिए सरकारी खजाने पर बोझ उठाने का निर्णय लिया।

सरकार ने डीजल पर निर्यात शुल्क भी लागू कर दिया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना, निर्यात के बजाय घरेलू मांग को प्राथमिकता देना और डीजल की संभावित कमी रोकना है। सरकार ने कहा कि वर्तमान समय में घरेलू जरूरतों को पूरा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सरकार ने बताया कि यह फैसला 2022 के रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान अपनाई गई रणनीति के अनुरूप है, जब सरकार ने करों में कटौती कर जनता को राहत दी थी। सरकार कहना है कि वैश्विक ऊर्जा स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी, जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जाएंगे ताकि ईंधन की आपूर्ति और कीमतों की स्थिरता सुनिश्चित की जाएगी। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद सरकार ने पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर रखने का फैसला लिया है। उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती से तेल कंपनियों का घाटा कम होगा और देश में ईंधन की आपूर्ति बिना बाधा जारी रहेगी।
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