Search
Close this search box.

मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा स्वशिक्षा का बोध: प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी

स्वशिक्षा से मिलेगी मानसिक मुक्ति: प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, संस्कृत के उत्थान से मजबूत होंगी भारतीय भाषाएँ

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

संस्कृत के उत्थान से खड़ी हो जाएगी सभी भारतीय भाषाएँ

डॉ. दीपक शर्मा

नई दिल्ली— भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था में औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने पर जोर दिया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “स्वबोध – औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का मार्ग” रखा गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि स्वशिक्षा और स्वबोध ही वास्तविक मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षों से अनेक आक्रमणों का सामना करने के बावजूद आज भी अपनी सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखे हुए है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को लेकर कई तरह की शंकाएँ व्यक्त की जाती हैं, लेकिन चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय सभ्यता की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि यह हर चुनौती से उबरने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के प्रयास से समाज में परिवर्तन आ सकता है, इसलिए हर व्यक्ति को योगदान देना चाहिए। प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत के उत्थान से सभी भारतीय भाषाओं को मजबूती मिलेगी, क्योंकि भारतीय भाषाओं की जड़ें संस्कृत से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने शिक्षा में भारतीय दृष्टिकोण अपनाने और शोध आधारित कार्यों को बढ़ाने पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्रकुमार अनायत ने कहा कि व्यक्ति को अच्छा बोलना, अच्छा सुनना और अच्छा देखना चाहिए, इससे स्वबोध स्वतः विकसित होता है। उन्होंने मंत्रों में तीन बार ‘शांति’ के उच्चारण का अर्थ समझाते हुए कहा कि पहली शांति विश्व के लिए, दूसरी समाज के लिए और तीसरी स्वयं के लिए होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की बुद्धि ही उसे विशेष बनाती है और जब तक व्यक्ति स्वयं हार नहीं मानता, कोई भी शक्ति उसे पराजित नहीं कर सकती।
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत के संघ चालक डॉ. अनिल अग्रवाल ने शिक्षा व्यवस्था और पाठ्य सामग्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से मस्तिष्क का बेहतर विकास होता है, फिर भी हम अपनी भाषाओं में शिक्षा देने से क्यों पीछे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास संघर्ष का रहा है, गुलामी का नहीं। अंग्रेजों के आने के बाद भारतीयों का स्वाभिमान प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि विश्व की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाएँ अपनी भाषा में शिक्षा देती हैं, इसलिए भारत को भी अपनी भाषाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के पैमानों से स्वयं को मापने के बजाय हमें अपने पैमानों पर स्वयं को आंकने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में भारतीय शिक्षण मंडल, दिल्ली प्रांत के उपाध्यक्ष प्रो. रवींद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षा में फैली औपनिवेशिक मानसिकता को दूर करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज भी हम मानसिक रूप से बाहरी ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं और भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर समझते हैं, लेकिन अब इस सोच में परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने सभी से इस दिशा में सक्रिय कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर दिल्ली प्रांत द्वारा प्रकाशित ‘सार्थक’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में बड़ा संदेश: स्वबोध से ही मिलेगी मानसिक गुलामी से आज़ादी
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानंद का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक और ध्येय वाक्य के उच्चारण से हुई। कार्यक्रम का संचालन और अतिथियों का परिचय डॉ. मनीषा चौरसिया ने दिया, जबकि डॉ. बबिता सिंह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अंत में डॉ. धर्मेन्द्र नाथ तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र और वंदे मातरम् के साथ हुआ।

इस अवसर पर प्रो अजय कुमार अरोरा, प्रो धनंजय जोशी, प्रो. रवि प्रकाश टेकचन्दानी, प्रो. अजय कुमार भागी,  डॉ ऋषि मोहन भटनागर, सचिन मारण, प्रो. अरविन्द कुमार, प्रो पवित्रा भारद्वाज, प्रो. आर के गुप्ता, डॉ विभूति गौड़, डॉ अमित खरखड़े, प्रो. संजय भारद्वाज, डॉ सूर्य प्रकाश, डॉ नरेश तंवर, प्रो. नारायण प्रसाद, प्रो. विजेता सिंह अग्रवाल, डॉ एस के दुबे सहित समाज और शिक्षा जगत के कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

#Indian Education Reform #Sanskrit Language India #Delhi University News #Education Policy India
#Indian Knowledge System #Indian Education System #Mother Tongue Education

#भारतीय शिक्षण मंडल, #Srinivas Varkhedi, #Indian Education System, #Sanskrit Language India, #Ramjas College Delhi, #Indian Knowledge System, #Education Reform India, #Mother Tongue Education India, #Colonial Mindset Education, #Indian Education News, #Delhi University News, #Education Conference Delhi

Ib News
Author: Ib News

1 thought on “मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा स्वशिक्षा का बोध: प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी”

Leave a Comment

और पढ़ें